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23 साल के साहिल की मौत के बाद बेबस मां की इंसाफ की पुकार, क्या कहते हैं हिट एंड रन के नए कड़े कानून?

दिल्ली में 23 वर्षीय साहिल की मौत एक तेज रफ्तार एसयूवी से हुई, जिसकी मां का आरोप है कि नाबालिग चालक रील बनाने के लिए स्टंट कर रहा था। यह घटना डिजिटल शोहरत की कीमत पर सवाल उठाती है।
Editorial
Updated:- 2026-02-17, 12:44 IST

सोशल मीडिया पर कुछ लाइक्स और व्यूज की भूख अब सड़कों पर काल बनकर दौड़ रही है। 3 फरवरी को दिल्ली की एक सड़क पर जो हुआ, वह महज एक हादसा नहीं बल्कि रील बनाने के जुनून में किया गया एक क्रिमिनल एक्ट था। 23 साल के साहिल की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या डिजिटल शोहरत की कीमत किसी की जान से भी बढ़कर है? ऐसे में पूरे मामले के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि पूरा मामला क्या है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इसके लिए हमने दिल्ली हाईकोर्ट के वकील गोपेश जिंदल से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...

मामला क्या है? 

घटना के अनुसार, एक तेज रफ्तार SUV (स्कॉर्पियो) ने साहिल को अपनी चपेट में ले लिया। साहिल की मां का आरोप है कि गाड़ी एक नाबालिग चला रहा था, जो सड़क पर स्टंट करते हुए रील शूट कर रहा था।

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मां का कहना है कि यह 'हिट एंड रन' का साधारण मामला नहीं है; बिना वैध लाइसेंस के पब्लिक सड़क पर जानलेवा स्टंट करना सीधे तौर पर हत्या के समान है।

लापरवाही या अपराध? 

पीड़ित परिवार का आरोप है कि जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है। दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की उम्र 17 साल है, लेकिन शुरुआती FIR में उसकी उम्र 19 साल दर्ज की गई थी ताकि उस पर बालिग की तरह केस चलाया जा सके। अब मामला किशोर न्याय बोर्ड (JJB) और अदालत के बीच फंसा है कि आरोपी पर नाबालिग के रूप में मुकदमा चले या उसकी गंभीरता को देखते हुए उसे बालिग माना जाए।

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हिट एंड रन के नए कानून और सजा 

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत हिट एंड रन के मामलों में अब बेहद सख्त प्रावधान हैं। नए नियमों के मुताबिक-

यदि कोई चालक लापरवाही से गाड़ी चलाकर किसी की मौत का कारण बनता है और पुलिस को सूचना दिए बिना मौके से भाग जाता है, तो उसे 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है।

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नाबालिग के मामले में 'जुवेनाइल जस्टिस एक्ट' के तहत कठोर कार्रवाई का प्रावधान है, विशेषकर यदि अपराध 'जघन्य' (Heinous) श्रेणी में आता है।

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Images: Freepik/shutterstock

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