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Kanya Pujan Muhurat 2026: 26 मार्च को है 'दुर्गा अष्‍टमी', इन शुभ मुहूर्तों पर करें कन्‍या पूजन; सही विधि से करेंगी तो साक्षात मां शारदा का मिलेगा आशीर्वाद

कन्‍या पूजन मुहूर्त 2026 जानें—26 मार्च दुर्गा अष्टमी और 27 मार्च नवमी पर सही समय, विधि और महत्व। जानिए कंजक पूजन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और लाभ। मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए पढ़ें कन्‍या पूजन के जरूरी नियम और सही तरीका।
Editorial
Updated:- 2026-03-25, 19:20 IST

चैत्र नवरात्रि अपने आखिरी चरण में पहुंच चुकी है। 26 को दुर्गा अष्‍टमी है और इस दिन का हिंदू परिवारों में बहुत अधिक महत्‍व है। खासतौर पर जो महिलाएं नवरात्रि का व्रत रखती हैं, वह अष्‍टमी के दिन घर में कंजक बैठाती हैं और कन्‍या पूजन करती हैं। ऐसी मान्‍यता है कि नवरात्रि के व्रत का उद्यापन करने के लिए घर पर कंजक बैठाना और कन्‍या पूजन करना अति महत्‍वपूण होता है।

कुछ लोग यह काम अष्‍टमी के दिन करते हैं, तो कुछ नवमी के दिन। 26 मार्च को अष्‍टमी है और इस दिन कई घरों में कन्‍या पूजन किया जाएगा। इस बारे में हमने पंडित सौरभ त्रिपाठी से बात की। वह कहते हैं, '3 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्‍याओं के पैरों की पूजा करना और उन्‍हें भोजन करना बहुत शुभ होता है। मान्‍यता है कि उम्र की बच्चियां देवी का ही स्‍वरूप होती हैं। ऐसे में नवरात्र‍ि अष्‍टमी और नवमी के दिन आपको यह काम जरूर करना चाहिए।'

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कन्‍या पूजन का शुभ मुहूर्त

वैसे तो 26 मार्च और 27 मार्च को पूरे दिन ही आप कन्‍याओं को भोजन करा सकते हैं, मगर जिन लोगों ने नौ दिन के व्रत रखे हैं उन लोगों को इसका उद्यापन करने के लिए घर में कन्‍या पूजन जरूर करना चाहिए। ऐसा करने के लिए 26 और 27 को अलग-अलग मुहूर्त बताए गए हैं।

26 मार्च 2026 को चैत्र नवारात्रि की अष्‍टमी के दिन सुबह 11 बजकर 48 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 16 मिनट तक आप कन्‍या पूजन कर सकती हैं।

सबसे शुभ समय की बात की जाए तो 26 मार्च को सुबह 6 बजकर 15 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 50 मिनट तक आप घर में कन्‍या पूजन और कंजक को भोजन करा सकती हैं।

वहीं अगर आप 27 मार्च को नवमी के दिन आप सुबह 6 बजकर 10 मिन से लेकर शाम 4 बजकर 19 मिनट तक कन्‍या भोज और कन्‍या पूजन किया जा सकता है।

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कन्‍या पूजन की विधि

  • कन्‍या पूजन की विधि भी बहुत सरल लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस दिन सबसे पहले घर को साफ-सुथरा करके एक पवित्र वातावरण तैयार किया जाता है। इसके बाद छोटी-छोटी कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाया जाता है और उन्हें एक स्थान पर बैठाया जाता है। सबसे पहले उनके चरण धोए जाते हैं, फिर उनके माथे पर रोली और चावल से तिलक लगाया जाता है। इसके बाद उन्हें चुनरी या रूमाल ओढ़ाया जाता है और श्रद्धा के साथ भोजन कराया जाता है।
  • भोजन में आमतौर पर पूरी, चना और हलवा बनाया जाता है, जिसे कन्‍याओं को परोसा जाता है। भोजन के बाद उन्हें दक्षिणा, उपहार और मिठाई देकर विदा किया जाता है। कई जगहों पर एक छोटे बालक को भी 'लंगूर' के रूप में शामिल किया जाता है, जिसे भी भोजन कराया जाता है।
  • कन्‍या पूजन के दौरान सबसे जरूरी बात यह है कि इसे पूरी श्रद्धा, सम्मान और सच्चे मन से किया जाए। केवल परंपरा निभाने के लिए नहीं, बल्कि मां दुर्गा के प्रति आस्था और भक्ति के भाव से यह पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से न केवल व्रत का पूर्ण फल मिलता है, बल्कि घर में सुख, शांति और समृद्धि भी बनी रहती है।

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अगर आप भी इस बार नवरात्रि का व्रत रख रही हैं, तो अष्टमी या नवमी के दिन कन्‍या पूजन जरूर करें। सही मुहूर्त और विधि के साथ किया गया यह पूजन आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाएगा और मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद भी दिलाएगा। यदि आपको ऊपर दी गई जानकारी पसंद आई हो तो इस लेख को शेयर और लाइक करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्‍स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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