
आंटी ने थोड़ी देर सोचने के बाद समायरा से कहा 'बेटा मुझे ज्यादा कुछ तो नहीं पता है, लेकिन आज से करीब दो साल पहले यहां एक शादीशुदा जोड़ा आया था। लड़की बहुत सुंदर थी और लड़का भी काफी सभ्य था। कुछ दिन तो सब ठीक ही चल रहा था, फिर पता नहीं क्या हुआ एक दिन रात को 2 बजे के आस-पास लड़की ने बालकनी से कूदकर जान दे दी। कुछ दिनों बाद वो फ्लैट छोड़कर चला गया और तबसे वो खाली ही था।
समायरा सोच में पड़ गई और वापस घर चली गई, 'आखिर ऐसा क्या हुआ होगा कि लड़की ने जान दे दी, आजकल किसी को भी अपनी जान की कीमत ही नहीं है। कैसे कोई इतनी जल्दी खुद की ही जान ले सकता है।'

समायरा ने स्टोर रूम में रखी डायरी उठाई और पढ़ने लगी 'मैं बहुत खुश हूं, मेरी शादी को एक महीने होने वाले हैं करण मुझे बहुत प्यार करते हैं सब कुछ वैसा ही चल रहा है जो मैं सोचा करती थी। '
समायरा ने डायरी के पन्ने पलटने शुरू किए
करण अब मुझसे दूर होने लगा है, हमारा प्यार धीरे-धीरे कम हो रहा है
शायद इस घर में कुछ है… जो हमें अलग कर रहा है।
रात 2:13 पर कोई दरवाज़ा खटखटाता है…
और कहता है-'अब तुम्हारी बारी है…'
समायरा के हाथ कांपने लगे। कुछ दिनों से अभय का व्यवहार भी बदल सा रहा था, शायद वर्क लोड की वजह से या फिर कुछ और ??

समायरा को लग रहा था कि अभय पहले से ज्यादा चिड़चिड़ा हो गया था, बात-बात पर गुस्सा करता था। समायरा को बार-बार बोलता था कि 'तुम्हें हर चीज में भूत ही दिखाई देते है। उसने एक दिन गुस्से में समायरा को तेजी से डांटा वो चुप रह गई। उसे लगने लगा था कि जैसे कोई अभय को उससे दूर कर रही हो।
समायरा सोच रही थी कि कहीं सच में इस घर में तो कुछ ऐसा नहीं है जो हमें दूर करना चाहता है। आखिर उस डायरी में ऐसा क्यों लिखा था।
रात को फिर 2:13 पर दरवाजे पर दस्तक हुई।
इस बार अभय उठा… और बिना कुछ कहे उसने दरवाजा खोल दिया।
बाहर कोई नहीं था। वापस मुड़ते समय उसकी आंखें कुछ पल के लिए सफेद हो गईं।
एक रात समायरा ने देखा अभय बालकनी में खड़ा है… रेलिंग के बहुत पास।
'अभय!' वो बहुत तेजी से चिल्लाई। अभय ने मुड़कर देखा-उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थी।
'समायरा मुझे जाने दो...मुझे कोई बुला रहा है' उसने धीमे से कहा।
अभय को देखकर ऐसा लग रहा था कि शायद वो अपने होश में नहीं है। समायरा ने चिल्लाया 'अभय कौन बुला रहा है, बालकनी से दूर हटो प्लीज। '

