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aaj ka suvichar 28 jan 2026

Aaj Ka Suvichar 28 Jan 2026: क्या आप भी बाहर ढूंढ रहे हैं प्यार? आज के सुविचार में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर से ये सच जान लें, वरना उम्र भर भटकती रहेंगी

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने आदर्श रिश्तों पर अपने विचार शेयर किए हैं। वे बताते हैं कि सच्ची खुशी और मजबूत संबंध भीतर की शांति व आत्मनिर्भरता से आते हैं, न कि बाहरी अपेक्षाओं से। उनका कहना है कि दूसरों से सुख की उम्मीद करने से निर्भरता बढ़ती है, जबकि वास्तविक जुड़ाव तब बनता है जब दो स्थिर मन वाले लोग बिना किसी मांग के एक साथ आते हैं।
Editorial
Updated:- 2026-01-28, 08:01 IST

अक्सर हम अपनी खुशियों की चाबी दूसरों के हाथों में थमा देते हैं। हम सोचते हैं कि कोई 'खास' आएगा और हमारी तन्हाई को खुशियों में बदल देगा। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जिस सुकून को आप दुनिया की भीड़ में ढूंढ रहे हैं, वह शायद आपके ही भीतर कहीं सोया हुआ है?

28 जनवरी 2026 के आज के सुविचार में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी रिश्तों के इस अनकहे पहलू से पर्दा उठा रहे हैं, जिसे जाने बिना इंसान उम्र भर भटकता रह जाता है। आइए जानते हैं, क्यों आदर्श रिश्ते की शुरुआत दूसरे व्यक्ति से नहीं, बल्कि आपसे खुद से होती है।

आज का सुविचार

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''अधिकांश लोग एक आदर्श संबंध की तलाश बाहर करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग अपने भीतर झांकते हैं। स्वयं के केन्द्र में ही सभी बाह्य संबंधों का आधार है।''
- गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

कहां है असली जुड़ाव?

गुरुदेव कहते हैं कि ज्‍यादातर लोग एक आदर्श संबंध की तलाश बाहर करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग अपने अंदर झांकते हैं। वास्तविकता यह है कि स्वयं के केन्द्र में ही सभी बाह्य संबंधों का आधार है। यदि आप अंदर से अशांत हैं, तो दुनिया का कोई भी रिश्ता आपको शांति नहीं दे सकता।

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क्या आप अपनी ही संगति से ऊब चुके हैं?

एक कड़वा मगर जरूरी सच, यदि आप अकेले रहने में बोरियत महसूस करते हैं, तो आप दूसरे के लिए भी उबाऊ साबित हो सकते हैं। जो व्यक्ति स्वयं की कंपनी का आनंद लेना नहीं जानता, वह दूसरों पर निर्भर हो जाता है। सच्चा संबंध तब बनता है जब दो खुशहाल और स्थिर मन वाले लोग एक साथ आते हैं, न कि दो खालीपन से भरे लोग।

'मांग' और 'प्रेम': क्यों एक साथ नहीं रह सकते ये दो शब्द?

रिश्तों में दरार तब आती है, जब प्रेम 'मांग' में बदल जाता है। गुरुदेव के अनुसार, मांग प्रेम को नष्ट कर देती है। जब हम सुरक्षा और सुख की उम्मीद दूसरों से करने लगते हैं, तब हम इमोशनली कमजोर हो जाते हैं। प्रेम का असली अर्थ देना है, न कि लगातार अपेक्षाएं करना।

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हर रिश्ते की नींव है स्वयं से जुड़ना

किसी भी रिश्ते को सफल बनाने के लिए मन की स्थिरता और अपनी भावनाओं की समझ होना जरूरी है। जब आप स्वयं से संतुष्ट और स्थिर होते हैं, तब आप रिश्ते में कुछ 'मांगने' वाले नहीं, बल्कि 'देने' वाले बनते हैं। यही वह आंतरिक गुण है, जो किसी भी संबंध को अटूट बनाता है।

आदर्श संबंध की तलाश करने से पहले अपने अंदर एक मजबूत और शांत केन्द्र स्थापित करें। जब आपका खुद से प्रेम और समझ का रिश्ता गहरा होगा, तभी आप दुनिया के साथ एक सच्चा और पूर्ण संबंध बना पाएंगे।

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