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Kalashtami Upay: पितृदोष से मुक्ति के लिए कालष्टमी पर जलाएं चौमुखी दीया, पूर्वजों का मिलेगा आशीर्वाद

कालष्टमी के दिन आपको भी पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होगा। जब आप चौमुखी दीये को घर के मुख्य द्वार पर जलाएंगी। बस इस उपाय को करते समय आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा, ताकि आपके द्वारा किया गया कार्य आपके लिए बेहतर साबित हो।
Editorial
Updated:- 2026-04-08, 18:38 IST

हिंदू धर्म में कालष्टमी का दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालष्टमी मनाई जाती है। यह दिन न केवल तंत्र-मंत्र और बाधाओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए भी इसे बेहद फलदायी माना गया है। इस बार कालष्टमी 10 अप्रैल को पड़ रही है। इस दिन आप घर पर चौमुखी दीये को जलाएं। इससे आपके घर में आने वाली समस्याएं दूर हो सकती हैं। पंडित जन्मेश द्विवेदी ने इसके बारे में संपूर्ण जानकारी शेयर की है। आइए आपको भी इसके बारे में बताते हैं।

क्यों खास है कालष्टमी पर पितृ पूजा?

भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल कहे जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि उनकी अनुमति के बिना कोई भी नकारात्मक शक्ति या दोष शांत नहीं होता। पितृदोष की शांति के लिए जब हम कालष्टमी पर उपाय करते हैं, तो भैरव बाबा की कृपा से पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बरसने लगता है।

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चौमुखी दीए का अचूक उपाय

  • यह उपाय कालष्टमी की शाम को सूर्यास्त के बादकरना सबसे उत्तम होता है।
  • इसके लिए आपको मिट्टी के दीपक में चार बत्तियां इस प्रकार रखें कि वे चारों दिशाओं की ओर हों। दीपक को सरसों के तेल से भर दें।
  • दीपक के तेल में चुटकी भर काले तिल डालें। काले तिल पितरों के लिए होते हैं।
  • फिर इसे घर के मुख्य द्वार पर या घर के दक्षिण कोने में जाकर जला दें।
  • हाथ जोड़कर भगवान काल भैरव का ध्यान करें और अपने पूर्वजों से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
  • उनसे प्रार्थना करें कि वे प्रसन्न होकर घर में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दें।

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पितृ दोष शांति के अन्य लाभ

  • पितृ दोष शांत होने से करियर और व्यवसाय में आ रही रुकावटें दूर होने लगती हैं।
  • घर में बेवजह होने वाले झगड़े शांत होते हैं और सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है।
  • पूर्वजों की कृपा से मानसिक तनाव कम होता है और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार आता है।

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पितृदोष कोई अभिशाप नहीं, बल्कि पूर्वजों की अधूरी इच्छाओं या हमारे कर्मों का एक संकेत है। कालष्टमी के दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह चौमुखी दीए का उपाय न केवल पूर्वजों को तृप्ति प्रदान करता है, बल्कि आपके आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सौभाग्य का द्वार खोलता है। इस विशेष तिथि पर भगवान भैरव की शरण में जाकर अपने पितरों का आशीर्वाद जरूर प्राप्त करें।

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Image credit- Freepik

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