'वही… जो यहां पहले रहती थी। वो अकेली है वो मुझे बुला रही है। अभय ऐसा बोलते हुए रेलिंग पर चढ़ने लगा। समायरा ने दौड़कर उसे पकड़ लिया, दोनों फर्श पर गिर पड़े।
अभय बेहोश हो गया। समायरा ने पानी के छींटे अभय की आंखों में डाले और उसकी बेहोशी दूर हुई। समायरा और अभय सोने चले गए।
अगले दिन समायरा सोसाइटी के सचिव के पास गई और उससे 13वें माले का सच पूछा। सचिव ने बताया कि जो कपल यहां पहले रहते थे, उनमें से लड़की ने एक दिन बालकनी से कूदकर जान दे दी थी। कोई इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं था, क्योंकि वो लड़की बहुत जिंदादिल थी और ऐसा कदम उठा ही नहीं सकती थी।
ऐसा माना जा रहा था कि उसने आत्महत्या नहीं की थी बल्कि किसी ने उसको जानबूझकर धक्का दिया था। पुलिस ने काफी छनबीन की, लेकिन कोई सबूत नहीं मिले।
समायरा ने पूछा ' ऐसा कौन कर सकता है पति-पत्नी में तो बहुत प्यार था और घर पर कोई तीसरा रहता भी नहीं था।
उसे उसके पति करण ने ही बालकनी से धक्का दिया था, लेकिन दूर तक पहुंच होने की वजह से उसके ऊपर किसी का शक भी नहीं गया।
तभी समायरा को अचानक डायरी की लाइन याद आई
‘इस घर में कुछ है… जो हमें अलग कर रहा है।’
क्या सच में घर में कुछ था या फिर करण ने जानबूझकर उसे मार दिया।
उस रात समायरा ने तय किया कि वो सच की तह तक जाएगी।
उस रात 2:13 AM फिर से समायरा की आंख खुली दरवाजे पर दस्तक हुई।
समायरा ने खुद दरवाजा खोला। बाहर वही लाल साड़ी वाली औरत खड़ी थी।
'तुम क्यों आई हो यहां?'उसने पूछा।
समायरा ने कांपते हुए पूछा- “तुम्हें क्या चाहिए?”
लाल साड़ी वाली वो औरत परेशान लग रही थी। आंखों से आंसू बह रहे थे

'मैं मरना नहीं चाहती थी, मेरे बहुत से सपने थे, मैं जीना चाहती थी, लेकिन मुझे मार दिया गया ' मुझे न्याय दिला दो मुझे करण ने मारा था।
शादी के कुछ दिनों बाद ही मुझे पता चला कि करण का कहीं और अफेयर था और उसने फैमिली प्रेशर में शादी की थी।
समायरा समझ गई कि शायद ये वही औरत है जो यहां पहले रहती थी।
समायरा ने उससे वादा किया कि वो कोशिश करेगी कि सच सामने लाए। उसने करण के बारे में सारी जानकारी इकट्ठी की।
पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
पुराने सबूत खंगाले गए-
सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, पड़ोसियों के बयान। आखिरकार सच सामने आया
करण ने गुस्से में रिया को धक्का दिया था, वो उससे तलाक लेना चाहता था क्योंकि वो पहले से ही किसी और को प्यार करता था।

करण के खिलाफ सभी सबूत मिले और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
समायरा खुश थी और उस रात फिर 2:13 बजे दरवाजे पर दस्तक हुई।
उसने ने दरवाज़ा खोला।
इस बार वो लड़की रिया मुस्कुरा रही थी। शायद समायरा को थैंक यू बोलना चाहती थी, धीरे-धीरे उसकी परछाईं हवा में घुल गई। घर में अजीब सी शांति छा गई।
कुछ महीनों बाद सब सामान्य हो गया। अभय भी पहले जैसा हो गया था। एक दिन, जब सिया लिफ्ट में ऊपर जा रही थी, लिफ्ट अचानक 13वीं मंजिल पर खुली और समायरा को लगा कि उसके कान में कोई आवाज आई। मानो कोई उसको थैंक्यू बोल रहा था...आवाज उसी रिया की थी।
समायरा खुश थी और अब वो 13वीं मंज़िल डरावनी भी नहीं थी।
मानो रिया की आत्मा को मुक्ति मिल गई थी और 13वीं मंजिल हमेशा के लिए किसी भी तरह की अनहोनी से बाहर आ चकी थी।
अभय और समायरा को अब उस घर में 5 साल हो गए हैं, उनका एक बेटा आरव भी है। पूरा परिवार ख़ुशी से रहता है और 13वीं मंजिल का वो फ्लैट जो अभय ने किराए पर लिया था वो उसने खरीद लिया है।

फ्लैट की कांच की खिड़की से जुहू बीच नजर आता है और घर में बहुत अच्छा माहौल बना रहता है...आखिर एक आत्मा को मुक्ति मिल गई।
समायरा उस दिन अभय से बात करते हुए बोलती है, पता नहीं लोग 13 नंबर को शुभ नहीं मानते हैं...ये घर हमारे लिए कितना लकी है, यहीं हम शादी करके आए, यहीं आरव हुआ, तुम्हारा प्रमोशन हुआ और मैंने खुद का बुटीक शुरू कर लिया...
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यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।
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