Wed Feb 25, 2026 | Updated 04:15 AM IST
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Holastak 2026: होली पर नए घर में क्यों नहीं करते गृह प्रवेश? जानें धार्मिक कारण

भारतीय संस्कृति में गृह प्रवेश केवल घर बदलने की प्रक्रिया नहीं होती है, बल्कि संस्कार माना जाता है। इससे नए तरह से जीवन को शुरूआत करने की प्रक्रिया होती है। होली पर ग्रह प्रवेश किया जाना चाहिए या नहीं इसके बारे में आपको आर्टिकल में बताते हैं।
Editorial
Updated:- 2026-02-24, 17:59 IST

भारतीय संस्कृति में गृह प्रवेश केवल घर बदलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक ऊर्जा-संक्रमण संस्कार माना जाता है। नया घर केवल दीवारों का ढांचा नहीं होता, बल्कि वह परिवार की जीवन यात्रा का नया केंद्र बनता है। इसलिए शास्त्रों में गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र और ग्रह स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसी कारण होली के आसपास के दिनों में सामान्यत गृह प्रवेश करने से बचने की सलाह दी जाती है। एस्ट्रोलॉजर सिद्धार्थ एस. कुमार ने विस्तृत जानकारी दी। वह NumroVani के संस्थापक एवं प्रसिद्ध वैदिक और नाड़ी ज्योतिषाचार्य हैं, उन्होंने विस्तार से इसकी जानकारी शेयर की है।

होलाष्टक काल और शुभ कार्यों की होती है मनाही

होली से आठ दिन पहले का समय होलाष्टक कहलाता है। यह काल फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से शुरू होकर होलिका दहन तक रहता है। धर्मशास्त्रों और मुहूर्त ग्रंथों में इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है। विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत जैसे संस्कार इस समय टाले जाते हैं, क्योंकि इस अवधि में ग्रहों की स्थिति अस्थिर मानी जाती है और मंगल कार्यों की स्थिरता कम हो सकती है।

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अग्नि और उथल-पुथल की प्रतीकात्मक ऊर्जा

होलिका दहन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि अग्नि संस्कार है। यह नकारात्मकता के दहन और पुरानी ऊर्जा के अंत का प्रतीक है। गृह प्रवेश में शांत, स्थिर और पोषक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जबकि होली का समय परिवर्तन, उत्साह और उथल-पुथल का संकेत देता है।

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ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की स्थिति के कारण न करें ग्रह प्रवेश

फाल्गुन पूर्णिमा के आसपास चंद्रमा की तीव्र ऊर्जा सक्रिय होती है। कई बार सूर्य मीन राशि में और शनि, राहु या अन्य ग्रह भी संवेदनशील स्थिति में होते हैं। यह समय मानसिक और भावनात्मक उथल-पुथल का संकेत देता है। गृह प्रवेश में चंद्रमा की स्थिरता, शुभ नक्षत्र और अनुकूल लग्न को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए होली के तुरंत आसपास का समय सामान्यत टाला जाता है।

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परंपराएं केवल अंधविश्वास नहीं होतीं, वे अनुभव आधारित सामाजिक ज्ञान का रूप होती हैं। पुराने समय में होली के बाद सफाई, मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य होता था। लोग पहले घर की शुद्धि करते थे, फिर नए कार्य शुरू करते थे। इसलिए होली के बाद का समय नई शुरुआत के लिए अधिक शुभ माना गया। आप भी होली के बाद ग्रह प्रवेश का शुभ कार्य कर सकती हैं, ताकि आपके लिए आने वाले समय अनुकूल रहे।

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Image credit- Freepik

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