
उम्र को अक्सर सीमाओं से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कर्नाटक के उडुपी की रहने वाली गुलशन काजी ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। 47 साल की उम्र में 215 किलो डेडलिफ्ट उठाकर उन्होंने न सिर्फ एक नया रिकॉर्ड बनाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जुनून, अनुशासन और आत्मविश्वास के आगे उम्र सिर्फ एक नंबर है।
एक साधारण जिंदगी से असाधारण उपलब्धि तक का उनका यह सफर ऐसी महिला के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को उम्र या हालात के कारण टाल देती है। जी हां, आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बता रहे हैं जो महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं।
12 अप्रैल 1978 को जन्मीं गुलशन काजी आज इंडियन पावरलिफ्टिंग की दुनिया में एक बड़ा नाम हैं। सेंट सेसिली स्कूल से शुरुआती पढ़ाई और पूर्ण प्रज्ञा कॉलेज से हाई शिक्षा ने उनके जीवन में अनुशासन, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मजबूत नींव रखी, जिसने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया।

गुलशन काजी ने साल 2016 में फिटनेस की शुरुआत सिर्फ अपनी सेहत सुधारने के उद्देश्य से की थी। शुरुआत में उनके पास न कोई प्रोफेशनल कोच था और न ही कोई स्पेशल ट्रेनिंग प्लान। लेकिन अपनी लगन और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने लगभग 40 किलो वजन कम कर लिया। धीरे-धीरे यही फिटनेस जर्नी उन्हें पावरलिफ्टिंग के मंच तक ले आई और आज वह नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट, टीम इंडिया की पावरलिफ्टर और इंटरनेशनल लेवल की स्ट्रेंथ एथलीट बन चुकी हैं।
गुलशन काजी ने 215 किलो डेडलिफ्ट उठाकर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि किसी भी भारतीय महिला द्वारा सभी आयु वर्ग और वेट कैटेगरी में उठाया गया सबसे ज्यादा वजन है। इस रिकॉर्ड ने इंडियन पावरलिफ्टिंग में एक नया मानक स्थापित किया है।

गुलशन काजी ने जापान, तुर्की और साउथ अफ्रीका में आयोजित इंटरनेशनल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और शानदार प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया।
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इसके अलावा उन्होंने 2022 और 2023 में लेबनान में आयोजित इंटरनेशनल कंपटीशन में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का भी प्रतिनिधित्व किया, जहां उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी ताकत और प्रतिभा का लोहा मनवाया।

गुलशन काजी की कहानी सिर्फ खेल की उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने एक पुरुष-प्रधान खेल में देर से शुरुआत करके भी साबित किया कि उम्र, परिस्थिति और पृष्ठभूमि कभी भी सफलता की बाधा नहीं बनती।
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परिवार, प्रोफेशनल जिम्मेदारियों और मुश्किल ट्रेनिंग के बीच बैलेंस बनाते हुए वह आज भी पूरे जोश के साथ ट्रेनिंग और कंपटीशन में हिस्सा ले रही हैं। गुलशन काजी की स्टोरी हमें यह सिखाती है कि असली सीमाएं हमारे दिमाग में होती हैं। अगर इरादा मजबूत हो तो हर सपना सच हो सकता है।
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