
वैदिक परंपरा में सूर्य उपासना को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। सूर्य सिर्फ प्रकाश और जीवन का नहीं, बल्कि आत्मा, ऊर्जा, ओज, आत्मविश्वास, सफलता और पितृ कृपा का प्रतीक है। खरमास के दौरान सूर्य को अर्घ्य देना और भी ज्यादा शुभ और प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि यह समय साधना, पुण्य और आत्मशुद्धि के लिए होता है। पीतल के बर्तन से जल अर्पित करना सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने का आसान और शक्तिशाली उपाय है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य लाता है।
खरमास में पीतल के बर्तन में पानी भरकर सूर्य को अर्घ्य देने से क्या फायदे हो सकते हैं? इसके बारे में हमें एस्ट्रोलॉजर सिद्धार्थ एस. कुमार बता रहे हैं। वह NumroVani के संस्थापक एवं प्रसिद्ध वैदिक और नाड़ी ज्योतिषाचार्य हैं।
सूर्य धातु- पीतल का प्रतीकात्मक अर्थ- ज्योतिष में पीतल को सूर्य ग्रह से जुड़ी धातु माना जाता है। यह सौर ऊर्जा को धारण करने और प्रसारित करने की क्षमता रखती है। पीतल के लोटे से अर्घ्य देने पर सूर्य किरणें जल से परावर्तित होकर शरीर और आभामंडल में तेज ऊर्जा पहुंचाती हैं।
पॉजिटिव वाइब्रेशन और ग्रह का संतुलन- पीतल पॉजिटिव वाइब्रेशन देने वाली धातु है। यह मणिपुर चक्र को एक्टिव करती है, जो आत्मबल, आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति का केंद्र है। खरमास में इसकी ऊर्जा कई गुना ज्यादा असर डालती है।

जन्म कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो आत्मविश्वास, सम्मान, नेतृत्व क्षमता और पितृ कृपा प्रभावित होती है। खरमास में अर्घ्य देने से सूर्य की शुभ ऊर्जा तेजी से एक्टिव होती है और प्रतिष्ठा व आत्मबल बढ़ता है।
सूर्य हृदय, नेत्र, हड्डी, त्वचा और रक्त संचार का अधिपति है। नियमित अर्घ्य से विटामिन D अवशोषण बढ़ता है, रक्त प्रवाह सुधरता है और प्राणशक्ति मजबूत होती है। खरमास में यह साधना मन को हल्का, सकारात्मक और ऊर्जावान बनाती है।
सूर्य पितरों और कर्मों का प्रतिनिधि ग्रह है। पीतल के पात्र में जल अर्पित करने से पितृ दोष कम होता है और जीवन में रुके हुए कार्य आगे बढ़ने लगते हैं। खरमास में यह प्रभाव और भी तीव्र हो जाता है।
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सूर्य की कृपा से निर्णय क्षमता, नेतृत्व, सम्मान और स्थिरता मिलती है। यह उपाय सरकारी नौकरी, प्रशासन, सेना, राजनीति या उच्च पदों पर कार्यरत महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ है। खरमास में किया गया अर्घ्य करियर प्रगति के मार्ग खोलता है।

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प्रतिदिन सूर्योदय का समय सबसे शुभ होता है, लेकिन रविवार को इसका विशेष महत्व होता है। खरमास में सूर्य उपासना का फल कई गुना बढ़ जाता है।
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