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Chocolate Town in India: किस शहर की वादियों में बसा है चॉकलेट टाउन? जहां की हवाओं में भी घुली है मिठास

ऊटी, नीलगिरी की पहाड़ियों में बसा, अब भारत के 'चॉकलेट टाउन' के रूप में फेमस है। स्थानीय परिवारों के दशकों के समर्पण और अनुकूल जलवायु ने इसे पहचान दिलाई। 
Editorial
Updated:- 2026-02-10, 15:52 IST

नीलगिरी की पहाड़ियों के बीच बसे ऊटी (Ooty) की पहचान सिर्फ धुंधली सुबहों तक सीमित नहीं है। आज यह शहर भारत के चॉकलेट टाउन के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। ऊटी की हेंडमेड चॉकलेट का इतिहास किसी प्रोमोशन का हिस्सा नहीं, बल्कि लोकल परिवारों के दशकों के समर्पण और वहां की प्रकृति की देन है। हालांकि, देश के कई प्रतिशत लोगों को पता ही नहीं है कि ऊटी को चॉकलेट टाउन क्यों कहते हैं। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि ऊटी देश का चॉटलेट टाउन कैसे बना? पढ़ते हैं आगे...

ऊटी भारत का चॉकलेट टाउन कैसे बना?

  • बता दें कि ऊटी में चॉकलेट बनाने की शुरुआत बहुत ही सादगी से हुई थी। कई साल पहले कुछ लोकल परिवारों ने छोटे स्तर पर अपने घरों में चॉकलेट बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे पर्यटकों ने इन हैंडमेड मिठाइयों के स्वाद को पसंद करना शुरू कर दिया।

chocolate town (3)

  • इसके लिए किसी विज्ञापन की भी जरूरत नहीं पडी, केवल वहां के लोगों के अनुभवों के माध्यम से ऊटी का नाम चॉकलेट से जुड़ता गया। आज के समय में ऊटी की चॉकलेट्स दक्षिण भारत के पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा गिफ्ट बन गई हैं।

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  • ऊटी के चॉकलेट टाउन बनने के पीछे वहां की प्रकृति का भी काफी योगदान है। बता दें कि नीलगिरी की ठंडी जलवायु चॉकलेट प्रोडक्शन के लिए साल भर अनुकूल रहती है। ऐसे में चॉकलेट के पिघलने या खराब होने का डर बहुत कम रहता है, जिससे बिना किसी रेफ्रिजरेशन के भी छोटे स्तर पर काम करना आसान होता है।

chocolate town

क्या है खासियत?

  • ऊटी की चॉकलेट्स की सबसे बड़ी खासियत उनका हैंडमेड होना है। खास बात ये है कि यहां के कारीगर पीढ़ियों से चली आ रही रेसिपी का उपयोग करते हैं। यही कारण है कि छोटी-छोटी रसोई आज प्रोडक्शन सेंटर्स में बदल चुकी हैं, जिनमें डार्क चॉकलेट, नट्स, फ्रूट्स, रम और ट्रफल्स जैसी कई वैरायटियां बनाई जाती हैं।
  • आज के समय में चॉकलेट को खरीदना ऊटी की ट्रैवलिंग का एक जरूरी हिस्सा बन गया है। ऐसे में यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि एक Sustainable Craft Economy का आधार भी है। आझ हम कह सकते हैं कि जो काम एक शौक के रूप में शुरू हुआ था, वह अब हजारों परिवारों की आजीविका का साधन बन चुका है।

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Images: Freepik/shutterstock

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