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न टूटी हिम्मत, न थमे कदम! एसिड अटैक सर्वाइवर प्रोफेसर मंगला कपूर को पद्म श्री सम्मान, जानें इनकी कहानी

प्रोफेसर मंगला कपूर, जो एक एसिड अटैक सर्वाइवर हैं, को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर मंगला ने 37 ऑपरेशन और एक गंभीर दुर्घटना के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने गोल्ड मेडल और पीएचडी हासिल की, संगीत से लोगों का दिल जीता और बीएचयू में लेक्चरर बनीं। 
Editorial
Updated:- 2026-01-28, 16:31 IST

उत्तर प्रदेश राज्य में इस बार कई नायकों को पुरस्कार मिला, जिसमें काशी हिंदू विश्वनाथ की प्रोफेसर मंगला कपूर का नाम भी शामिल था। इन्हें पहले भी कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया है। वहीं अब इन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिल गया है। ऐसे में लोगों के मन में इनकी प्रेरक कहानी को जानने की इच्छा हुई है। यदि आप भी इनके बारे में सब कुछ जानना चाहती हैं तो आज का हमारा लेख आपके लिए है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि कौन हैं मंगला कपूर, जिसे पद्मश्री पुरस्कार मिला है। पढ़ते हैं आगे...

कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं मंगला

मंगला कपूर एक कारोबारी परिवार से हैं। इनके साथ एक भयानक हादसा हुआ, जिसमें इनके चेहरे पर एसिड फेंक दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी पहचान अपना चेहरा ही खो दिया। हालत इतनी खराब हो गई कि एक के बाद एक अलग शहरों में इन्होंने 37 ऑपरेशन करवाएं। 

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वहीं, साल 2007 में इनका एक एक्सीडेंट हुआ, जिसमें इनकी जांघ की दोनों हड्डियां भी चली गईं। लोगों को ऐसा लगने लगा कि अब इनका सफर खत्म होने वाला है, लेकिन अपने मजबूत मनोबल और जीवन से लड़ने की प्रेरणा, इन्हें फिर वापस उसी ट्रैक पर ले आई।

साल 2007 थी बेहद भारी 

सातवीं कक्षा में पढ़ रही मंगला को यह समझने में दिक्कत हुई कि उन्हें क्या हुआ। वह हर वक्त दर्द से करहाती थीं वहीं त्वचा झुलसी हुई रहती थी। वह हर वक्त तड़पती रहती थीं। ऐसे में वे न केवल नकारात्मक मानसिक स्थिति का शिकार हो गईं बल्कि शारीरिक और भावनात्मक रूप से भी कमजोर होने लगीं। 

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ऐसे समय में उनके पिता ही उनका सहारा बने। हालांकि, उनके शिष्य ने परिवार को भी फाइनेंशली रूप से कमजोर बना दिया। बता दें कि स्कूल में बच्चे उनसे काफी डरा करते थे और कुछ तो उनका मजाक भी बनाते थे। उन्हें कई तरह-तरह के नाम से बुलाया जाता था।

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आत्महत्या करने का आया ख्याल

इससे उन्हें बहुत दुख पहुंचता था। उनके मन में कई बार आत्महत्या करने की भी इच्छा जागरुक हुई। मंगला ने बी. म्यूज, एम म्यूज में गोल्ड मेडल और पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर ली। साथ ही उन्होंने संगीत के कार्यक्रम भी शुरू करें। उनकी मीठी आवाज सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ जाती थी। ऐसे में ये कलाकार बन गईं। संगीत से इन्हें जीने का सहारा मिला। पीएचडी करने के बाद जब उन्होंने जॉब के लिए अप्लाई किया तो उन्हें एकदम स्वीकार नहीं गया। कई लोगों का मजाक बनाया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आखिर में बीएचयू के महिला महाविद्यालय में लेक्चरर की पोस्ट प्राप्त कर ली। बता दें कि मंगला कपूर को काशी की लता मंगेशकर का सम्मान भी मिला।

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