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Kalashtami April 2026: कब है कालाष्टमी? यहां जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Kab Hai Kalashtami: इस बार काल अष्टमी अप्रैल के महीने में पड़ रही है। ऐसे में आप भी जानें इसकी सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व, ताकि आप भी पूजा अर्चना करना पाएं।
Editorial
Updated:- 2026-04-09, 14:15 IST

Kalashtami Kab Hai: हिंदू धर्म में हर तिथि का महत्व अलग होता है। इसलिए किसी भी पूजा पाठ को करने से पहले पंचांग देखा जाताहै। इस बार अप्रैल के महीने में कालाष्टमी पड़ रही है। ऐसा कहा जाता है कि काल भैरव भगवान शिव के स्वरूप होते हैं। इनका स्वरूप बहुत रौद्र और उग्र होगा। ऐसे में इनकी पूजा अर्चना करने से नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती है। जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस बार यह तिथि किस तारीख में पड़ रही है आइए पंडित जन्मेश द्विवेदी से जानते हैं और शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में भी पूरी जानकारी आपको बातते हैं।

कब है कालाष्टमी?

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 अप्रैल को रात 9 बजकर 19 मिनट से शुरू हो रही है और 10 अप्रैल 2026 को रात 11 बजकर 14 मिनट पर खत्म हो रही है। इसके अनुसार, कालाष्टमी की पूजा और व्रत आप 9 अप्रैल को रात के समय शुरू कर सकती हैं। साथ ही 9 की रात से लेकर 10 की रात तक इसे रख सकती हैं।

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कालाष्टमी के शुभ मुहर्त

काल भैरव की पूजा रात के समय शुभ मानी जाी है। ऐसे में आप भी 9 बजे से 11 बजे के बीच पूजा-पाठ कर सकती हैं। 10 की रात तक आप इसे करें, ताकि आपको भी काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।

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कालाष्टमी का क्या होता है महत्व?

कालाष्टमी का पर्व भगवान शिव के रौद्र अवतार 'काल भैरव' की उपासना के लिए समर्पित है, जिसका हिंदू धर्म में अत्यंत गहरा आध्यात्मिक और तांत्रिक महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने पापियों के विनाश और धर्म की रक्षा हेतु भैरव रूप धारण किया था, इसलिए इस दिन व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से साधक के जीवन से नकारात्मक शक्तियों, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

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काल भैरव को 'काशी का कोतवाल' और समय का नियंत्रक माना जाता है, इनकी आराधना से समय के चक्र में आने वाली बाधाएं और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। नारद पुराण के अनुसार, कालाष्टमी के दिन किए जाने वाले विशेष अनुष्ठान और दीपदान से कुंडली के भारी दोष, विशेषकर राहु-केतु की पीड़ा और शनि के दुष्प्रभाव शांत होते हैं। यह दिन आत्म-अनुशासन, तंत्र साधना और इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने के लिए भी श्रेष्ठ माना गया है।

रात्रि व्यापिनी अष्टमी होने के कारण इस दिन मध्य रात्रि में भगवान भैरव की आरती और उपासना करने से भक्तों को रोग, शोक और दरिद्रता से मुक्ति मिलती है। साथ ही, इस दिन भैरव जी के वाहन कुत्ते को भोजन कराने से पितृ दोष का निवारण और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

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Image credit- Freepik/ herzindagi

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