
हिंदू धर्म में किसी भी व्रत-त्योहार की तरह सकट चौथ का व्रत भी बहुत फलदायी माना जाता है और यह भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित होता है। इस दिन महिलाएं संतान की दीर्घायु की कामना में व्रत करती हैं और पूरे दिन निर्जला व्रत का पालन करती हैं। इसके बार रात के समय चंद्र दर्शन करके पूजा करती हैं और संतान की अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए पूजा-पाठ करती हैं। ये व्रत बहुत कठिन माना जाता है, लेकिन इसका धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा होता है। ऐसा कहा जाता है कि जो मां इस व्रत का पालन विधि पूर्वक करती है उसकी संतान के जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और गणपति की विशेष कृपा बनी रहती है। यह तिथि माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। ऐसे में आज चतुर्थी तिथि है और सकट चौथ का व्रत रखा जा रहा है। तो चलिए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें आज सकट चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इसका महत्व क्या है।
इस साल माघ महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी यानी कि सकट चौथ का व्रत 06 जनवरी, मंगलवार को रखा जाएगा।
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सकट चौथ में कुछ विशेष मुहूर्त मिल रहे हैं। आइए जानें उनके बारे में-
| शुभ मुहूर्त | शुभ समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | 6 जनवरी,5:25 बजे से सुबह 6:25 बजे तक |
| सूर्योदय का समय | 6 जनवरी, प्रातः 7:13 बजे |
| सूर्यास्त का समय | 6 जनवरी,शाम 5:51 बजे |
| अमृत काल | 6 जनवरी,सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त | 6 जनवरी,दोपहर 12:11 बजे से 12:53 बजे तक |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | 6 जनवरी,प्रातः 7:13 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक |
सनातन धर्म में गणपति की पूजा सबसे पहले की जाती है। उन्हें प्रथम पूजनीय गणपति भी कहा जाता है। मान्यता है कि इनकी पूजा के बिना कोई भी कार्य संपन्न नहीं होता है। इसी वजह से प्रत्येक महीने की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणपति की विधि-विधान से पूजा की जाती है। वैसे तो साल के हर महीने में दो बार चतुर्थी तिथि आती है, लेकिन माघ मास की चतुर्थी विशेष रूप से बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इस चतुर्थी को सकट चौथ के नाम से जाना जाता है। यह सभी चतुर्थी तिथि में सबसे बड़ी चतुर्थी मानी जाती है।
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इस दिन की गई गणपति की पूजा मुख्य रूप से संतान की प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र की कामना को पूर्ण करने में मदद करती है। मान्यता है कि इस दिन निर्जला व्रत करने वाली महिलाओं की बच्चों से जुड़ी कोई भी समस्या दूर होती है और बच्चों की सेहत भी अच्छी बनी रहती है। पद्म पुराण के अनुसार सकट चतुर्थी व्रत के बारे में भगवान गणेश ने ही माता पार्वती को बताया था। इसलिए इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। स्त्रियां सुख, सौभाग्य, संतान की समृद्धि और परिवार के कल्याण की इच्छा से यह व्रत रखती हैं।
यदि आप भी पूरे श्रद्धाभाव से सकट चौथ का व्रत करती हैं और गणपति की पूजा करती हैं तो संतान को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसे ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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