
दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 से नोएडा सेक्टर-16 का सफर मैं बीते 5 साल से रोजाना कर रही हूं। घर से ऑफिस और ऑफिस से घर पहुंचने के लिए मुझे मात्र 10 से 15 मिनट ही लगते हैं। उस दिन भी मैं ऑफिस ही जा रही थी। मेट्रो में बहुत ज्यादा भीड़ थी, मैं पहले ही 2 मेट्रो छोड़ चुकी थी। ऑफिस के लिए लेट हो रही थी, इसलिए तीसरी मेट्रो में जैसे-तैसे खुद को अंदर ढकेला और गेट की तरफ मुहं करके खड़ी हो गई।
लगभग 3 स्टेशन बाद ही नोएडा सेक्टर-16 का मेट्रो स्टेशन आ जाता है, मगर दरवाजे दूसरी तरफ खुलते हैं, इसलिए मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि कैसे इतनी भीड़ में पीछे मुड़कर दूसरी तरफ के गेट तक जाऊं। इतनी ही देर में जो मेरे साथ हुआ, उससे मैं अंदर तक दहल गई।

मेट्रो में वीक डेज में लगभग हर सुबह बहुत भीड़ होती है, मगर उस दिन मंडे था, इसलिए कुछ ज्यादा ही भीड़ थी। लोग मेट्रो कंपार्टमेंट्स के अंदर इस कदर ठुसे हुए थे, जैसे पिंजड़े में भेड़-बकरियों को बंद कर दिया जाता है। ऑफिस जाना था, तो मैं भी मेट्रो के अंदर जैसे-तैसे घुस गई और दरवाजे के पास कोने में खड़ी हो गई। मेरे पीछे या बगल में कौन खड़ा यह तक मैंने नहीं देखा। सोच ही रही थी कि 3 स्टेशन बाद मुझे पीछे वाले दरवाजे से उतरना है, कैसे वहां तक पहुंच पाउंगी। सोच ही रही थी कि मुझे अपने हिप्स पर कुछ कड़ा-कड़ा सा महसूस हुआ। मुझे लगा किसी का बैग शायद लग रहा होगा, मगर साथ ही साथ मैं एक मूवमेंट भी महसूस कर रही थी, जो मुझे थोड़ा चिंताजनक लगा। जब मुझे बहुत ज्यादा असहज लगने लगा, तब मैंने अपने हाथ पीछे और उस कड़ी चीज को हटाने का प्रयास किया।
हाथ में वह कड़ी चीज टच होते ही मैं दंग रह गई। भीड़ का फायदा उठाते हुए एक आदमी अपना प्राइवेट पार्ट मेरे हिप्स पर लगा रहा था। मैं उस वक्त कुछ नहीं सोच-समझ पा रही थी। इतनी हिम्मत भी नहीं हो पा रही थी कि मैं पीछे मुड़कर उस आदमी को देखूं।
वो आदमी जब यह समझ गया कि मैं उसकी इस गंदी हरकत को महसूस कर पा रही हूं, तो पीछे हटने की जगह वो मेरे कान में अश्लील गाना गाने लगा। नोएडा सेक्टर- 16 मेट्रो स्टेशन पास ही आ रहा था। मैंने सोच लिया था, उतरने से पहले उसके मुंह पर जोर से तमाचा मारुंगी, मगर मेरे स्टेशन से पहले ही वह उतर गया और मैं कुछ नहीं कर पाई। इस बात का मलाल मुझे आजतक है कि मैंने उसे मुंहतोड़ जवाब नहीं दिया। मगर मैं करती भी क्या, कैसे प्रूव करती कि वह मेरे साथ क्या कर रहा है। मेरे मन में उस वक्त बहुत सारे ख्याल कौंधने लगे थे। इस शर्मनाक घटना को मैं आज तक नहीं भूल पाई।

मेट्रो या किसी भी पब्लिक कनवेंस में Sexual Assault जैसी घटनाएं केवल एक महिला की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती हैं। भीड़, डर और शर्म की वजह से अक्सर महिलाएं चुप रह जाती हैं, लेकिन यही चुप्पी अपराधियों का हौसला बढ़ाती है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सतर्क और साहसी होना बेहद जरूरी है। तुरंत मदद के लिए मेट्रो स्टाफ, मेट्रो पुलिस और हेल्पलाइन नंबरों का इस्तेमाल करें और अपनी शिकायत दर्ज कराएं। याद रखें, दोषी आप नहीं बल्कि अपराधी है। आपकी आवाज न सिर्फ आपको न्याय दिला सकती है, बल्कि भविष्य में किसी और महिला को इस दर्दनाक अनुभव से बचा सकती है।
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