
Which Is Better HoneyComb Or Grass Cooler: सर्दी का मौसम लगभग खत्म हो चुका है। हाल ये आ गया है, लोग पतला कंबल ओठने के साथ पंखे को चलाना शुरू कर दिया है। वहीं आने वाली गर्मी से बचने के लिए लोग कूलर और एसी की सर्विसिंग करानी शुरू कर दी है। हालांकि कूलर की घास को बदलवाते समय मन में आता है कि कौन सी घास भीषण तपिश में राहत का काम करेगी।
अगर आपके मन में भी यह सवाल आ रहा है, तो परेशान होने की जरूरत या फिर इधर-उधर पूछने की जरूरत नहीं है। तपती गर्मी और उमस भरे मौसम में जब पंखा भी गर्म हवा फेंकने लगता है, तो लोग कूलर की मदद लेते हैं। यह न केवल बजट फ्रेंडली बल्कि ठंडी हवा भी देता है।
कूलर की ठंडी हवा के पीछे दो मुख्य चीजें होती है पहला मोटर और दूसरा उसमें लगी घास। अगर आपके कूलर में सही कूलिंग पैड नहीं है, तो आपको पसीने से राहत नहीं दिला पाएगा। आज के इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कि हनीकॉम्ब और ग्रास पैड में से कौन सा कूलर के लिए बेस्ट है?
हनीकॉम्ब पैड्स और ग्रास पैड दोनों ही कूलर के लिए सही है, लेकिन अगर आप बार-बार घास बदलना नहीं चाहती हैं, तो हनीकॉम्ब बेस्ट है। वहीं अगर आपका बजट कम है और आप हर साल नई जाली डलवा सकती हैं, तो घास वाले पैड्स ठीक हैं। ताजी और बिना बदबू वाली हवा पसंद करते हैं, तो हनीकॉम्ब पैड्स सबसे बेहतरीन चुनाव हैं। ये प्लास्टिक कूलर के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं।
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हनीकॉम्ब पैड्स का आकार मधुमक्खी के छत्ते जैसा होता है। ये खास तरह के सेलूलोज़ कागज से बने होते हैं जिन पर केमिकल की कोटिंग होती है ताकि वे पानी में गलें नहीं।
इन्हें ऐसे डिजाइन किया जाता है कि हवा जैसे ही पानी के संपर्क में आता है, तो उसे ज्यादा जगह मिलती है, जिससे वाष्पीकरण तेज होता है और हवा ज्यादा ठंडी महसूस होती है।
ये पैड्स काफी मजबूत होते हैं। अगर आप इनकी हर महीने एक बार सफाई करते रहें, तो ये आराम से 3 से 4 साल तक चल जाते हैं। साथ ही बार-बार जाली बदलने का झंझट खत्म हो जाता है। इसके अलावा इन्हें बार-बार बदलने की भी जरूरत नहीं होती है।

ग्रास पैड्स यानी घास वाली जाली की खास बात उनकी कीमत होती है। ये काफी सस्ते होते हैं और किसी भी गली-मोहल्ले की दुकान पर आसानी से मिल जाते हैं।
ये पैड्स जब नए होते हैं, तो ये बहुत अच्छी ठंडक देते हैं क्योंकि घास पानी को बहुत तेजी से सोखती है। अगर इनकी उम्र की बात करें, तो यह बहुत कम होती है।
सीजन खत्म होते-होते ये काले पड़ जाते हैं और गलने लगते हैं। इनमें फंगस और बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं, जिससे कूलर से अजीब सी बदबू आने लगती है।
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