
साहित्य की दुनिया में लंबे समय तक पुरुषों का ही बोलबाला रहा, लेकिन कुछ निडर महिला लेखिकाओं ने अपनी कलम से इस सोच को बदल कर रख दिया। इन महिलाओं ने समाज की उन पुरानी और गलत परंपराओं पर चोट की, जिन्हें कोई छूना भी नहीं चाहता था। उन्होंने उन विषयों पर खुलकर लिखा, जिन पर बात करना भी उस दौर में गलत माना जाता था। उनकी किताबों की बेबाकी और सच्चाई ने कभी धर्म के जानकारों को हैरान किया, तो कभी समाज के पुराने ढांचे को हिला दिया। अपनी बात कहने के लिए इन लेखिकाओं ने न केवल कड़वी बातें सुनीं, बल्कि कई बार अपनी जान भी खतरे में डाली। आइए जानते हैं ऐसी ही 5 जांबाज महिला लेखिकाओं के बारे में, जिनकी किताबों ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी थी।

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन की चर्चित किताब लज्जा की याद आती है। 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों को उन्होंने इस उपन्यास में जिस बेबाकी से पिरोया, जिसके बाद कट्टरपंथी भड़क उठे। आखिर में ऐसा हुआ कि बांग्लादेश में इस किताब पर बैन लगा दिया गया और उनके खिलाफ फतवा जारी हुआ। इसके कारण उन्हें अपना देश छोड़ना पड़ा था।
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उर्दू साहित्य की मल्लिका कही जाने वाली इस्मत चुगताई ने साल 1942 में एक कहानी लिखी थी जिसका नाम था लिहाफ। उस दौर में समलैंगिकता जैसे विषय पर लिखना किसी बड़े धमाके से कम नहीं था। इस कहानी के प्रकाशित होते ही उन पर अश्लीलता फैलाने का आरोप लगा और उन पर मुकदमा भी चला। हालांकि, इस्मत पीछे नहीं हटीं और उन्होंने कोर्ट में भी अपनी बात को मजबूती से रखा। उनकी यह कहानी आज भी साहस का प्रतीक मानी जाती है।
भारत की मशहूर लेखिका अरुंधति रॉय को उनके पहले ही उपन्यास 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' के लिए बुकर प्राइज मिला। लेकिन इस किताब में जातिवाद, धर्म और अंतरजातीय संबंधों के चित्रण ने केरल के समाज में भारी हंगामा खड़ा कर दिया। उन पर अश्लीलता और सार्वजनिक मर्यादा भंग करने के आरोप लगे। अरुंधति की लेखनी ने न केवल साहित्यिक गलियारों में चर्चा बटोरी, बल्कि राजनीतिक रूप से भी कई विवादों को जन्म दिया।

अमृता प्रीतम की किताब रसीदी टिकट और उनकी कविताओं ने समाज के दोहरे चरित्र को उजागर किया। विभाजन के दर्द पर लिखी उनकी रचनाओं ने दोनों देशों में हलचल पैदा की। उनके प्रेम संबंधों की ईमानदारी और अपनी निजी जिंदगी को किताब में उतारने की हिम्मत ने उन्हें विवादों और चर्चाओं के केंद्र में रखा। लोग उनके खुले विचारों को पचा नहीं पाए और खूब आलोचना हुई।
मलयालम और अंग्रेजी की जानी-मानी लेखिका कमला दास ने अपनी आत्मकथा माय स्टोरी (Ente Katha) से सनसनी फैला दी थी। उन्होंने अपनी निजी जिंदगी, इच्छाओं और वैवाहिक जीवन के कड़वे अनुभवों के बारे में इतना खुलकर लिखा कि तत्कालीन समाज स्तब्ध रह गया। उनकी बेबाक लेखनी को अश्लीलता का नाम दिया गया, लेकिन उन्होंने कभी अपनी कलम की धार कम नहीं होने दी।
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