
10 जनवरी 2026 को साल की पहली कालाष्टमी मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान काल भैरव को समर्पित यह विशेष दिन मनाया जाता है। काल भैरव भगवान शिव का ही एक रौद्र और शक्तिशाली अवतार माने जाते हैं। साल की पहली कालाष्टमी होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन की गई पूजा से पूरे साल आने वाली बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। जो लोग भय, मानसिक तनाव या शत्रुओं से परेशान हैं उनके लिए यह दिन भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं साल की पहली कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव की पूजा विधि, मंत्र और भोग के बारे में।
10 जनवरी 2026, शनिवार को कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय रात का माना जाता है। ज्योतिष गणना के अनुसार, अष्टमी तिथि 10 जनवरी को सुबह 08:35 बजे शुरू होकर अगले दिन 11 जनवरी को सुबह 07:11 बजे तक रहेगी।
काल भैरव की विशेष 'निशीथ काल' पूजा का शुभ मुहूर्त रात 12:01 बजे से रात 12:55 बजे के बीच रहेगा। हालांकि, जो लोग शाम की पूजा करना चाहते हैं, वे सूर्यास्त के बाद शाम 05:41 बजे से लेकर रात के किसी भी समय श्रद्धापूर्वक दीप दान और मंत्र जाप कर सकते हैं।

कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा का सबसे शुभ समय रात का माना जाता है क्योंकि भैरव बाबा 'तामसिक' और 'निशीथ काल' के देवता हैं।
घर के मंदिर में या किसी शिव मंदिर में जाकर भगवान काल भैरव की मूर्ति या चित्र के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। उन्हें नीले या काले फूल अर्पित करें।
अगर संभव हो तो इस दिन किसी काले कुत्ते को भोजन जरूर कराएं क्योंकि कुत्ता भगवान भैरव की सवारी माना जाता है। इससे शनि और राहु के दोष भी दूर होते हैं।
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काल भैरव की पूजा में मंत्रों का जाप बहुत प्रभावशाली होता है। पूजा के दौरान 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय।' मंत्र का जाप करें। यह भगवान काल भैरव का मूल मंत्र है।
इसके अलावा, कालाष्टमी के दिन 'ॐ कालभैरवाय विद्महे, दंडपाणये धीमहि, तन्नो भैरव: प्रचोदयात्।' मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। इस मंत्र के जाप से जीवन में साहस आता है और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।

भगवान काल भैरव को सात्विक और सरल भोग पसंद है। इस दिन उन्हें मुख्य रूप से उड़द की दाल के वड़े, मीठे पुए, तली हुई पापड़ या हलवे का भोग लगाया जाता है।
कई स्थानों पर उन्हें इमरती और काले तिल का भोग भी चढ़ाया जाता है। याद रखें कि भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में गरीबों में जरूर बांटें।
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