
माघ गुप्त नवरात्रि (19 जनवरी से 28 जनवरी 2026) शक्ति की उपासना का अत्यंत रहस्यमयी और प्रभावशाली समय है। टैरो कार्ड रीडर सोनिया चड्डा के अनुसार, यह पर्व आदिशक्ति को प्रसन्न करने से कहीं ज्यादा खुद को साधने और अपनी ऊर्जा को जागृत करने का अवसर है।
गुप्त नवरात्रि का अर्थ है, ऐसी साधना जिसे गुप्त रखा जाए। जब हम पूरी श्रद्धा के साथ खुद को नियम और अनुशासन में बांधते हैं, तब मां आदिशक्ति हमें वो बल प्रदान करती हैं जिससे जीवन की हर बाधा दूर हो जाती है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि साधना मां को खुश करने के लिए है, लेकिन असल में यह स्वयं को साधने की प्रक्रिया है। व्रत और पूजन के जरिए हमें अपने भीतर की रुकावटों (जैसे अहंकार, आलस और नकारात्मक सोच) को खत्म करना है। जब हम खुद को शुद्ध करते हैं, तब ईश्वरीय शक्ति हमारे भीतर आसानी से प्रवाहित होने लगती है।

व्रत करना केवल भूखा रहना नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा तीनों की शुद्धि का माध्यम है। व्रत के द्वारा जहां हमारा शरीर विषैले तत्वों से मुक्त होता है, वहीं मंत्र जाप से मन, वाणी और विचार पवित्र होते हैं।
मां की आराधना में धूप, दीप, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य अर्पित कर तथा उनके समक्ष नतमस्तक होकर हम अपने अहंकार का त्याग करते हैं। इससे हमारा आभा मंडल (Aura) सकारात्मक और स्वस्थ होता है। इन दिनों में हम स्वयं को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से साधना के लिए तैयार करते हैं।
इस नवरात्रि में पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। फिर पूजा के लिए तैयार हो जाएं। पूजा के दौरान दसों महाविद्याओं की पूजा करें। मां फल, फूल, और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
जब हम शुद्ध मन से किसी इच्छा का संकल्प लेकर मां को पुकारते हैं, तब मां इस इच्छा की पूर्ति के लिए हमें आवश्यक बल, साहस और शक्ति प्रदान करती हैं।
ग्रह-नक्षत्र अपने निर्धारित नियमों के अनुसार काम करते हैं, लेकिन जब हम मां आदिशक्ति की शरण में होते हैं, तो वह हमें जीवन की कठिन परिस्थितियों से निकलने की हिम्मत देती हैं और हमारा हाथ पकड़कर भवसागर से पार कराती हैं।
यदि नवरात्रि को वैज्ञानिक दृष्टि से देखें, तो भारतवर्ष में चार ऋतुएं होती हैं। हर ऋतु परिवर्तन के साथ हमारे शरीर की आंतरिक व्यवस्था, खानपान, रहन-सहन और जठराग्नि में भी परिवर्तन आता है। इसी कारण शक्ति की उपासना वर्ष में चार बार माघ, चैत्र, आषाढ़ और शरद मास में की जाती है, ताकि हमारी आंतरिक और बाह्य ऊर्जा में संतुलन बना रहे।
हमारे ऋषि-मुनियों को मानव शरीर और प्रकृति का गहरा ज्ञान था, इसलिए उन्होंने धर्म और स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ा, जिससे मनुष्य आस्था के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य की भी रक्षा कर सके।
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यदि मनुष्य पूरी श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ शक्ति साधना का पर्व मनाता है, तो उसे जीवन को जीने की सही दिशा, नई सोच और मां का दिव्य मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

माघ माह के शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि गुप्त मतलब जिसे सबके समक्ष प्रकट न किया जाए। गुप्त नवरात्र में अपनी साधना का संकल्प, मंत्र और अनुभव किसी से शेयर नहीं किए जाते। नवरात्रि में रात्रि पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
इन नवरात्रों में मां के 10 महाविद्या स्वरूपों की उपासना का विशेष महत्व माना गया है और ये साधनाएं साधकों के लिए विशेष फल देने वाली और शीघ्र सिद्ध होने वाली होती है, क्योंकि 10 महाविद्या शक्ति का उग्र स्वरूप हैं। इन रूपों की साधना उपासना बिना किसी के मार्गदर्शन के नहीं करनी चाहिए। सामान्यजन इन दिनों मां के सौम्य नव दुर्गा स्वरूपों की साधना उपासना कर सकते हैं।
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इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मन पवित्र हो और पूजा साधना का उद्देश्य किसी का अहित करना न हो। आप जगत जननी से अपनी हर व्यथा का हल पा सकते हैं, क्योंकि एक मां अपने बच्चे की हर दुख दर्द को समझती और इसे दूर करने का हर संभव प्रयास करती है, परंतु यदि बच्चा गलती करता है, तो उसे डांट डपटकर सही रास्ते पर भी लाती है, इसलिए मां से अपने उज्जवल भविष्य और परिवार पर कृपा करने के लिए प्रार्थना करें। साथ ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को पाने के लिए भी प्रार्थना करें, किसी का अहित करने के लिए नहीं।
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