
आज गुरुवार, 22 जनवरी 2026 का दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश और देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने का दिन है। आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे विनायक चतुर्थी, तिल कुंड चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, माघ शुक्ल चतुर्थी को ही भगवान गणेश का जन्म हुआ था, इसलिए आज का दिन गणेश जी की साधना के लिए वर्ष के सबसे शक्तिशाली दिनों में से एक है। आज शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जो सौ वैद्यों के समान रोग नाशक शक्ति रखता है। इस समय पंचक चल रहा है और शतभिषा नक्षत्र भी पंचक का ही हिस्सा है इसलिए शुभ कार्यों में सावधानी बरतें। गुरुवार और गणेश चतुर्थी का यह संयोग ज्ञान और बुद्धिका अद्भुत मिलन है। आइए जानते हैं मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज का पंचांग और उपाय।
| तिथि | नक्षत्र | दिन/वार | योग | करण |
| माघ शुक्ल चतुर्थी (रात्रि 02:30 बजे तक) | शतभिषा | गुरुवार | वरीयान | वणिज |

| प्रहर | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06 बजकर 56 मिनट पर होगा। |
| सूर्यास्त | शाम 05 बजकर 57 मिनट पर होगा। |
| चंद्रोदय | सुबह 09 बजकर 18 मिनट पर होगा। |
| चंद्रास्त | रात्रि 09 बजकर 25 मिनट पर होगा। |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 05 बजकर 20 मिनट से 06 बजकर 08 मिनट तक |
| अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक |
| गोधुली मुहूर्त | शाम 05 बजकर 55 मिनट से 06 बजकर 22 मिनट तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 09 मिनट तक |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| राहु काल | दोपहर 01 बजकर 48 मिनट से 03 बजकर 11 मिनट तक |
| यमगंड | सुबह 06 बजकर 56 मिनट से 08 बजकर 19 मिनट तक |
| गुलिक काल | सुबह 09 बजकर 42 मिनट से 11 बजकर 05 मिनट तक |

विनायक चतुर्थी माघ मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को तिल कुंड चतुर्थी भी कहते हैं। आज के दिन गणेश जी को तिल और गुड़ के लड्डू का भोग लगाने से घर से दरिद्रता और संकट हमेशा के लिए चले जाते हैं। यह दिन संतान की लंबी आयु और यश के लिए व्रत रखने का है। आज शतभिषा नक्षत्र इस नक्षत्र के स्वामी राहु हैं और देवता वरुण हैं। शतभिषा का अर्थ है सौ चिकित्सक। अगर आप किसी लंबी बीमारी से परेशान हैं, तो आज के दिन शुरू किया गया इलाज या दवा बहुत जल्दी असर करती है। पंचक और गुरुवार का संयोग पंचक में लकड़ी और दक्षिण दिशा की यात्रा वर्जित है, लेकिन गुरुवार होने के कारण धार्मिक कार्यों, शिक्षा और पीली वस्तुओं की खरीदारी के लिए यह दिन शुभ है।
ज्योतिष शास्त्र में गुरुवार और शतभिषा नक्षत्र का मिलन एक अत्यंत रहस्यमय और शक्तिशाली संयोग माना जाता है। यह संयोग उपचार और गुप्त ज्ञान के लिए में सबसे प्रबल माना गया है। गुरुवार के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं जो ज्ञान और विस्तार के कारक हैं। वहीं, शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं और इसके देवता वरुण जो जल के देवता हैं। यह कुंभ राशि में आता है। जब ज्ञान और रहस्य मिलते हैं आज के दिन नई दवा शुरू करना, डॉक्टर बदलना या किसी थेरेपी की शुरुआत करना शुभ परिणाम देता है। राहु का प्रभाव होने के कारण होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाएं इस नक्षत्र में बहुत जल्दी असर करती हैं। यह दिन वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, ज्योतिषियों और जासूसों के लिए भी अद्भुत अवसर होता है। अगर आप किसी विषय की गहराई में जाना चाहते हैं या कोई रहस्य सुलझाना चाहते हैं, तो गुरुवार और शतभिषा का दिन आपकी बुद्धि को शार्प बना देता है।
आज गणेश जी को 21 दूर्वा चढ़ाएं और तिल के 11 लड्डू भोग लगाएं। इसमें से 5 लड्डू खुद खाएं और बाकी बांट दें। यह उपाय रुके हुए कार्यों को गति देता है। आज भगवान विष्णु को बेसन के लड्डू या पीले फूल अर्पित करें। माथे पर केसर का तिलक लगाने से गुरु ग्रह बलवान होता है और मान-सम्मान मिलता है। आज शतभिषा नक्षत्र है, इसलिए किसी मरीज को फल या दवाई का दान करें। ॐ गं गणपतये नमः का 108 बार जाप करें। आज के दिन गणेश जी को पेन अर्पित करें और फिर उससे परीक्षा लिखें, सफलता निश्चित मिलेगी।
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