
हिंदू धर्म में षटतिला एकादशी का व्रत मोक्ष और शुद्धि का पर्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना तिल के विभिन्न रूपों के साथ की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, किसी भी पूजा की पूर्णता उसकी सामग्री और विधि में निहित होती है। षटतिला एकादशी के दिन यदि पूजा की थाली में आवश्यक चीजें न हों तो पूजन अधूरा माना जाता है और भक्त को उसका संपूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। तिल, पंचामृत और तुलसी जैसे तत्वों का इस दिन विशेष महत्व है जो न केवल धार्मिक दृष्टि से अनिवार्य हैं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा को भी जागृत करते हैं। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइए जानते हैं षटतिला एकादशी की पूजा के लिए उन महत्वपूर्ण सामग्रियों की पूरी सूची जिनके बिना यह उपवास अधूरा है।
षटतिला एकादशी की पूजा के लिए आवश्यक सामग्रियों की लिस्ट में ये चीजें शामिल हैं:
पूजा की शुरुआत के लिए भगवान विष्णु की एक सुंदर प्रतिमा या तस्वीर का होना आवश्यक है। यदि आपके पास लड्डू गोपाल या शालीग्राम जी हैं, तो उनका अभिषेक करना अत्यंत शुभ होता है।
अभिषेक के लिए आपको शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, शक्कर और घी की आवश्यकता होगी। इन पांचों को मिलाकर 'पंचामृत' तैयार किया जाता है, जो षटतिला एकादशी की मुख्य सामग्री है। इसके अलावा, भगवान को स्नान कराने के बाद पोंछने के लिए एक साफ पीला कपड़ा या आसन भी पास रखें।

षटतिला एकादशी पर तिल सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है। पूजा की थाली में काले और सफेद, दोनों प्रकार के तिल होने चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन तिल का छह तरह से प्रयोग होता है।
पूजा के लिए 'तिल का तेल' (दीपक के लिए), 'तिल मिश्रित जल', 'तिल का उबटन', 'तिल का होम' (हवन के लिए), 'तिल का भोग' और 'तिल का दान' करने हेतु पर्याप्त मात्रा में तिल रखें। इनके बिना इस एकादशी का संकल्प अधूरा माना जाता है।
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भगवान विष्णु को 'पीतांबर' प्रिय है, इसलिए पूजा में पीले रंग के फूल जैसे गेंदा या पीला गुलाब, पीला चंदन और पीले वस्त्र शामिल करें। इसके साथ ही अक्षत के रूप में पीले किए हुए चावल का प्रयोग करें क्योंकि एकादशी पर सफेद चावल का प्रयोग वर्जित होता है।
धूप, अगरबत्ती और शुद्ध देसी घी का दीपक भी तैयार रखें। दीपक के लिए यदि आप कलावा या मौली की बत्ती का उपयोग करते हैं, तो यह और भी श्रेष्ठ माना जाता है।

भगवान विष्णु की कोई भी पूजा तुलसी के पत्तों के बिना स्वीकार नहीं होती। षटतिला एकादशी पर तुलसी दल का होना अनिवार्य है। इसके साथ ही ऋतु फल जैसे केला, बेर या संतरा पूजा में रखें। विशेष रूप से पीले रंग के फल अर्पित करना अधिक शुभ होता है।
पान का पत्ता, सुपारी, लौंग और इलायची को 'मुखशुद्धि' के रूप में अर्पित करने के लिए थाली में सजाएं। दक्षिणा के रूप में कुछ सिक्के भी रखें, जो पूजा की पूर्णाहुति के लिए दान किए जाते हैं।
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