
बसंत पंचमी का दिन माता सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में तो मनाया ही जाता है और ज्योतिष के अनुसार भी इस दिन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन स्नान-दान करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। इसी वजह से प्रयागराज के मांग मेले में भी बसंत पंचमी के दिन चौथा शाही स्नान होगा। इस दौरान लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं और कई कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। बसंत पंचमी के पावन दिन में माघ मेले में स्नान का भी दिन रहेगा। अगर आप भी माघ मेले में जा रहे हैं या फिर घर पर ही स्नान करना चाहती हैं तो इसके लिए शुभ मुहूर्त की जानकारी होनी चाहिए। जिससे आप उसी मुहूर्त में स्नान करें और उसके बाद दान का भी पुण्य पा सकती हैं। बसंत पंचमी के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है और ब्रह्म मुहूर्त में किया गया स्नान शुभ होता है। यदि आप किसी पवित्र नदी में स्नान करें तो कई गुना फल मिलते हैं, लेकिन यदि आप घर पर ही स्नान कर रही हैं तो नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान करें। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें कि इस दिन स्नान का शुभ मुहूर्त क्या है और इसका महत्व क्या है।
माघ मेले में बसंत पंचमी का स्नान चौथा और अत्यंत महत्वपूर्ण शाही स्नान माना जाता है। इससे पहले पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या पर प्रमुख शाही स्नान संपन्न हो चुके हैं। बसंत पंचमी के दिन साधु-संत, अखाड़े और श्रद्धालु बड़ी संख्या में संगम में पवित्र डुबकी लगाते हैं। उसके बार ग्रहस्त लोग भी संगम में डुबकी लगाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति दिलाता है और विद्या, बुद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यदि आप बसंत पंचमी के दिन संगम में स्नान करती हैं तो इसके लाभ मिलते हैं।

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बसंत पंचमी के दिन संगम में स्नान को करने को अमृत स्नान माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि इससे पापों का नाश होता है और मानसिक शांति के साथ ज्ञान की प्राप्ति भी होती है। इस बार बसंत पंचमी पर गजकेसरी योग और श्री योग बन रहे हैं, जो इसे और ज्यादा विशेष बनाते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह दिन विद्या, बुद्धि, ऐश्वर्य और भक्ति प्रदान करने वाला है ऐसे में पूरे दिन स्नान और दान का शुभ योग रहेगा।

गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर जप, तप और प्रार्थनाओं की लहरें हर दिशा में हिलोरे ले रही हैं। श्रद्धालुओं के लिए माघ मेले का यह वातावरण किसी अलौकिक अनुभूति से कम नहीं होता है। चारों ओर मंत्रोच्चार, साधना और भक्ति का संगम देखने को मिल रहा है। इसी दौरान अखाड़ों का शाही स्नान भी बहुत शुभ है और बसंत पंचमी के दिन चौथा स्नान है जो अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इस दौरान माघ मेले में पहुंचे साधु-संतों और अखाड़ों के भी अपने अलग-अलग रंग हैं। कोई कठिन तपस्या से लोगों को चकित कर रहा है, तो कोई अपने अनोखे अंदाज से श्रद्धालुओं का मन मोह रहा है। ऐसे में बसंत पंचमी का शाही स्नान कुछ विशेष हो सकता है।
अगर आप भी बसंत पंचमी के दिन संगम में स्नान करें तो आपको इसके लाभ भविष्य में मिल सकते हैं। यदि आप किसी पवित्र नदी में स्नान के लिए नहीं जा रही हैं तो घर पर ही शुभ मुहूर्त में स्नान करना फलदायी होगा।
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