
जीवन और मृत्यु के चरण में कई ऐसे नियम बनाए गए हैं जिनका पालन करना बहुत जरूरी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जैसे ही किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है वो सांसारिक मोह माया से दूर हो जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि मृत्यु एक ऐसा क्षण है जब शरीर तो डाह संस्कार तक पृथ्वी पर रहता है लेकिन आत्मा तुरंत ही ब्रह्मलोक चली जाती है। ऐसे ही मृत्यु और उसके बाद की जाने वाली कुछ रस्मों में से यह भी हैं कि आखिर मृतक के वस्त्रों का क्या करना चाहिए? क्या मृत व्यक्ति की वस्तुएं किसी जीवित व्यक्ति को इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए? क्या उनमें कोई अदृश्य शक्ति हो सकती है? क्या ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है। इससे जुड़े न जाने कितने सवाल हमारे मन में आते हैं। यही नहीं मन में यह भी सवाल आता है कि आखिर मृतक के वस्त्रों का क्या करना चाहिए? गरुड़ पुराण में इससे जुड़ी कई बातें बताई गई हैं। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें कि मृत व्यक्ति के वस्त्रों का क्या करना चाहिए और इन वस्त्रों का इस्तेमाल शुभ क्यों नहीं माना जाता है।
ज्योतिष में मान्यता है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो केवल उसके शरीर का नाश नहीं होता है बल्कि मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार और कर्म संस्कार भी अपना स्वरुप बदल लेते हैं। ऐसे में ये सभी भावनाएं मरती नहीं हैं एक ऊर्जा के रूप में मजूद रहती हैं। शास्त्रों और गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के अंतिम समय की भावनाएं और अनुभव उस व्यक्ति की वस्तुओं में स्थिर हो जाते हैं जो मृतक अपनी मृत्यु से पहले इस्तेमाल करता था। इसी वजह से मृतक व्यक्ति की वस्तुएं उनकी आत्मिक ऊर्जा और अधूरी इच्छाओं का संचित रूप मानी जाती हैं और मृतक की मृत्यु के बाद उनका इस्तेमाल वर्जित माना जाता है।

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ऐसा माना जाता है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसका शरीर जला दिया जाता है, लेकिन आत्मा उनके सामान में मौजूद होती है। यही नहीं ऐसा भी माना जाता है कि आत्मा का मोह काफी दिनों तक अपनी वस्तुओं से नहीं छूटता है। ऐसे में यदि कोई मृतक की चीजों जैसे वस्त्र आदि का इस्तेमाल करता है तो मृतक की आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है और वो पृथ्वीलोक का मोह नहीं छोड़ पाता है। यही नहीं ऐसे व्यक्ति के घर में पितृ दोष भी लगता है जो मृतक के वस्त्रों या चीजों का इस्तेमाल करता है।
यदि घर में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसके वस्त्रों को दान कर देना चाहिए या फिर उसे नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि जब इन वस्त्रों का दान कर दिया जाता है तो इसके प्रभाव कम हो जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि घर के लोगों को मृतक के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए, लेकिन यदि आप इसे किसी जरूरतमंद को दे देती हैं तो उसके जीवन में इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। इसके अलावा यदि इन वस्त्रों को नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है तो मृतक का इनसे लगाव दूर हो जाता है और आत्मा को शांति मिल जाती है।

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यदि परिवार की भावना बहुत मजबूत है और मृतक के कपड़े रखना अनिवार्य है, तो पंडित जी बताते हैं कि आपको मृतक के वस्त्रों का स्वयं इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, लेकिन उनकी निशानी के रूप में आप यदि उन वस्त्रों को रखना चाहती हैं तो कपड़ों को अच्छी तरह से धोकर साफ करें और इसे गंगाजल से पवित्र करें। इसके बाद इन्हें किसी बैग में बंद करके रख दें और कोशिश करें कि आप बार-बार इन वस्त्रों को बाहर न निकालें।
ज्योतिष के अनुसार किसी भी हालत में मृतक के वस्त्र या अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं का प्रयोग करना वर्जित है। यह मृतक की आत्मा के लिए बाधा बनता है और जीवित व्यक्ति की ऊर्जा को प्रभावित करता है। शास्त्रों के अनुसार यह नियम सुरक्षा और ऊर्जा संतुलन के लिए जरूरी है।
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