
हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का दिन केवल मौन धारण करने या गंगा स्नान करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह दिन हमारे पूर्वजों यानी पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का सबसे बड़ा अवसर होता है। शास्त्रों में माना गया है कि इस विशेष तिथि पर पितृगण वायु रूप में अपने वंशजों के द्वार पर आते हैं। अगर इस दिन उनकी प्रसन्नता के लिए विशेष पाठ न किया जाए तो व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स के अनुसार, पितृ चालीसा वह सरल और प्रभावशाली माध्यम है जिसके द्वारा कम समय में पितरों की स्तुति की जा सकती है। इसके पाठ से न केवल पूर्वज तृप्त होते हैं बल्कि घर की नकारात्मक ऊर्जा का भी नाश होता है जिससे जीवन में सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।
॥ दोहा ॥
हे पितरेश्वर आपको दे दो आशीर्वाद,
चरण शीश नवा दियो रख दो सिर पर हाथ।
सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी।
हे पितरेश्वर दया राखियो,करियो मन की चाया जी।।
॥ चौपाई ॥
पितरेश्वर करो मार्ग उजागर, चरण रज की मुक्ति सागर।
परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा, मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा।
मातृ-पितृ देव मनजो भावे, सोई अमित जीवन फल पावे।
जै-जै-जै पित्तर जी साईं, पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं।

चारों ओर प्रताप तुम्हारा, संकट में तेरा ही सहारा।
नारायण आधार सृष्टि का, पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का।
प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते, भाग्य द्वार आप ही खुलवाते।
झंझुनू ने दरबार है साजे, सब देवो संग आप विराजे।
प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा, कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा।
पित्तर महिमा सबसे न्यारी, जिसका गुणगावे नर नारी।
तीन मण्ड में आप बिराजे, बसु रुद्र आदित्य में साजे।
नाथ सकल संपदा तुम्हारी, मैं सेवक समेत सुत नारी।
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छप्पन भोग नहीं हैं भाते, शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते।
तुम्हारे भजन परम हितकारी, छोटे बड़े सभी अधिकारी।
भानु उदय संग आप पुजावै, पांच अँजुलि जल रिझावे।
ध्वज पताका मण्ड पे है साजे, अखण्ड ज्योति में आप विराजे।
सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी, धन्य हुई जन्म भूमि हमारी।
शहीद हमारे यहाँ पुजाते, मातृ भक्ति संदेश सुनाते।
जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा, धर्म जाति का नहीं है नारा।
हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सब पूजे पित्तर भाई।
हिन्दु वंश वृक्ष है हमारा, जान से ज्यादा हमको प्यारा।
गंगा ये मरूप्रदेश की, पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की।
बन्धु छोड़ना इनके चरणाँ, इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा।
चौदस को जागरण करवाते, अमावस को हम धोक लगाते।
जात जडूला सभी मनाते, नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते।
धन्य जन्म भूमि का वो फूल है, जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है।
श्री पित्तर जी भक्त हितकारी, सुन लीजे प्रभु अरज हमारी।
निशदिन ध्यान धरे जो कोई, ता सम भक्त और नहीं कोई।
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तुम अनाथ के नाथ सहाई, दीनन के हो तुम सदा सहाई।
चारिक वेद प्रभु के साखी, तुम भक्तन की लज्जा राखी।
नाम तुम्हारो लेत जो कोई, ता सम धन्य और नहीं कोई।
जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत, नवों सिद्धि चरणा में लोटत।
सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी, जो तुम पे जावे बलिहारी।
जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे, ताकी मुक्ति अवसी हो जावे।
सत्य भजन तुम्हारो जो गावे, सो निश्चय चारों फल पावे।
तुमहिं देव कुलदेव हमारे, तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे।
सत्य आस मन में जो होई, मनवांछित फल पावें सोई।
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई, शेष सहस्र मुख सके न गाई।
मैं अतिदीन मलीन दुखारी, करहु कौन विधि विनय तुम्हारी।
अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै, अपनी भक्ति, शक्ति कछु दीजै।
॥ दोहा ॥
पित्तरों को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम।
श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम॥
झुंझुनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान।
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान॥
जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझुनू धाम।
पित्तर चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान॥
मौनी अमावस्या का व्रत बिना पितृ चालीसा के अधूरा माना जाता है क्योंकि यह पाठ विशेष रूप से हमारे पूर्वजों को संबोधित होता है। जैसे हम देवताओं को प्रसन्न करने के लिए उनकी चालीसा पढ़ते हैं, वैसे ही पितृ चालीसा में उन शक्तियों का वर्णन होता है जो हमारे कुल की रक्षा करती हैं।
अमावस्या तिथि पर पितरों का तर्पण करने के बाद जब श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ किया जाता है, तो यह पूर्वजों तक हमारी भावनाओं को पहुंचाने का काम करता है। यह पाठ उन लोगों के लिए बहुत जरूरी है जो जटिल संस्कृत मंत्रों या लंबी श्राद्ध विधि को करने में असमर्थ हैं।
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पितृ चालीसा के नियमित पाठ, विशेषकर मौनी अमावस्या पर करने के कई लाभ हैं। सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पितृ दोष के प्रभाव को कम करता है। अगर आपके घर में बिना वजह कलह रहता है, आर्थिक तंगी बनी रहती है या संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है तो पितृ चालीसा का पाठ इन समस्याओं का समाधान कर सकता है।
इसके पाठ से पितरों को शांति मिलती है जिससे वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को धन, बुद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद देते हैं। यह आपके मन को भी शांत करता है और आपको अपने परिवार की जड़ों से जोड़ता है।
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