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Amalaki Ekadashi Vrat Katha 2026: भगवान विष्णु का बना रहेगा आपके ऊपर आशीर्वाद, जानें पूरी पौराणिक कथा

Amalaki Ekadashi Vrat Katha 2026: आमलकी एकादशी का रख रही हैं व्रत तो इसे पूरा करने के लिए आप व्रत कथा को शाम के समय जरूर पढ़ें। इससे आपको भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलेगा। साथ ही आपके कार्य होते नजर आएंगे।
Editorial
Updated:- 2026-02-26, 11:31 IST

हिंदू धर्म में हर तिथि का एक अलग महत्व होता है। इसलिए पूजा करने का तरीका और व्रत भी अलग होता है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आमलकी एकादशी कहते हैं। इस दिन कई सारे लोग व्रत रखते हैं, ताकि अपने पापों से मुक्ति पा सके और विष्णु लोक की प्राप्ति कर सके। इस दिन कई सारे लोग भगवान को रंग भी अर्पित करते हैं, ताकि ये दिन और खास हो जाए। आप अगर आमलकी एकादशी का व्रत रख रही हैं, तो इस दिन व्रत कथा जरूर पढ़ें, ताकि आपके ऊपर भगवान विष्णु का आशीर्वाद बना रहे।

आमलकी एकादशी व्रत कथा (Amalaki Ekadashi Vrat Katha 2026)

प्राचीन काल में वैदिश नाम का एक नगर था, जहां ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चारों वर्ण के लोग रहते थे। ये सभी सुख शांति के साथ इस जगह पर अपना जीवन बिताते थे। उस नगर के राजा का नाम चित्रसेन था। राजा चित्रसेन अत्यंत धार्मिक और दानी थे। उनके राज्य में कोई भी व्यक्ति दरिद्र या पापी नहीं था। पूरी प्रजा भगवान विष्णु की भक्त थी और सभी एकादशी का व्रत रखती थी। एक बार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी आई। इस दिन राजा और उनकी प्रजा ने एकादशी के व्रत को पूरी विधि-विधान के साथ रखा और मंदिर में जाकर आंवले के पेड़ की पूजा की। साथ ही एक नए वृक्ष की स्थापना की। इससे भगवान विष्णु उनसे काफी प्रसन्न हुए और उनकी प्रार्थना को स्वीकार किया।

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राजा और उनकी प्रजा हर एकादशी के दिन रात्रि में जागरण करने के लिए मंदिर जाती थी। ऐसे ही एक दिन एक भूखा-प्यासा शिकारी भोजन की तलाश में मंदिर के पास से गुजर रहा था। उसे मंदिर से भजन-कीर्तन की आवज आई। साथ ही उसे दीपक जलते हुए नजर आए। वो इन सभी चीजों को देखकर चकित रह गया। वह छिपक एक कोने में बैठ गया और स्तुति को सुनने लगा। भूख से व्याकुल होने के बावजूद वह पूरी रात जागता रहा और अनजाने में ही उसने आमलकी एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण कर लिया। सुबह होने पर राजा अपनी प्रजा के साथ महल लौट गए और वह शिकारी भी अपने घर चला गया। कुछ समय बाद उस शिकारी की मृत्यु हो गई। अनजाने में किए गए आमलकी एकादशी के व्रत के पुण्य प्रताप से उसका अगला जन्म एक राजा के घर में हुआ। उसका नाम वसुरथ रखा गया। वह अत्यंत बलवान, धार्मिक और सत्यवादी राजा बना। उसके पास हजारों हाथी, घोड़े और अपार धन-संपत्ति थी।

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राजा वसुरथ को अपने पूर्व जन्म का आभास हुआ और वे भगवान विष्णु के परम भक्त बन गए, इसलिए जो व्यक्ति इस कथा को पढ़ता या सुनता है, उसे एक हजार गौदान के बराबर फल मिलता है। आमलकी एकादशी का व्रत मनुष्य के जीवन से दरिद्रता दूर करता है और उसे मोक्ष की ओर ले जाता है।

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व्रत से जुड़ी मुख्य बातें

  • इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
  • भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी और महादेव की भी कृपा प्राप्त होती है।
  • व्रत के दौरान फलाहार में आंवले का सेवन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

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Image credit-Freepik/ herzindagi

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