
हिंदू धर्म में कालष्टमी का दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालष्टमी मनाई जाती है। यह दिन न केवल तंत्र-मंत्र और बाधाओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए भी इसे बेहद फलदायी माना गया है। इस बार कालष्टमी 10 अप्रैल को पड़ रही है। इस दिन आप घर पर चौमुखी दीये को जलाएं। इससे आपके घर में आने वाली समस्याएं दूर हो सकती हैं। पंडित जन्मेश द्विवेदी ने इसके बारे में संपूर्ण जानकारी शेयर की है। आइए आपको भी इसके बारे में बताते हैं।
भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल कहे जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि उनकी अनुमति के बिना कोई भी नकारात्मक शक्ति या दोष शांत नहीं होता। पितृदोष की शांति के लिए जब हम कालष्टमी पर उपाय करते हैं, तो भैरव बाबा की कृपा से पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बरसने लगता है।

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पितृदोष कोई अभिशाप नहीं, बल्कि पूर्वजों की अधूरी इच्छाओं या हमारे कर्मों का एक संकेत है। कालष्टमी के दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह चौमुखी दीए का उपाय न केवल पूर्वजों को तृप्ति प्रदान करता है, बल्कि आपके आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सौभाग्य का द्वार खोलता है। इस विशेष तिथि पर भगवान भैरव की शरण में जाकर अपने पितरों का आशीर्वाद जरूर प्राप्त करें।
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