
एसआईएफ यानी स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स, निवेशकों के लिए यह उनकी पहली पसंद बनता जा रहा है। बता दें कि यह इन्वेस्टर्स को बाजार की गिरावट से बचने और स्थिरता देने का मौका दे रहा है। हालांकि ऐसा नहीं है कि इसमें कोई रिस्क मौजूद नहीं है। इसमें भी पूंजी डूबना या मार्केट वोलैटिलिटी जैसे बड़े रिक्स शामिल हैं। ऐसे में यदि आप एसआईएफ में इन्वेस्ट करने जा रही हैं तो आपको पता होना चाहिए कि एसआईएफ की चर्चा क्यों बढ़ती जा रही है और फंड के बाजार में क्या उतार-चढ़ाव इससे जुड़े हो सकते हैं। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि एसआईएफ में इन्वेस्ट करने से पहले आपको क्या पता होना जरूरी है। पढ़ते हैं आगे...
एसआईएफ म्यूचुअल फंड से ज्यादा फ्लैक्सिबल होता है। हालांकि, रेगुलेशन के मामले में देखा जाए तो यह पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस यानी पीएमएस या हेज फंड के तुलना में ज्यादा सुरक्षित और आसान है।

बता दें कि इनके जो मैनेजर्स हैं, वे बाजार के दोनों तरफ दाव लगा सकते हैं, जो कि एक अच्छी बात है। वहीं ये लोग अच्छी कंपनियों के शेयर भी खरीद सकते हैं और जो कमजोर कंपनियां या सेक्टर हैं उनके बेच भी सकते हैं।
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यदि आप लॉन्ग स्ट्रेटजी अपनाना चाहते हैं तो बता दें कि इसमें पैसे डूबने का डर ज्यादा रहता है। बाजार में ऐसी कोई स्कीम नहीं है, जहां दोनों तरफ से पैसा कमाएंगे। हालांकि, कई स्थितियां ऐसी होती हैं, जब आपने शेयर खरीदा तो इसकी कीमत गिर गई और जैसे ही आपने उसे बेचा वैसे ही उसकी कीमत बढ़ गई। ऐसी स्थिति में निवेशक को दोनों तरफ से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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इससे अलग SIF में निवेश करने का मतलब है कि आपको फायदा के साथ-साथ नुकसान भी हो सकते हैं। ऐसे में आपको दोनों स्थिति में तैयार रहने की जरूरत है। इसे कभी भी साधारण म्यूचुअल फंड के रूप में ना देखें। अगर इसे ठीक से समझा जाए तो यह रिस्क रिवॉर्ड बैलेंस को सुधरता है लेकिन यदि इस पर बिना समझें पैसे लगाए गए तो यह आपका पैसा डूबा भी सकता है। यह केवल उन लोगों के लिए है जो धैर्य के साथ निवेश करते हैं। जिन लोगों को रातों-रात पैसा कमाना है उनके लिए ये ऐप नहीं बना है। जो कम उतार चढ़ाव चाहते हैं और पोर्टफोलियो में स्थिरता चाहते हैं ये उनके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
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