
हर नए महीने के शुरू होने से पहले हम आपको उस माह के सभी महत्वपूर्ण तीज-त्योहार के बारे में बताते हैं। खासतौर पर शिव भक्तों के लिए प्रदोष व्रत का महत्व कुछ ज्यादा ही होता है। आमतौर पर महीने में 2 बार प्रदोष व्रत आते हैं, मगर मार्च में 3 बार प्रदोष व्रत आएंगे।
भगवान शिव को समर्पित यह व्रत कृष्ण और शुक्ल पक्ष में अलग-अलग तिथियों में मनाए जाते हैं। इस माह त्रयोदशी तिथि 3 बार आएंगी। मध्यप्रदेश, उज्जैन की पंडित एंव ज्योतिषाचार्य मनीष त्रिपाठी से इस विषय पर बात की। वह कहते हैं, "जब किसी महीने में त्रयोदशी तिथि तीन बार आती है, तो वह आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी मानी जाती है और शिव उपासना के लिए विशेष अवसर प्रदान करती है।"
मार्च महीने का पहला प्रदोष व्रत 1 मार्च को रखा जाएगा। यह व्रत मास की शुरुआत में ही आ रहा है, इसलिए इसे बहुत शुभ माना जा रहा है। इस दिन भक्त प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें। संध्या के समय दीपक जलाकर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करना अत्यंत लाभकारी रहेगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त- 28 फरवरी को सुबह 8 बजकर 43 मिनट पर त्रयोदिशी तिथि लग जाएगी और यह 1 मार्च को शाम 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। ऐसे में 1 मार्च को प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।

महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 16 मार्च को पड़ेगा। यह तिथि भी शिव आराधना के लिए उत्तम मानी जा रही है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करना शुभ फल देता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त- 16 मार्च को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर त्रयोदिशी तिथि शुरू होगी और 17 मार्च की सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक यह तिथि बनी रहेगी ऐसे में पूजा के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त 16 मार्च को शाम 6 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 8 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।
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मार्च का तीसरा और अंतिम प्रदोष व्रत 30 मार्च को मनाया जाएगा। एक ही महीने में तीन बार प्रदोष व्रत आना दुर्लभ योग है, इसलिए इस दिन विशेष पूजा और ध्यान करना और भी अधिक फलदायी रहेगा। जो लोग लंबे समय से किसी समस्या से परेशान हैं, वे इस दिन सच्चे मन से शिव उपासना करें।
पूजा का शुभ मुहूर्त- 30 मार्च को सुबह 7 बजकर 8 मिनट पर प्रदोष व्रत शुरू होगा और 31 मार्च सूबह 6 बजकर 56 मिनट पर व्रत का समापन होगा। पूजा के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त 30 मार्च को शाम 6 बजकर 38 मिनट से लेकर 8 बजकर 57 मिनट तक है।

मार्च 2026 शिव भक्तों के लिए आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि आप नियमित रूप से प्रदोष व्रत रखते हैं या इस बार शुरुआत करना चाहते हैं, तो यह महीना आपके लिए श्रेष्ठ अवसर लेकर आया है। उचित तिथि और प्रदोष काल में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करें।
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