Tue Mar 3, 2026 | Updated 03:32 PM IST
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Ganga Aarti Time on Chandra Grahan 2026: सालों बाद चंद्र ग्रहण पर बदला गंगा आरती का समय, जानें इससे पहले कब-कब हुआ ऐसा?

फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण के कारण काशी में गंगा आरती और मंदिरों के समय में बदलाव हुआ है। दशाश्वमेध घाट पर आरती अब शाम 6:15 बजे की बजाय रात 7:30 बजे होगी। 
Editorial
Updated:- 2026-03-03, 12:44 IST

फाल्गुन पूर्णिमा के खास मौके पर इस साल एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना घटने जा रही है। मंगलवार के दिन पड़ने वाले चंद्रग्रहण के कारण काशी सहित देश के की हिस्सों में मंदिरों की व्यवस्था में खास बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में खगोलीय घटना के प्रभाव और गंगा आरती के समय में हुए बदलाव के बाद लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि इससे पहले कब -कब गंगा आरती का समय बदल रहा है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि गंगा आरती का समय कब-कब बदला है। पढ़ते हैं आगे...

चंद्रग्रहण और मंदिरों की परंपरा क्या है?

सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान सूतक लगने के कारण भगवान को छूना और पूजन वर्जित माना जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण के प्रभाव को देखते हुए सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।

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यह नियम ग्रहण के शुरुआत से लेकर उसकी समाप्ति रहेगा। बता दें कि ग्रहण के समाप्त होने के बाद ही मंदिरों को पवित्र की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें पूरे मंदिर परिसर की सफाई, मूर्तियों का पवित्र नदियों के जल से नहाना और खास आरती शामिल है। इन सभी खास कामों के पूर्ण होने के बाद ही आम श्रद्धालुओं को दर्शन और पूजन की इजाजत दी जाएगी।

गंगा आरती के समय में बदलाव

वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर होने वाली मां गंगा की आरती अपनी दिव्यता के लिए जानी जाती है। चंद्रग्रहण की स्थिति ने इस बार आरती के समय को हिला दिया है। गंगा सेवा निधि के अनुसार, पिछले 35 वर्षों के इतिहास में यह केवल छठा अवसर है जब आरती के तय समय में इस तरह का फेरबदल करना पड़ा है।

आमतौर पर शाम 6:15 बजे होने वाली इस भव्य आरती को ग्रहण के कारण देरी से किया गया है। अब यह आरती ग्रहण के खत्म के बाद रात्रि 7:30 बजे आयोजित की जाएगी। ग्रहण काल के दौरान खुली जगह पर पूजा-पाठ करना शुभ नहीं माना जाता, इसी कारण यह निर्णय लिया गया है।

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समय परिवर्तन की यह घटना कोई पहली बार नहीं हो रही है, लेकिन इसका बार-बार होना दुर्लभ माना जाता है। यदि हम पिछले कुछ वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो पता चलता है कि ग्रहण ने बार-बार गंगा आरती की समय को बदलवाया है।

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2025 में यानि पिछले साल 7 सितंबर को ग्रहण के कारण आरती दोपहर 12 बजे ही कर दी गई थी। इसके अलावा 2017, 2018, 2019 और 2023 में भी चंद्रग्रहण की वजह से आरती का समय बदलना पड़ा था। 

साल तिथि समय में बदलाव का कारण
2025 7 सितंबर  ग्रहण के कारण
2023 28 अक्टूबर  ग्रहण के कारण
2019 16 जुलाई  ग्रहण के कारण
2018 27 जुलाई  ग्रहण के कारण
2017 7 अगस्त  ग्रहण के कारण

 

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Images: Freepik/shutterstock

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