Kharmas Surya Arghya benefits

Kharmas 2025: खरमास में पीतल के बर्तन में पानी भरकर सूर्य को अर्घ्य देने से क्‍या होता है?

खरमास में पीतल के बर्तन से सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह उपाय ऊर्जा, आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, पितृ कृपा और सौभाग्य बढ़ाने में विशेष रूप से प्रभावी होता है। आइए इसके ज्योतिषीय फायदों के बारे में एस्‍ट्रोलॉजर से विस्‍तार में जानते हैं।
Editorial
Updated:- 2025-12-11, 19:37 IST

वैदिक परंपरा में सूर्य उपासना को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। सूर्य सिर्फ प्रकाश और जीवन का नहीं, बल्कि आत्मा, ऊर्जा, ओज, आत्मविश्वास, सफलता और पितृ कृपा का प्रतीक है। खरमास के दौरान सूर्य को अर्घ्य देना और भी ज्‍यादा शुभ और प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि यह समय साधना, पुण्य और आत्मशुद्धि के लिए होता है। पीतल के बर्तन से जल अर्पित करना सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने का आसान और शक्तिशाली उपाय है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य लाता है।

खरमास में पीतल के बर्तन में पानी भरकर सूर्य को अर्घ्य देने से क्‍या फायदे हो सकते हैं? इसके बारे में हमें एस्ट्रोलॉजर सिद्धार्थ एस. कुमार बता रहे हैं। वह NumroVani के संस्थापक एवं प्रसिद्ध वैदिक और नाड़ी ज्योतिषाचार्य हैं।

पीतल के बर्तन का महत्व

सूर्य धातु- पीतल का प्रतीकात्मक अर्थ- ज्योतिष में पीतल को सूर्य ग्रह से जुड़ी धातु माना जाता है। यह सौर ऊर्जा को धारण करने और प्रसारित करने की क्षमता रखती है। पीतल के लोटे से अर्घ्य देने पर सूर्य किरणें जल से परावर्तित होकर शरीर और आभामंडल में तेज ऊर्जा पहुंचाती हैं।

पॉजिटिव वाइब्रेशन और ग्रह का संतुलन- पीतल पॉजिटिव वाइब्रेशन देने वाली धातु है। यह मणिपुर चक्र को एक्टिव करती है, जो आत्मबल, आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति का केंद्र है। खरमास में इसकी ऊर्जा कई गुना ज्‍यादा असर डालती है।

Brass vessel Surya Arghya

खरमास में सूर्य को अर्घ्य देने के ज्योतिषीय फायदे क्‍या हैं?

सूर्य ग्रह की बढ़ती है अनुकूलता

जन्म कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो आत्मविश्वास, सम्मान, नेतृत्व क्षमता और पितृ कृपा प्रभावित होती है। खरमास में अर्घ्य देने से सूर्य की शुभ ऊर्जा तेजी से एक्टिव होती है और प्रतिष्ठा व आत्मबल बढ़ता है।

स्वास्थ्य और जीवनशक्ति में बढ़ोतरी

सूर्य हृदय, नेत्र, हड्डी, त्वचा और रक्त संचार का अधिपति है। नियमित अर्घ्य से विटामिन D अवशोषण बढ़ता है, रक्त प्रवाह सुधरता है और प्राणशक्ति मजबूत होती है। खरमास में यह साधना मन को हल्का, सकारात्मक और ऊर्जावान बनाती है।

पितृ दोष और कर्म शुद्धि

सूर्य पितरों और कर्मों का प्रतिनिधि ग्रह है। पीतल के पात्र में जल अर्पित करने से पितृ दोष कम होता है और जीवन में रुके हुए कार्य आगे बढ़ने लगते हैं। खरमास में यह प्रभाव और भी तीव्र हो जाता है।

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करियर और सफलता में उन्नति

सूर्य की कृपा से निर्णय क्षमता, नेतृत्व, सम्मान और स्थिरता मिलती है। यह उपाय सरकारी नौकरी, प्रशासन, सेना, राजनीति या उच्च पदों पर कार्यरत महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ है। खरमास में किया गया अर्घ्य करियर प्रगति के मार्ग खोलता है।

Kharmas Surya puja remedies

अर्घ्य देने की सही विधि

  • सूर्योदय से पहले स्नान करें।
  • पीतल के लोटे में स्वच्छ जल भरें।
  • सूर्य की ओर मुख करके खड़े हो जाएं।
  • दोनों हाथों से लोटा उठाकर धीरे-धीरे सूर्य को जल अर्पित करें।
  • जल की धारा से होकर सूर्य की किरणें आपके हाथ और चेहरे पर पड़ने दें।
  • 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' या 'ॐ आदित्याय नमः' मंत्र का जाप करें।
  • अंत में कुछ क्षण सूर्य का ध्यान करें और आशीर्वाद मांगें।

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खरमास में अर्घ्य देने का सर्वोत्तम समय

प्रतिदिन सूर्योदय का समय सबसे शुभ होता है, लेकिन रविवार को इसका विशेष महत्व होता है। खरमास में सूर्य उपासना का फल कई गुना बढ़ जाता है।

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