
भारत को मंदिरों और देवताओं की भूमि के रूप में सदियों से सराहा जाता रहा है। यहां के हर स्थान पर कोई न कोई प्रसिद्ध मंदिर जरूर है। हर स्थान पर कोई ना कोई ऐसा मंदिर भी होता है जिसकी अपनी लगा कहानी होती है। यही नहीं उन मंदिरों की रहस्यमई कथाओं के साथ उनसे जुड़े कुछ तथ्य भी जरूर होते हैं जो हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं। ऐसे ही देश के कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जिनकी कहानी के साथ उससे जुड़ी कुछ बातें भी हैं जो हैरान कर सकती हैं। उन्हीं में से कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जिनके लिए यह प्रचलित है कि यदि आप वहां दर्शन के लिए जा रही हैं तो भूलकर भी आपको उन स्थानों का प्रसाद अपने घर में नहीं लाना चाहिए। मान्यता यह भी है कि यदि आप इन मंदिरों का प्रसाद घर लेकर आती हैं तो इससे आपके घर में भी घटनाएं हो सकती हैं और कुछ नकारात्मक प्रभाव आ सकते हैं। आइए जानें भारत के उन अनोखे मंदिरों के बारे में जिनसे आप शायद अनजान होंगी।
हनुमानजी को समर्पित मेहंदीपुर बालाजी का नाम भला किसने नहीं सुना होगा। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में दर्शन मात्र से प्रेत बाधाएं समाप्त होती हैं और जो लोग बुरी शक्तियों से पीड़ित होते हैं, उनको इस मंदिर में दर्शन करने से बाधाओं से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि इस मंदिर में यदि कोई व्यक्ति बूंदी के लड्डू का बोग लगाता है तो उसकी बाधाएं दूर होती हैं। इसी स्थान पर भैरव बाबा को भी उड़द दाल और चावल का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में यदि कोई आपको प्रसाद दे तो उसे ग्रहण न करें और न ही मंदिर का प्रसाद घर लाएं, अन्यथा जीवन में समस्याएं आ सकती हैं।

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काल भैरव मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। इस मंदिर में प्रसाद के रूप में भक्त मदिरा का भोग लगाते हैं। यह भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां यह परंपरा प्रचलित है कि यहां जो मदिरा भोग में चढ़ती है उसका भोग ग्रहण नहीं करना चाहिए और न ही इसे घर लाना चाहिए। यदि आप भूलकर भी इस प्रसाद को घर लाती हैं तो आपके घर में कुछ अनहोनी घटनाएं हो सकती हैं।
कामख्या देवी मंदिर असम के गुवाहाटी में स्थित भारत के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह भारत का एक मात्र मंदिर हैं जहां माता कामाख्या की योनि की पूजा उनके मासिक धर्म के दौरान की जाती है। यहां साल में एक बार 3 दिवसीय उत्सव मनाया जाता है और इस दौरान मंदिर के भीतर किसी का भी प्रवेश वर्जित होता है यही नहीं यदि कोई इस मंदिर का प्रसाद ग्रहण करता है तो उसके जीवन में कुछ अशुभ घटनाएं हो सकती हैं।
नैना देवी मंदिर हिमाचल में मौजूद है और यह 51 शक्तिपीठों में से एक है. यहां प्रसाद के रूप में दी जाने वाली चीजें विशेष अनुष्ठान के बाद केवल माता को अर्पित की जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में मिलने वाले प्रसाद को आपको मंदिर परिसर में ही ग्रहण कर लेना चाहिए। आपको भूलकर भी इस मंदिर का प्रसाद मंदिर से बाहर या घर में नहीं लाना चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन में नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। हालांकि यदि आप इस प्रसाद को मंदिर परिसर में ही ग्रहण कर लेती हैं तो इसके कोई अशुभ प्रभाव नहीं होते हैं।
कोटिलिंगेश्वर मंदिर कर्नाटक के कोलार जिले में स्थित है और इस मंदिर में एक करोड़ शिवलिंगों की स्थापना की गई है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का प्रसाद भक्तों को केवल प्रतीकात्मक रूप से ही ग्रहण करना चाहिए। मान्यता यह भी है कि आपको कभी भी शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद ग्रहण नहीं करना चाहिए। इसी वजह से इस मंदिर में प्रसाद न तो ग्रहण करना चाहिए और न ही इसे मंदिर से बाहर लाना चाहिए।
यदि आप भी इनमें से किसी भी मंदिर में दर्शन के लिए जा रही हैं तो इस बात का ध्यान जरूर रखें कि यहां के मंदिरों का प्रसाद न ग्रहण करें। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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