
रिश्ते सिर्फ नाम या सामाजिक बंधन नहीं होते, बल्कि ये हमारे भीतर बहने वाली भावनाओं का दर्पण होते हैं। अक्सर हम प्रेम और घृणा को एक-दूसरे का दुश्मन मानते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस व्यक्ति से हमारा कोई नाता नहीं, हम उससे नफरत भी नहीं कर पाते?
27 जनवरी 2026 के 'आज का सुविचार' में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर जी हमें रिश्तों के अनकहे रहस्य से रूबरू करा रहे हैं। वे बताते हैं कि संसार का हर रिश्ता चाहे वह अटूट विश्वास हो या कड़वाहट भरी नफरत प्रेम की ही अभिव्यक्ति है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि कैसे नवजात शिशु की तरह निस्वार्थ भाव से जुड़ना ही जीवन की सबसे शुद्ध अवस्था है और कैसे ज्ञान के माध्यम से हम अपने सीमित प्रेम को सार्वभौमिक बना सकते हैं।

'हर संबंध प्रेम की अभिव्यक्ति है।'
-गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर
सामान्यतः प्रेम को हम सीमित अर्थों में समझते हैं। जब हम प्रेम की बात करते है, तब दांपत्य, परिवार या मित्रता तक ही इसे सीमित कर देते है। किंतु वास्तव में प्रेम इससे कहीं व्यापक है। प्रेम वह मूल ऊर्जा है, जिससे हर संबंध जन्म लेता है और जिसके कारण संबंध जीवंत रहता है।
जब मनुष्य इस संसार में आता है, तब वह प्रश्नों और तर्कों के साथ नहीं आता। एक नवजात शिशु किसी से यह नहीं पूछता कि आप कौन हैं, क्या करते हैं या कहां से आए हैं। वह सीधे जुड़ता है। यह जुड़ाव हृदय के स्तर पर होता है। हृदय जब 'हां' कहता है, वही विश्वास कहलाता है। यही विश्वास संबंध की पहली नींव है। शिशु का मां पर सहज विश्वास, बिना किसी शंका के प्रेम की शुद्धतम अभिव्यक्ति है।
आरंभिक अवस्था में बच्चा मां, पिता, नर्स, आसपास के लोग, हर किसी से जुड़ाव महसूस करता है। इस समय इसका प्रेम सार्वभौमिक होता है। वह सिर्फ प्रेम है। किंतु जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, यह जुड़ाव सीमित होने लगता है।
यह भी पढ़ें- Success Quotes In Hindi: सफलता की बधाई इन शानदार और बेहतरीन मैसेज के माध्यम से आप भी दीजिए
हमारे सारे संबंध और हमारी सभी भावनाएं प्रेम की ही अभिव्यक्ति है। यहां तक कि घृणा भी प्रेम की ही विकृत अभिव्यक्ति है। हम अजनबियों से घृणा नहीं करते; हम उन्हीं से घृणा करते हैं, जिनसे हमारा गहरा संबंध होता है या जो हमें नुकसान पहुंचाते हैं।
संबंध बुद्धि से नहीं, अनुभूति से बनते है यही कारण है कि सच्चे संबंध समझ से नहीं, संवेदना से गहरे होते हैं।
ज्ञान और विवेक हमें पुनः उसी मूल अवस्था की ओर ले जाते हैं, जहां हमारा प्रेम सीमित नहीं रहता। योग और आत्मबोध मनुष्य को उसी असीम प्रेम की अवस्था में पहुंचा देते है, जो एक शिशु की होती है। प्रेम से भरा ऐसा ह्रदय जो सभी से जुड़ सकता है। यही अवस्था सार्वभौमिक प्रेम है।
यह भी पढ़ें- Motivational & Inspirational Quotes 2024: जब टूट जाए उम्मीद तो इन मोटिवेशनल कोट्स से अपनों को करें प्रेरित
हर रिश्ता, चाहे वह मित्रता हो, पारिवारिक हो, सामाजिक हो या विरोध का ही क्यों न हो, मूल रूप से प्रेम की ही अभिव्यक्ति है।
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
यह विडियो भी देखें
Herzindagi video
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।