
Republic Day 2026 Kavita: 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस न केवल एक तारीख है बल्कि यह दिन हर भारतीय के स्वाभिमान, गौरव और संघर्ष की गाथा को बताता है। इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था, तभी से हमें एक सशक्त लोकतंत्र की पहचान मिली। ऐसे में इस गौरवशाली अवसर पर न केवल देश में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं बल्कि इस दिन को बड़ी धूमधाम से भी मनाया भी जाता है। ऐसे में यदि आप स्कूल, कॉलेज के समारोह में अपने शहीदों के बलिदानों को याद करके कोई कविता पढ़ना चाहती हैं तो इस लेख में दी गई कविताएं आपके बेहद काम आ सकती हैं। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस वक्त के माध्यम से बताएंगे कि गणतंत्र दिवस पर आप कौन-सी कविता आप पढ़ सकती हैं। पढ़ते हैं आगे...
इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बंधाए,
कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए,
इन्हें पकड़ने में कितनों ने लाठी खाई, कोड़े ओड़े,
और इन्हें झटके देने में कितनों ने निज प्राण गंवाए!
किंतु शहीदों की आहों से शापित लोहा, कच्चा धागा।
एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।
जय बोलो उस धीर व्रती की जिसने सोता देश जगाया,
जिसने मिट्टी के पुतलों को वीरों का बाना पहनाया,
जिसने आज़ादी लेने की एक निराली राह निकाली,
और स्वयं उसपर चलने में जिसने अपना शीश चढ़ाया,
घृणा मिटाने को दुनिया से लिखा लहू से जिसने अपने,
“जो कि तुम्हारे हित विष घोले, तुम उसके हित अमृत घोलो।”
एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।
कठिन नहीं होता है बाहर की बाधा को दूर भगाना,
कठिन नहीं होता है बाहर के बंधन को काट हटाना,
ग़ैरों से कहना क्या मुश्किल अपने घर की राह सिधारें,
किंतु नहीं पहचाना जाता अपनों में बैठा बेगाना,
बाहर जब बेड़ी पड़ती है भीतर भी गाँठें लग जातीं,
बाहर के सब बंधन टूटे, भीतर के अब बंधन खोलो।
एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।
कटीं बेड़ियां औ’ हथकड़ियां, हर्ष मनाओ, मंगल गाओ,
किंतु यहां पर लक्ष्य नहीं है, आगे पथ पर पांव बढ़ाओ,
आजादी वह मूर्ति नहीं है जो बैठी रहती मंदिर में,
उसकी पूजा करनी है तो नक्षत्रों से होड़ लगाओ।
हल्का फूल नहीं आजादी, वह है भारी जिम्मेदारी,
उसे उठाने को कंधों के, भुजदंडों के, बल को तोलो।
एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।
हरिवंश राय बच्चन
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ये देश है वीर जवानों का
अलबेलों का मस्तानों का
इस देश का यारों क्या कहना
ये देश है दुनिया का गहना
यहां चौड़ी छाती वीरों की
यहां भोली शक्लें हीरों की
यहां गाते हैं रांझे मस्ती में
मस्ती में झूमें बस्ती में
पेड़ों में बहारें झूलों की
राहों में कतारें फूलों की
यहां हंसता है सावन बालों में
खिलती हैं कलियां गालों में
कहीं दंगल शोख जवानों के
कहीं कर्तब तीर कमानों के
यहां नित नित मेले सजते हैं
नित ढोल और ताशे बजते हैं
दिलबर के लिये दिलदार हैं हम
दुश्मन के लिये तलवार हैं हम
मैदां में अगर हम डट जाएं
मुश्किल है के पीछे हट जाएं
साहिर लुधियानवी
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देखो फिर से गणतंत्र दिवस आ गया,
जो आते ही हमारे दिलो-दिमाग पर छा गया।
यह है हमारे देश का राष्ट्रीय त्यौहार,
इसलिए तो सब करते हैं इससे प्यार।
इस अवसर का हमें रहता विशेष इंतजार,
क्योंकि इस दिन मिला हमें गणतंत्र का उपहार।
आओ लोगों तक गणतंत्र दिवस का संदेश पहुचाएं,
लोगों को गणतंत्र का महत्व समझाएं।
गणतंत्र द्वारा भारत में हुआ नया सवेरा,
इसके पहले तक था देश में तानाशाही का अंधेरा।
क्योंकि बिना गणतंत्र देश में आ जाती है तानाशाही,
नहीं मिलता कोई अधिकार वादे होते हैं हवा-हवाई।
तो आओ अब इसका और ना करें इंतजार,
साथ मिलकर मनाये गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार।।

दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
आंधी में भी जलती रही गांधी तेरी मशाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
धरती पे लड़ी तूने अजब ढब की लड़ाई
दागी न कही तोप न बंदूक चलाई
दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई
वाह रे फकीर खुब करामात दिखाई
चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
शतरंज बिछा कर यहां बैठा था जमाना
लगता था मुश्किल है फिरंगी को हराना
टक्कर थी बड़े जोर की दुश्मन भी था ताना
पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराण
मारा वो कास के दांव के उल्टी सभी की चाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े
मजदूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े
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