
पीरियड्स के दौरान दर्द होना एक आम समस्या है, जिसे मेडिकल भाषा में डिसमेनोरिया कहते हैं। ज्यादातर महिलाओं और लड़कियों को पीरियड्स के पहले या शुरुआती दिनों में पेट के निचले हिस्से, कमर या जांघों में दर्द महसूस होता है। यह दर्द शरीर में बनने वाले हार्मोन प्रोस्टाग्लैंडिन की वजह से होता है, जो यूट्रस को सिकुड़ने में मदद करता है ताकि पीरियड्स के दौरान ब्लड बाहर निकल सके।
हल्का से मीडियम पेन, जो 1-2 दिन में अपने आप या घरेलू उपायों से ठीक हो जाए, आमतौर पर नॉर्मल माना जाता है। इस तरह का दर्द हर महीने लगभग एक जैसा रहता है और इससे रोजमर्रा के कामों पर कोई असर नहीं होता। कई बार दर्द इतना ज्यादा होता है कि बर्दाशत ही नहीं होता और अगर बार-बार ऐसा होता है तो क्या करना चाहिए?
पीरियड्स में होने वाला दर्द कब नॉर्मल है और कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी? अगर आपके मन में भी ऐसा ही कोई सवाल है तो पीएसआरआई हॉस्पिटल दिल्ली, कंसल्टेंट गाइनेकोलॉजी, डॉ. अमोदिता आहूजा से जानें सही जवाब।
नॉर्मल पीरियड पेन में हल्का खिंचाव, ऐंठन जैसा दर्द, पीठ या पैरों में भारीपन शामिल हो सकता है। इस तरह का दर्द आमतौर पर हर महीने लगभग एक जैसा रहता है और इससे रोजमर्रा के काम पूरी तरह प्रभावित नहीं होते। गरम पानी की थैली, हल्की एक्सरसाइज, पर्याप्त आराम या सामान्य पेनकिलर लेने से राहत मिल जाती है। अगर दर्द के बावजूद महिला अपने काम कर पा रही है और कोई अन्य गंभीर लक्षण नहीं हैं, तो इसे सामान्य माना जा सकता है।

कुछ स्थितियों में पीरियड्स का दर्द नॉर्मल नहीं होता और इसे नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। अगर दर्द इतना ज्यादा हो कि स्कूल, ऑफिस जाना या रोज के काम करना मुश्किल हो जाए, तो यह चिंता का संकेत है।
लगातार कई महीनों से दर्द बढ़ता जा रहा हो, पेनकिलर लेने के बाद भी राहत न मिले या हर महीने दर्द असहनीय होता जा रहा हो, तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी हो जाता है।
पीरियड्स के दौरान असामान्य दर्द के साथ अगर बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो, बड़े-बड़े क्लॉट्स निकलें, पीरियड्स 7 दिन से ज्यादा चलें या दो पीरियड्स के बीच भी दर्द बना रहे, तो यह किसी अंदरूनी समस्या की ओर इशारा कर सकता है। इसके अलावा अगर दर्द के साथ मतली, उल्टी, चक्कर आना, बुखार या दर्द सेक्शुअल रिलेशन के दौरान भी महसूस हो, तो तुरंत चेकअप करवाना चाहिए।
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कई बार एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉयड, पीसीओएस, पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज या यूट्रस में इंफेक्शन जैसी समस्याओं की वजह से पीरियड्स का दर्द बहुत ज्यादा हो सकता है। ऐसी स्थितियों में केवल घरेलू उपाय या दर्द की दवा काफी नहीं होती, बल्कि सही जांच और इलाज की जरूरत होती है। समय पर इलाज न मिलने पर भविष्य में फर्टिलिटी से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं।

इसलिए, यह समझना जरूरी है कि हर पीरियड पेन को नॉर्मल मानकर सहते रहना सही नहीं है। अगर दर्द आपकी लाइफ क्वालिटी को प्रभावित कर रहा है, हर महीने डर का कारण बन रहा है या शरीर कुछ अलग संकेत दे रहा है, तो गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें। सही समय पर डॉक्टर को दिखाने से न सिर्फ दर्द से राहत मिलती है, बल्कि किसी गंभीर समस्या को शुरुआती स्टेज में पकड़ना भी आसान हो जाता है।
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