
सकट चौथ पर संतान की लंबी आयु और सुख समृद्धी के लिए कई माताएं व्रत और पूजा करती हैं, मगर इसका फल तब ही मिलता है, जब शुभ मुहूर्त पर पूजा करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। सकट चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि सकट चौथ का व्रत और पूजा तब तक अधूरा है, जब तक आप चंद्रमा को सही मुहूर्त में दूध और जल के मिश्रण से अर्घ्य न दें। इस विषय में हमने पंडित जी से बात की और चंद्र उदय और अर्घ्य देने का सही समय जाना। उज्जैन, मध्य प्रदेश निवासी ज्योतिषाचार्य एवं पंडित मनीष शर्मा से बात करने पर हमें इसकी सही जानकारी मिली। वह कहते हैं, "सकट चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देना एक रीति नहीं बल्कि एक अनुष्ठान है। इससे आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और पूजा भी सफल हो जाती है।"
पंडित जी ने हमें सकट चौथ पर चंद्रमा के निकलने और चंद्रमा को अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त बताया है-
सकट चौथ का व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुख और सुरक्षा के लिए करती हैं। इस व्रत में चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। बिना चंद्र अर्घ्य के यह व्रत अधूरा रहता है। इसलिए सकट चौथ पर सही समय और विधि जानना ज़रूरी है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, 6 जनवरी 2026 को सकट चौथ के दिन चंद्रमा का दर्शन शाम 5 बजकर 35 मिनट पर होगा। इस समय आप चंद्र देव के दर्शन कर सकती हैं और उनकी पूजा-पाठ शुरू कर सकती हैं।
हालांकि, इस समय अर्घ्य देना शुभ नहीं माना जाता, इसलिए अर्घ्य के लिए थोड़ी देर प्रतीक्षा करनी चाहिए।
जो महिलाएं सुबह के समय गणेश जी की पूजा नहीं कर पाई हैं, वे चंद्र दर्शन के बाद गणेश जी का पूजन कर सकती हैं। इसके बाद सकट चौथ की व्रत कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। इस समय आप चंद्र देव के लिए मंत्र जप और साधारण पूजा भी कर सकती हैं।
सकट चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण होता है। पंडितों के अनुसार, 6 जनवरी को रात 8 बजकर 54 मिनट पर चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ रहेगा। इसी समय व्रत खोलना चाहिए।
अगर आप भी चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करती हैं तो आपके लिए ये जान लेना जरूरी है कि आपके शहर में किस समय चांद दिखाई देगा। आइए जानें यहां चंद्रोदय का समय।
| शहर का नाम | चंद्रोदय का समय |
| दिल्ली | रात्रि 9 बजकर 34 मिनट पर |
| नोएडा | रात्रि 8 बजकर 54 मिनट पर |
| गाजियाबाद | रात्रि 8 बजकर 54 मिनट पर |
| नासिक | रात्रि 9 बजकर 18 मिनट पर |
| पुणे | रात्रि 9 बजकर 20 मिनट पर |
| मुंबई | रात्रि 9 बजकर 24 मिनट पर |
| जयपुर | रात्रि 9 बजकर 3 मिनट पर |
| पटना | रात्रि 8 बजकर 25 मिनट पर |
| मेरठ | रात्रि 8 बजकर 52 मिनट पर |
| अहमदाबाह | रात्रि 8 बजकर 20 मिनट पर |
| आगरा | रात्रि 8 बजकर 53 मिनट पर |
| लखनऊ | रात्रि 8 बजकर 41 मिनट पर |
| मथुरा | रात्रि 8 बजकर 55 मिनट पर |
| इंदौर | रात्रि 9 बजकर 7 मिनट पर |
| कानपुर | रात्रि 8 बजकर 51 मिनट पर |
| प्रयागराज | रात्रि 8 बजकर 40 मिनट पर |
चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए तांबे या पीतल के लोटे में जल, दूध और चीनी मिलाएं। इस मिश्रण से चंद्र देव को अर्घ्य दें।
ध्यान रखें कि अर्घ्य हमेशा पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके देना चाहिए, क्योंकि चंद्रमा का उदय भी इसी दिशा से होता है।
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इस विधि से अर्घ्य देने से व्रत सफल माना जाता है और संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो, तो इस लेख को शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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