
आज बुधवार, 18 मार्च 2026 का दिन बहुत ही पवित्र और खास है। आज के दिन अपने पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए श्राद्ध अमावस्या का महत्वपूर्ण व्रत और तर्पण किया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज पवित्र चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 08:28 बजे तक रहेगी और उसके ठीक बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त दान-पुण्य और तर्पण करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और रुके हुए काम बनने लगते हैं। आज सुबह 05:21 बजे तक पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रहेगा और उसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र लग जाएगा। इसके साथ ही, आज सुबह 06:21 बजे तक सफलता देने वाला साध्य योग रहेगा, जिसके बाद शुभ योग शुरू हो जाएगा। बुधवार के दिन श्राद्ध अमावस्या का आना एक विशेष संयोग है, क्योंकि बुधवार भगवान गणेश जी का दिन है, जो सभी विघ्नों को दूर करते हैं। आइए, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज के इस खास पंचांग की पूरी जानकारी, शुभ-अशुभ समय और जीवन की हर परेशानी को दूर करने के बेहद आसान और घरेलू उपाय विस्तार से जानते हैं।

| तिथि | नक्षत्र | दिन/वार | योग | करण |
| चतुर्दशी (सुबह 08:08 बजे तक) | पूर्वाभाद्रपद | बुधवार | साध्य | शकुनि |
| प्रहर | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06 बजकर 16 मिनट पर होगा |
| सूर्यास्त | शाम 06 बजकर 20 मिनट पर होगा |
| चंद्रोदय | सुबह 06 बजकर 12 मिनट पर होगा |
| चंद्रास्त | शाम 05 बजकर 45 मिनट पर हो |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | (सूर्य पूजन का शुभ समय) सुबह 04 बजकर 36 मिनट से 05 बजकर 24 मिनट तक |
| अभिजीत मुहूर्त | (सूर्य पूजन का शुभ समय) आज नहीं है |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 17 मिनट तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 06 बजकर 36 मिनट से 07 बजकर 00 मिनट तक |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| राहु काल | दोपहर 12 बजकर 25 मिनट से 01 बजकर 58 मिनट तक |
| यमगंड | सुबह 07 बजकर 48 मिनट से 09 बजकर 20 मिनट तक |
| गुलिक काल | सुबह 10 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट त |
बुधवार को राहु काल दोपहर के समय होता है। इस दौरान किसी भी तरह की नई खरीदारी, जरूरी यात्रा की शुरुआत, या बड़े पैसों के लेन-देन से पूरी तरह बचना चाहिए।
आज चैत्र कृष्ण चतुर्दशी के बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी, जिसे श्राद्ध अमावस्या या चैत्र अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। अमावस्या का दिन पितरों की पूजा, तर्पण और उनके नाम पर दान करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। आज के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और गरीब व जरूरतमंदों को भोजन कराने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। सुबह 06:21 बजे तक साध्य योग है। 'साध्य' का मतलब होता है किसी भी कार्य को सिद्ध या पूरा करना। आज के दिन किए गए पुण्य कार्य और पितृ शांति के उपाय बहुत जल्दी फल देते हैं।
जब भी कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि आती है, उस दिन पितरों की विशेष शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। यहतिथि हर महीने आती है और इसे पितृ दोष से मुक्ति पाने का अत्यंत प्रभावशाली समय माना गया है। जब श्राद्ध अमावस्या बुधवार के दिन पड़ती है, तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि बुधवार बुद्धि और व्यापार के देवता भगवान गणेश जी का दिन है। पितरों के आशीर्वाद और भगवान गणेश की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और परिवार में शांति का वातावरण बनता है। आज के दिन पितरों के निमित्त किया गया छोटे से छोटा दान भी कई गुना अधिक फल प्रदान करता है।

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