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कार में रखी ये 5 चीजें बन सकती हैं धमाके की वजह, गर्मी में भूलकर भी न करें ये गलती

गर्मियों में कार का तापमान 60-70°C तक पहुंच सकता है, जिससे कुछ आम चीजें खतरनाक बन सकती हैं। लाइटर, सैनिटाइजर, डियोड्रेंट, पावर बैंक और गैजेट्स में विस्फोट हो सकता है। 
Editorial
Updated:- 2026-03-13, 13:59 IST

गर्मियों के मौसम में भारत के कई हिस्से ऐसे हैं, जहां तापमान 45°C से 50°C के करीब पहुंच जाता है। जब आप अपनी कार को धूप में खड़ा रखते हैं, तो उस वक्त कांच बंद रहता है, ऐसे में उसके अंदर का तापमान बाहर की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ता है और 60°C से 70°C तक जा चला जाता है। ऐसे में कार के केबिन के अंदर रखी कुछ साधारण चीजें किसी टाइम बम का काम कर सकती हैं। ऐसे में इन चीजों के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि कार में किन चीजों को रखने से परहेज करना चाहिए। पढ़ते हैं आगे...

लाइटर (Lighter)

क्या आप जानती हैं, सिगरेट जलाने वाला लाइटर कार में आग लगने का सबसे बड़ा कारण बन सकता है। जी हां, इसमें बेहद गैस भरी होती है। ऐसे में तेज गर्मी में जब कार के अंदर दबाव बढ़ता है, तो लाइटर फट सकता है। इससे निकली छोटी सी चिंगारी भी पूरी कार को आग के गोले में बदल सकती है।

car accidents (2)

हैंड सैनिटाइजर और डिओडोरेंट (Sanitizer & Deodorant)

कोरोना काल के बाद से सैनिटाइजर कार का हिस्सा बन गया है। इसमें अल्कोहल की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो आग पकड़ने में माहिर होती है। वहीं डिओडोरेंट या हेयर स्प्रे जैसे 'एयरोसोल' डिब्बों के अंदर गैस बहुत ज्यादा दबाव में होती है। ऐसे में गर्मी में ये डिब्बे किसी गुब्बारे की तरह फट सकते हैं और आग की वजह बन सकते हैं।

पावर बैंक और गैजेट्स (Power Banks & Gadgets)

बता दें कि लैपटॉप, मोबाइल और पावर बैंक में लिथियम-आयन बैटरी होती है। ये बैटरियां एक तय तापमान तक ही सेफ रहती हैं। बंद कार की गर्मी में बैटरी के अंदर केमिकल रिएक्शन तेज हो जाता है, जिससे वह न केवल फूल सकती है बल्कि उसमें ब्लास्ट भी हो सकता है। ऐसे में डैशबोर्ड पर मोबाइल छोड़ना तो और भी खतरनाक है क्योंकि सीधी धूप उसे तुरंत गर्म कर देती है।

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पानी की प्लास्टिक बोतल (Plastic Water Bottles)

यह सुनकर शायद आप हैरान हों, लेकिन पानी की ट्रांसपेरेंसी आग लगा सकती है। जब सूरज की किरणें बोतल के अंदर मौजूद पानी पर पड़ती हैं, तो वह एक मैग्नीफाइंग ग्लास' (लेंस) की तरह काम करती है, जिससे लाइट एक बिंदु पर केंद्रित हो जाती है, जिससे कार की सीट या प्लास्टिक जलने लगती है और आग लग सकती है। इसके अलावा, गर्म प्लास्टिक से पानी में केमिकल्स भी घुल जाते हैं।

car accidents

चश्मे और सनग्लासेज (Glasses)

डैशबोर्ड पर रखे चश्मे भी पानी की बोतल की तरह ही काम करते हैं। चश्मे के लेंस धूप को एक जगह इकट्ठा कर देते हैं, जिससे कार के इंटीरियर में आग लग सकती है। साथ ही, ज्यादा गर्मी से चश्मे के फ्रेम भी पिघल कर खराब हो सकते हैं।

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Images: Freepik/shutterstock

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