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Sleeper, AC या General? जानें ट्रेन का वो 'सेफेस्ट कोच' जहां हादसे का असर होता है सबसे कम

देश की जीवन रेखा मानी जाने वाली भारतीय रेल से रोजाना करोड़ों लोग ट्रेन से सफर करते हैं। आजकल लोग सिर्फ टिकट बुक करने तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि कोच की पोजिशन और सेफ्टी को लेकर भी जागरूक होने लगे हैं।
Editorial
Updated:- 2026-01-17, 10:09 IST

पिछले कई सालों में ट्रेन के ऐसे-ऐसे हादसों की खबरें सुनने को मिली हैं, जो दिल दहला देने वाली हैं। इन हादसों में कई लोगों ने अपनों को खोया है। ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि क्या ट्रेन में ऐसे कोच होते हैं, जो सेफ रहते हैं या जिनपर हादसों के समय असर कम पड़ता है। हालांकि, कई यात्री ट्रेन में बैठते समय इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उनका कोच इंजन के पास है या पीछे की तरफ या ट्रेन के बीच में। आज के इस आर्टिकल में हम आपको ट्रेन के उन कोच के बारे में जानकारी देंगे, जिस पर हादसों का असर कम होता है। हालांकि, कुछ कोच ऐसे होते हैं, जो सबसे पहले प्रभावित होते हैं।

इन कोच पर कम पड़ता है असर

ट्रेन के बीच वाले कोच यानी Middle Coaches पर असग सबसे ज्यादा कम होता है। इसका कारण यह है कि ट्रेन जिस दिशा में चल रही होती है, उसके शुरू में लगे कोच सबसे पहले प्रभावित होते हैं। ट्रेन के बीच में लगे कोच इंजन और गार्ड कोच से दूर होते हैं। अगर ट्रेन की टक्कर या पटरी से उतरने की संभावना जैसी स्थिति होती है, तो झटका सबसे कम इन्हीं कोच तक पहुंचता है। टिकट बुकिंग का फायदा इसमें ज्यादा होता है। 

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पैंट्री कार के आसपास के कोच

कई ट्रेनों में पैंट्री या तो ट्रेन के बीच में होती है या ट्रेन के आखिरी में, इसलिए इस कोच के आस-पास के कोच पर भी हादसे के असर आगे कोच के मुकाबले कम होता है। हालांकि, अगर हादसे में ट्रेन में आग की स्थिति पैदा होती है, पैंट्री आस-पास के कोच को भी हादसे में ले सकती है, जैसे आग लगने की स्थिति में पैंट्री के आस-पास के कोच ज्यादा खतरे में रहते हैं।

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AC कोच

आम तौर में ट्र्रेनों में एसी कोच बीच में लगे होते हैं, जबकि स्लीपर और जनरल कोच ट्रेन के शुरू में लगे होते हैं। ऐसे में अगर हादसों की बात की जाए, तो सबसे ज्यादा असर शुरू के डिब्बों पर पड़ता है, लेकिन बीच के डिब्बों में कम पड़ता है। इसके साथ ही, AC कोच का स्ट्रक्चर ज्यादा मजबूत होता है।

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सबसे ज्यादा असर इंजन और उसके पीछे वाले कोच पर होता है। तेज टक्कर में यही कोच सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त भी होते हैं। इसके अलावा ट्रेन के आगे या पीछे लगे SLR कोच भी ज्यादा खतरे में रहते हैं।

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