Tue Feb 17, 2026 | Updated 03:23 AM IST
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how does excessive screen time affect your eyes

ऑफिस में लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में क्‍या होता है? डॉक्‍टर से जानें

ऑफिस में लंबे समय तक स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन होता है, जिससे आंखों में सूखापन, धुंधलापन और गर्दन-कंधे में जकड़न जैसी समस्याएं आती हैं। डॉ. पुरेंद्र भसीन 'ब्लिंक + ब्रेक माइक्रो-थेरेपी' और 'डिजिटल आई फिटनेस प्रोग्राम' अपनाने की सलाह देते हैं। इसमें हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लेकर 20 फीट दूर देखना, पलकें झपकाना और स्क्रीन सेटिंग्स को अनुकूलित करना शामिल है, जिससे आंखों को स्वस्थ रखा जा सके।
Editorial
Updated:- 2026-02-16, 18:44 IST

ऑफिस में काम करने वाले लोगों को अक्सर लंबे समय तक कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल स्क्रीन के सामने बैठना पड़ता है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर प्रेशर बढ़ता है, जिसे मेडिकल भाषा में डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है। इसमें आंखों को लगातार फोकस करना पड़ता है, जिससे आंखों की मसल्‍स थक जाती हैं और आंखों में अनकंफर्टेबल महसूस होने लगती है। ऑफिस में लंबे समय तक स्‍क्रीन देखने से आंखों पर क्‍या असर होता है? इसके बारे में रतन ज्योति नेत्रालय, ग्वालियर के फाउंडर एवं डायरेक्‍टर, डॉक्‍टर पुरेंद्र भसीन बता रहे हैं।

आंखों में ड्राईनेस

लंबे समय तक स्क्रीन देखने का सबसे आम असर आंखों में ड्राईनेस है। स्क्रीन पर काम करते समय पलकें झपकाने की गति नॉर्मल से काफी कम हो जाती है, जिससे आंखों की नेचुरल नमी बनाए रखने वाले आंसू जल्दी सूखने लगते हैं। इसके कारण आंखों में जलन, चुभन, रेडनेस, भारीपन और कभी-कभी पानी आने की शिकायत हो सकती है। कुछ लोगों को बार-बार आंखें मलने की आदत भी पड़ जाती है, जो आंखों को और नुकसान पहुंचा सकती है।

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धुंधला दिखना

स्क्रीन पर देर तक काम करने से धुंधला दिखना और फोकस करने में परेशानी भी हो सकती है। लगातार नजदीक की स्क्रीन देखने से आंखों की फोकस करने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे कुछ समय के लिए दूर की चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं। यह समस्या समय के साथ सिरदर्द और आंखों के आसपास दर्द का कारण भी बन सकती है।

जकड़न की समस्‍या

लंबे समय तक स्क्रीन देखने से सिरदर्द, गर्दन और कंधों में जकड़न की समस्या भी देखी जाती है। गलत पोस्चर, स्क्रीन की गलत ऊंचाई और आंखों पर पड़ने वाला एक्‍स्‍ट्रा प्रेशर मिलकर इस तरह की परेशानियां पैदा करते हैं। कई बार आंखों की लगातार थकान मानसिक थकावट और काम में एकाग्रता की कमी की वजह भी बन जाती है।

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डिजिटल आई स्ट्रेन से बचाव के तरीके

  • अब डिजिटल आई स्ट्रेन से बचाव के लिए ''ब्लिंक + ब्रेक माइक्रो-थेरेपी'' को बेहद जरूरी मानते हैं। इसके तहत मरीजों और ऑफिस में काम करने वालों को कस्टमाइज़्ड आई-हैबिट प्रिस्क्रिप्शन दिया जाता है, जिसमें हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लेकर 20 फीट दूर देखने की सलाह दी जाती है।
  • स्क्रीन पर काम करते समय जानबूझकर पलकें झपकाने की ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि आंखों की नमी बनी रहे।
  • डॉक्टर दिन में दो बार 60 सेकंड की पैल्मिंग और वॉर्म कंप्रेस माइक्रो-थैरेपी की भी सलाह देते हैं। इससे आंसुओं की क्‍वालिटी बेहतर होती है और ड्राई आई सिंड्रोम का खतरा कम होता है। यह छोटी-सी आदत आंखों को रिलैक्स करने और थकान दूर करने में काफी मददगार मानी जाती है।
  • आंखों की सेहत के लिए ''डिजिटल आई फिटनेस और स्मार्ट स्क्रीन हाइजीन प्रोग्राम'' अपनाना भी जरूरी है। इसमें स्क्रीन की ब्राइटनेस, कॉन्ट्रास्ट और फॉन्ट साइज को आंखों के अनुसार सही तरीके से सेट करना, ब्लू-लाइट फिल्टर और नाइट मोड का वैज्ञानिक ढंग से इस्‍तेमाल करना शामिल है।
  • कई ऑफिस में 30 से 60 सेकंड के गाइडेड आई एक्सरसाइज के लिए आई फिटनेस कॉर्नर भी बनाए जा रहे हैं, जो आंखों की मसल्‍स को ट्रेन करने में मदद करते हैं और दवाओं पर निर्भरता कम करते हैं।

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डॉक्टरों का मानना है कि आज की डिजिटल लाइफ में आंखों की सेहत सिर्फ दवाओं से नहीं, बल्कि सही डिजिटल अनुशासन और रेगुलर आई फिटनेस से सुरक्षित रह सकती है। इन छोटी-छोटी आदतों को डेली रूटीन में शामिल करके आंखों को लंबे समय तक हेल्‍दी रखा जा सकता है।

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