
भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में धार्मिक ग्रंथों जैसे भगवद गीता, रामायण या अन्य पूजनीय पुस्तकों को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इन ग्रंथों को केवल कागज और स्याही का संग्रह नहीं बल्कि साक्षात देवी-देवताओं का स्वरूप और ज्ञान का भंडार माना जाता है। इसलिए, इन पुस्तकों के प्रति सम्मान और उचित मर्यादा बनाए रखना हर श्रद्धालु का कर्तव्य है। जब हम यात्रा करते हैं तो अक्सर हमारे मन में यह सवाल आता है कि क्या इन पवित्र पुस्तकों को अपने साथ बैग में रखना उचित है या नहीं, विशेषकर जब यात्रा लंबी हो और हमें अपनी दिनचर्या में कुछ समझौता करना पड़े। ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टिकोण से इन पुस्तकों को साथ ले जाना न केवल सही है बल्कि कई मायनों में शुभ और लाभदायक भी माना जाता है। हालांकि, किसी भी धार्मिक किताब को यात्रा के दौरान बैग में रख कर ले जाने से जुड़े नियम भी शास्त्रों में बताए गए हैं जिनका पालन आवश्यक है। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।
धार्मिक दृष्टिकोण से अपनी यात्रा के दौरान धार्मिक पुस्तक को साथ रखना आध्यात्मिक सुरक्षा कवच की तरह होता है। यह माना जाता है कि पवित्र ग्रंथ की उपस्थिति नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर रखती है और मन को शांत रखती है।

लंबी यात्राओं के दौरान जब हम अपने पूजा स्थल से दूर होते हैं तब इन पुस्तकों को पढ़ने से हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और भगवान से जुड़ाव बना रहता है। ज्योतिषीय रूप से, पवित्र ग्रंथों का संबंध देवगुरु बृहस्पति से माना जाता है।
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बृहस्पति ग्रह ज्ञान, धर्म, भाग्य और शुभता के कारक हैं। यात्रा के दौरान बृहस्पति से जुड़ी वस्तुओं, विशेष रूप से धार्मिक पुस्तकों को साथ रखने से यात्रा सफल होती है, यात्रा में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और भाग्य का साथ मिलता है।
यात्रा करते समय धार्मिक किताब को बैग में रखना पूरी तरह से सही है, लेकिन इससे जुड़े नियमों का पालन भी आवश्यक है। तभी धार्मिक पुस्तक की शुद्धता एवं पवित्रता बनी रहेगी और किसी प्रकार का दोष भी व्यक्ति को नहीं लगेगा।
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पुस्तक को हमेशा एक साफ कपड़े या एक अलग छोटे बैग में लपेट कर रखें। इसे कभी भी जूते, गंदे कपड़े या खाने-पीने की चीजों के साथ सीधे संपर्क में न रखें। यात्रा के दौरान, जब भी आप कहीं रुकते हैं तो पुस्तक को जमीन पर या बिस्तर पर न रखें।

धार्मिक पुस्तक को हमेशा किसी ऊंचे स्थान पर रखें, भले ही वह बैग के अंदर ही क्यों न हो। अगर संभव हो तो यात्रा के दौरान भी पुस्तक के कुछ श्लोकों या अंशों का नियमित पाठ अवश्य करें। यह आपकी यात्रा को शुभ और सफल बनाने में मदद करता है।
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