Thu Apr 16, 2026 | Updated 01:54 AM IST
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Satwai Amavasya Puja Vidhi & Mantra 2026: सतुवाई अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए ऐसे करें पूजन, नोट करें पूरी पूजा विधि और मंत्र

सुतवाई अमावस्या के दिन आप भी पितरों को प्रसन्न करने के लिए आप भी सही पूजा विधि और मंत्रों का उच्चारण जरूर करें, ताकि आपके जीवन में सकारात्मकता बढ़ाएगा।
Editorial
Updated:- 2026-04-16, 00:05 IST

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की अमावस्या को सतुवाई अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह तिथि दान-पुण्य और पितृ तर्पण के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन सत्तू के दान और पितरों की शांति के लिए किए गए उपायों का फल अच्छा प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पूजन से न केवल पितृ दोष दूर होता है, बल्कि घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास भी होता है। पंडित जन्मेश द्विवेदी से जानते हैं पूजा विधि और मंत्र।

सतुवाई अमावस्या पूजा विधि

  • इस दिन घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, काले तिल और सफेद फूल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित करें।
  • इस दिन सत्तू, मिट्टी का घड़ा, गुड़ और मौसमी फलों का दान करने का संकल्प लें।
  • शाम के समय घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के निमित्त दीपक जलाएं।
  • इससे आपके ऊपर पितरों का आशीर्वाद बना रहेगा।

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सुतवाई अमावस्या के विशेष मंत्र

  • अमावस्या के दिन मंत्रों का जाप मानसिक शांति और पितरों के आशीर्वाद के लिए किया जाता है। यहां प्रमुख मंत्र और उनके गहरे अर्थ दिए गए हैं।
  • पितृ गायत्री मंत्र ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:।। इसका अर्थ है यह मंत्र पितृ शांति के लिए सबसे शक्तिशाली माना जाता है। इसमें हम देवताओं, पितरों और महान योगियों को नमन करते हैं।
  • पितृ तर्पण मंत्र ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमं गृह्णन्तु जलाञ्जलिम्। इसका अर्थ है हे मेरे पितरों, कृपया यहां पधारें और मेरे द्वारा दी गई इस जल की भेंट को स्वीकार करें।
  • अर्यमा मंत्र ॐ अर्यमायै नम:। इसका अर्थ है भगवान अर्यमा को पितरों का राजा माना जाता है।
  • क्षमा प्रार्थना मंत्र ॐ नमो वः पितरो रसाय नमो वः पितरः शोषाय नमो वः पितरो जीवाय। इसका अर्थ है हम पितरों के विभिन्न स्वरूपों को प्रणाम करते हैं।

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सतुवाई अमावस्या 2026 केवल एक तिथि नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने का तरीका है। यदि आप पूरी श्रद्धा और सही मंत्रों के उच्चारण के साथ पूजन करते हैं, तो आपके जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हो जाएंगी।

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Image credit- Freepik

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