
जब भी हम लिवर की बीमारियों या लिवर डैमेज की बात करते हैं, तब हमारे मन में सबसे पहला ख्याल अल्कोहल का ज्यादा सेवन या हेपेटाइटिस' जैसे गंभीर इंफेक्शन का आता है। यह एक आम धारणा है कि अगर कोई अल्कोहल नहीं लेता, तो उसका लिवर पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि एक ऐसा 'साइलेंट किलर' है, जो आपकी रसोई में बैठा है और आप इसे रोजमर्रा की डाइट में बड़े चाव से शामिल कर रही हैं?
जी हां, वह चीनी का ज्यादा सेवन है। हम अनजाने में अपनी दिनचर्या में इतनी ज्यादा चीनी का सेवन कर लेते हैं कि हमारा लिवर धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है और गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाता है।
आज के समय में हमारे पास कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड फ्रूट जूस, मीठे शरबत, बिस्कुट और प्रोसेस्ड फूड की भरमार है। इन सभी में एडेड शुगर और फ्रुक्टोज बहुत ज्यादा होते हैं। जब हम अपनी भूख या जरूरत से ज्यादा मीठा खाते हैं, तब इसका सीधा असर मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है। हमारा शरीर बाकी अंगों के माध्यम से अन्य पोषक तत्वों को पचा लेता है, लेकिन चीनी को प्रोसेस करने का पूरा जिम्मा अकेले लिवर पर होता है। ज्यादा चीनी लिवर को कैसे खराब कर सकती है? इसके बारे में हमें डॉक्टर फरमान अली (सर्जन और लॉन्गेविटी एक्सपर्ट) बता रहे हैं।

ज्यादा चीनी खाने से होने वाली सबसे आम समस्या मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज है, जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर भी कहते हैं। जब हम मीठे ड्रिंक्स या प्रोसेस्ड फूड से बहुत ज्यादा फ्रुक्टोज लेते हैं, तब लिवर इसे फैट यानी चर्बी में बदलकर अपनी कोशिकाओं में जमा करने लगता है।
दुनिया भर में करीब 30% वयस्क इस समस्या से जूझ रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि जो लोग अल्कोहल नहीं पीते और दिखने में फिट लगते हैं, वे भी शुगरी ड्रिंक्स के कारण इसके शिकार हो रहे हैं।
कुछ लोगों में फैटी लिवर की समस्या आगे बढ़कर NASH (नॉन-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस) बन जाती है। यह ज्यादा खतरनाक स्थिति है क्योंकि इसमें जमा चर्बी लिवर में सूजन पैदा कर देती है और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। यह बीमारी अक्सर बिना किसी लक्षण के चुपचाप पनपती है, जिससे लिवर की कार्यक्षमता कम होने लगती है।

जब लिवर में लंबे समय तक सूजन रहती है, तब वहां हेल्दी टिश्यू की जगह स्कार टिश्यू बनने लगते हैं। इसे फाइब्रोसिस कहते हैं। इसकी वजह से लिवर खून को साफ करने और शरीर को डिटॉक्स करने में असमर्थ हो जाता है। शुरुआती दौर में इसे ठीक किया जा सकता है, लेकिन मीठा खाना जारी रखने पर यह बिगड़ता चला जाता है।
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फाइब्रोसिस बढ़ते-बढ़ते सिरोसिस का रूप ले लेता है। इसमें लिवर का एक बड़ा हिस्सा जख्मों से भर जाता है, जिससे ब्लड फ्लो रुक जाता है। यह कंडीशन लिवर फेलियर, इंटरनल ब्लीडिंग या गंभीर इंफेक्शन का कारण बन सकती है। चीनी रातों-रात सिरोसिस नहीं करती, लेकिन सालों तक मीठे का ज्यादा सेवन इस जानलेवा कंडीशन की ओर ले जाता है।
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शोध बताते हैं कि जो लोग रोज शुगरी ड्रिंक्स पीते हैं, उनमें लिवर कैंसर और पुरानी लिवर बीमारियों से मौत का खतरा बहुत ज्यादा होता है। लिवर में जमा चर्बी और सूजन कैंसर पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर देते हैं।

ज्यादा चीनी लिवर को चर्बी जमने से लेकर कैंसर तक कई खतरनाक समस्याओं की ओर ले जाती है। अपने लिवर को सुरक्षित रखने का सबसे असरदार तरीका शुगरी ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना है। आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपका लिवर अनमोल है, इसे मीठे जहर से बचाएं।
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