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Bhadrapad Pradosh Vrat 2024 Kab Hai: भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत कब है, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान शिव की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। आइए इस लेख में जानते हैं कि भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत कब है, शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है। 
Editorial
Updated:- 2024-08-27, 23:00 IST

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बेहद शुभ फलदायी माना गया है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है। वहीं हर माह में कुल दो बार प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव के नटराज स्वरूप की पूजा की जाती है। इसलिए इस प्रदोष व्रत कहा जाता है। वहीं प्रदोष काल में पूजा संध्या के समय करने का विधान है। प्रदोष व्रत के लिए ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति भगवान शिव और माता पार्वती की सच्चे मन से पूजा-पाठ करता है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। साथ ही सुख-समृद्धि और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है। अब ऐसे में इस साल प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा। शुभ मुहूर्त क्या है और महत्व क्या है। इसके बारे में ज्योतिषाचार्य पंडित अरविंद त्रिपाठी से विस्तार से जानते हैं। 

भाद्रपद माह का पहला प्रदोष कब है? 

Pradosh vrat

भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा। इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान शिव की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना कर सकते हैं। 

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त कब है?

पंचांग के हिसाब से भाद्रपद माह की तिथि का आरंभ 31 अगस्त को रात 02 बजकर 25 मिनट से हो रहा है और इसका समापन अगले दिन 01 सितंबर को रात 03 बजकर 40 मिनट पर होगा। 

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प्रदोष व्रत के दिन पूजा का मुहूर्त कब है?

प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के लिए शाम 06 बजकर 43 मिनट से मुहूर्त आरंभ हो रहा है। जो रात 08 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप पूजा-पाठ कर सकते हैं। 

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प्रदोष व्रत का महत्व क्या है? 

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यह व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक शक्तिशाली साधन माना जाता है। भगवान शिव की कृपा से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। प्रदोष व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद होता है जो धन, स्वास्थ्य, संतान की कामना करते हैं। प्रदोष व्रत करने से पिछले जन्मों के किए गए पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की कृपा भी बनी रहती है। 

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Image Credit- HerZindagi

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