
एशियाई पैरा खेल 2023 में जम्मू कश्मीर की रहने वाली शीतल देवी ने इतिहास रच दिया है। वह दोनों बाजु के बिना ही अपनी छाती के सहारे दांतों और पैर से तीरंदाजी करने वाली पहले भारतीय खिलाड़ी बन गई है। उन्होंने एक ही संस्करण में 2 स्वर्ण पदक अपने नाम कर दिए हैं।
16 साल की इस खिलाड़ी ने महिलाओं की युगल स्पर्धा में रजत पदक भी जीता है। वह ऐसा करने वाली पहली खिलाड़ी बनीं हैं। आइए भारत की बेटी शीतल देवी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

जुलाई में शीतल देवी ने पैरा विश्व तीरंदाजी चैम्पियनशिप में सिंगापुर की अलीम नूर एस को 144.142 से हराकर गोल्ड जीता था। अब तक भारत में कुल मिलाकर 94 पदक हो गए हैं, जिनमें बैडमिंटन खिलाड़ियों ने नौ पदक जीते हैं। वहीं शीतल ने राकेश कुमार के साथ मिलकर एशियाई खेल की मिश्रित कंपाउंड इवेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया। उन्होंने टीम इवेंट में रजत पदक जीता था। व्यक्तिगत कंपाउंड तीरंदाजी में सिंगापुर की अलीम नूर सयाहिदा को 144-142 से हराकर दूसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उसके बाद भारत के लिए हांगझोऊ में हो रहे इस खेल में उन्होंने पहला पदक जीता। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली बिना हाथों वाली पहली तीरंदाज हैं।
शीतल को जन्मसे ही फोकोमेलिया नाम की बीमारी (बीमारी को ऐसे भगाएं दूर) है। इस बीमारी में अंग विकसित नहीं हो पाता है। शीतल देवी ठीक से धनुष नहीं उठा पाती थीं, लेकिन कुछ महीने उन्होंने लगातार अभ्यास किया और इसके बाद उन्होंने उनके लिए यह सभी चीजें आसान हो गई। शीतल का किसी ने साथ नहीं दिया, उसके बावजूद उनके घरवालों ने पूरा साथ दिया।
I will never,EVER again complain about petty problems in my life. #SheetalDevi you are a teacher to us all. Please pick any car from our range & we will award it to you & customise it for your use. pic.twitter.com/JU6DOR5iqs
— anand mahindra (@anandmahindra) October 28, 2023
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It is a Glorious Gold for our Para Archery Mixed Team.
— Narendra Modi (@narendramodi) October 26, 2023
Congrats to Sheetal Devi and @RakeshK21328176 for their extraordinary performance.
This glory is a testament to their precision, dedication and exceptional skills. pic.twitter.com/g5Pw5qdJl7
शीतल ने 2 साल पहले धनुष और बाण के साथ अभ्यास करना शुरू किया था। उन्होंने साल 2021 में पहली बार भारतीय सेना के एक युवा प्रतियोगीता में भाग लिया था। शीतल ने अपने काम के बलबुते पर सभी कोच को अपनी ओर आकर्षित किया। इसके बाद सेना ने उनके आर्टिफिशियल (आर्टिफिशियल ज्वैलरी) हाथ के लिए बैंगलोर में मेजर अक्षय गिरीश मेमोरियल ट्रस्ट से संपर्क भी किया था, लेकिन आर्टिफिशियल हाथ उन्हें फीट नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने शरीर के ऊपरी हिस्सों को मजबूत करने पर जोर दिया।
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शीतल के कोच अभिलाषा चौधरी और कुलदीप वेदवान ने कभी ऐसी तीरंदाजी को ट्रेनिंग नहीं दी थी, लेकिन शीतल की मेहनत देखकर उन्होंने उनकी मदद की। धीरे-धीरे प्रयास करने के बाद उन्होंने पैरा ओपन नेशनल्स में रजत पदक अपने नाम कर लिया।
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