
Key Differences Interim Full Budget: मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा पूर्ण बजट 1 फरवरी, 2026 को पेश होने वाला है। इस बजट देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौंवी बार लोकसभी में पेश किया जाएगा। बता दें कि इस बार संसद का बजट सत्र दो फेज में चलेगा। भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में बजट एक महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज है, जो सरकार की आगामी वर्ष की योजनाओं और खर्चों का खाका पेश करता है। सरकार को हर फाइनेंशियल ईयर की शुरूआत में बजट पेश करना होता है।
बजट की बात आते ही अक्सर लोगों के दिमाग में अंतरिम और पूर्ण बजट आता है, जिसे अगर कंफ्यूजन रहती है। आइए इस लेख में जानते हैं कि अंतरिम बजट और पूर्ण बजट में क्या फर्क होता है? साथ ही, इसके लिए उनके पास पैसा कहां से आता है और कौन देता है।

अंतरिम बजट चुनावी वर्ष के दौरान एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में पेश किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य नई सरकार के गठन तक देश की अर्थव्यवस्था को सुचारु रूप से चलाना और आवश्यक सरकारी खर्चों के लिए संसद की मंजूरी लेना होता है।
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पूर्ण बजट सरकार का वार्षिक वित्तीय लेखा-जोखा होता है जो पूरे 12 महीनों (1 अप्रैल से 31 मार्च) के लिए पेश किया जाता है। इसमें सरकार नए टैक्स सुधारों, बड़ी योजनाओं और देश के विकास का विस्तृत रोडमैप पेश करती है। यह आमतौर पर हर साल फरवरी में संसद में पेश किया जाता है ताकि आने वाले पूरे साल की आर्थिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाया जा सके।

सरकार को अपना खजाना भरने के लिए मुख्य रूप से टैक्स और उधारी पर निर्भर रहना पड़ता है। कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा GST (वस्तु एवं सेवा कर), कॉरपोरेट टैक्स और इनकम टैक्स से आता है। इसके अलावा, पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और विदेशों से आने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी भी राजस्व का मुख्य स्रोत हैं।
टैक्स के अलावा सरकार अपनी कंपनियों के हिस्से बेचकर, ऋणों पर ब्याज लेकर और विभिन्न सेवाओं की फीस से भी पैसा कमाती है। अगर खर्च ज्यादा हो,तो सरकार बाजार से कर्ज या उधारी भी लेती है।
कमाई के बाद, सरकार इस पैसे को देश चलाने और विकास कार्यों में बांट देती है। सरकार ने जो पहले कर्ज लिया हुआ है, उसका ब्याज चुकाने में एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। केंद्र सरकार अपने पास आए टैक्स का एक बड़ा हिस्सा राज्यों को उनके विकास के लिए देती है।
गरीबों के लिए अनाज, किसानों के लिए खाद की सब्सिडी, और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं पर भारी खर्च होता है। देश की सुरक्षा और रिटायर सरकारी कर्मचारियों की पेंशन पर भी काफी पैसा खर्च किया जाता है।
नए हाईवे, एयरपोर्ट, रेलवे लाइन और पुल बनाने में भी सरकार निवेश करती है ताकि व्यापार और रोजगार बढ़े।

साल 2026 में संसद का बजट सत्र दो फेज में चलेगा। पहला फेज 28 जवनवरी से लेकर 13 फरवरी, 2026 तक चलेगा और दूसरा फेज 9 मार्च से लेकर 2 अप्रैल, 2026 तक चलेगा। वहीं भारत का फाइनेंशियल ईयर का पीरियड 1 अप्रैल से 31 मार्च होता है।
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