jaya ekadashi vrat katha

Jaya Ekadashi Vrat Katha 2026: जया एकादशी के दिन पढ़ें यह व्रत कथा, मिल सकती है सभी कष्टों से मुक्ति

Jaya Ekadashi Katha 2026: जया एकादशी का व्रत हिंदू धर्म के लिए मुख्य रूप से फलदायी माना जाता है। इस दिन जो व्यक्ति नियम पूर्वक व्रत का पालन करता है और व्रत कथा का पाठ करता है या कथा का श्रवण करता है उसे सभी समस्याओं से बाहर आने का रास्ता मिलता है। आइए जानें इस व्रत कथा के बारे में यहां।
Editorial
Updated:- 2026-01-29, 11:48 IST

सनातन धर्म में किसी भी एकादशी तिथि का विशेष महत्व है और इनमें से एक प्रमुख व्रत है जया एकादशी का। यह व्रत माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है और इसे पापों के नाश और पुण्य के लिए सर्वोत्तम दिन माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति, उपवास और कथा सुनने से जीवन के सभी दुख, भय, ऋण और कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। जया एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है जो अपने जीवन में समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यही नहीं मान्यता यह भी है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है। इस दिन व्रत करने के साथ एकादशी व्रत कथा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है और इस व्रत कथा के पाठ से ही पूजा और व्रत का पूर्ण फल मिलता है। आइए जानें जाया एकादशी की व्रत कथा के बारे में यहां विस्तार से।

जया एकादशी व्रत कथा (Jaya Ekadashi Vrat Katha 2026)

एक बार की बात है स्वर्ग लोक में देवराज इंद्र पारिजात वृक्षों से सुशोभित वन में विहार कर रहे थे। अपने आप को प्रसन्न करने के लिए इंद्र ने वहां नृत्य और संगीत का आयोजन किया था। चित्रसेन नाम के एक संगीतकार अपनी अर्धांगिनी मालिनी और अपने पुत्र माल्यावन के साथ वहां संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे। उसी स्थान पर पुष्प दूध की पुत्री पुष्पावती भी उपस्थित थी तो। उसी समय ऐसा हुआ कि पुष्पवती और मूल्यवान एक दूसरे को देखते ही मोहित हो गए। वो दोनों ही एक दूसरे के रूप और सौंदर्य के प्रति इतने आकर्षित हुए कि संगीत का कार्यक्रम भी ध्यानपूर्वक प्रस्तुत नहीं कर सके। यह देख देवराज इंद्र इतने क्रोधित हुए कि उन्होंने पुष्पवती  और माल्यवान को श्राप दिया कि तुमने मेरी सेवा में बाधा डाली है मैं तुमसे बहुत ज्यादा अप्रसन्न हूं।अब तुम दोनों पिशाच योनि धारण करके पृथ्वी लोक पर अपने अपराध की सजा काटोगे। ऐसे भीषण श्राप के कारण वे दोनों अत्यंत पीड़ा उठाते हुए पृथ्वी लोक पर हिमालय में अपना दंड भुगतने लगे। उनकी विवशता कुछ ऐसी थी की वो ना तो कुछ स्पर्श कर पा रहे थे और ना ही उन्हें किसी भी प्रकार की गंध का आभास हो रहा था।

यह भी पढ़ें- Jaya Ekadashi Date 2026: 28 या 29 कब है जया एकादशी, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

jaya ekadashi vrat ki katha

हिमालय पर्वत पर सर्दी से ठिठुरते हुए बहुत ही कष्ट में वो अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। एक दिन अत्यंत दुखी होकर वे एक दूसरे से कहने लगे कि पता नहीं हमने पिछले जन्म में ऐसे कौन से कर्म किए नहीं जिनका हमें ऐसा फल मिल रहा है और हमें इतना पाप भुगतना पड़ रहा है। पता नहीं हमसे ऐसा कौन सा अपराध हुआ है ? सुना है कि नरक में बहुत ही यातनाएं भुगतनी पड़ती है किंतु जो यातनाएं हम अभी सह रहे हैं यह नरक की आत्माओं से भी कई गुना ज्यादा अधिक है। इसलिए अब हमें हर प्रकार के पाप से बच कर रहना चाहिए और इस स्थिति से जल्द से जल्द मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए। सौभाग्यवश  माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आई और उस दिन उन्होंने भोजन नहीं किया। उनके शरीर में इतनी शक्ति भी नहीं थी की वो चल पाएं  और वह एक पीपल के वृक्ष के नीचे गिर पड़े। पूरी रात उन्होंने उसी वृक्ष के नीचे बिना भोजन और पानी के काटी। अनजाने में उन्होंने एकादशी का व्रत कर लिया और  भगवान विष्णु की कृपा से द्वादशी के दिन उन्हें एकादशी व्रत का पूर्ण फल भी प्राप्त हुआ। उसके शुभ परिणाम से दोनों को पिशाच योनि से मुक्ति मिल गई और वो एक बार पुनः देव योनि प्राप्त कर सुंदर आभूषण और हर तरह के श्रृंगार से शोभित होकर स्वर्ग लोक को लौट गए।

यह भी पढ़ें- Jaya Ekadashi Daan 2026: जया एकादशी के दिन करें इन 4 चीजों का दान, भगवान विष्णु की बनी रहेगी असीम कृपा

ekadashi vrat katha

स्वर्ग में इंद्र ने पुष्पवती और माल्यवान से पूछा कि आपने ऐसे कौन से पुण्य किए जिससे आपको सभी श्रापों से मुक्ति मिल गई। दोनों ने इंद्र को बताया कि उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की पूजा और उपासना की है और साथ ही, जया एकादशी का व्रत भी पूरी श्रद्धा के साथ रखा, जिससे उन्हें पिशाच योनि से मुक्ति मिल गई। उस समय इंद्र ने कहा कि अब वो उनके लिए भी पूजनीय हो गए हैं। श्री कृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि जो व्यक्ति इस व्रत का श्रद्धा पूर्वक पालन करता है और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और कभी भी वो पिशाच योनि में नहीं जाता है।

यह भी पढ़ें- Ekadashi Vrat List 2026: जनवरी में षटतिला से दिसंबर की मोक्षदा तक, कब-कब पड़ेंगी एकादशी तिथियां; पंडित जी से जानें शुभ मुहूर्त

यह भी पढ़ें- ॐ जय जगदीश हरे..भगवान श्री विष्णु जी की आरती | Shri Vishnu ji ki Aarti

यदि आप भी जया एकादशी के दिन यहां बताई व्रत कथा का पाठ करेंगी तो आपको सभी पापों से मुक्ति मिलने के साथ उसके ऊपर भगवान विष्णु की कृपा भी बनी रहती है।
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Images: Shutterstock.com 

यह विडियो भी देखें

Herzindagi video

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।

;