
आज शनिवार, 17 जनवरी 2026 का दिन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है आज माघ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी है, जिसे मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। आज शनिवार है, इसलिए यह शिवरात्रि शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैया से मुक्ति पाने के लिए काफी अच्छा दिन है बुध और शुक्र की युति से आज लक्ष्मी-नारायण योग का निर्माण हो रहा है, जो आर्थिक उन्नति के लिए बहुत शुभ माना जाता है। सुबह के समय भद्रा विष्टि करण का साया रहेगा और मूल नक्षत्र भी सुबह तक प्रभावी है, इसलिए दिन की शुरुआत संयम से करें। आइए जानते हैं मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज का विस्तृत पंचांग, पूजन मुहूर्त और विशेष उपाय।
| तिथि | नक्षत्र | दिन/वार | योग | करण |
| चतुर्दशी (रात्रि 12:06 बजे तक) | मूल | शनिवार | व्याघात | विष्टि |

| प्रहर | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06 बजकर 53 मिनट पर होगा। |
| सूर्यास्त | शाम 05 बजकर 46 मिनट पर होगा। |
| चंद्रोदय | रात्रि 06 बजकर 33 मिनट पर होगा। |
| चंद्रास्त | दोपहर 04 बजकर 22 मिनट पर होगा। |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | (सूर्य पूजन का शुभ समय) सुबह 05 बजकर 20 मिनट से 06 बजकर 08 मिनट तक |
| अभिजीत मुहूर्त | (सूर्य पूजन का शुभ समय) सुबह 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02 बजकर 23 मिनट से 03 बजकर 06 मिनट तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 05 बजकर 51 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट तक |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| राहु काल | सुबह 09 बजकर 40 मिनट से 11 बजकर 02 मिनट तक |
| यमगंड | दोपहर 01 बजकर 47 मिनट से 03 बजकर 09 मिनट तक |
| गुलिक काल | सुबह 06 बजकर 53 मिनट से 08 बजकर 15 मिनट तक |

मासिक शिवरात्रि और लक्ष्मी-नारायण योग का आज अद्भुत संयोग है। मासिक शिवरात्रि हर महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस रात भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। शनिवार शिवरात्रि का योग उन लोगों के लिए वरदान है जो शनि की साढ़ेसाती या किसी गंभीर बीमारी से परेशान हैं। शिव जी शनि देव के गुरु हैं, इसलिए आज शिव पूजा करने से शनि देव स्वत प्रसन्न हो जाते हैं। आज लक्ष्मी-नारायण योग आज बुध के राशि परिवर्तन से मकर राशि में बुध और शुक्र का मिलन हो रहा है। यह योग व्यापार और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों को अचानक धन लाभ दे सकता है। सुबह के समय यात्रा करने से बचें और वाद-विवाद न करें।
मासिक शिवरात्रि और शनिवार का एक साथ होना ज्योतिष और अध्यात्म की दृष्टि से एक अत्यंत शक्तिशाली और दुर्लभ संयोग माना जाता है। मासिक शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे प्रिय तिथि है शनिवार न्याय के देवता शनि देव का दिन है। शास्त्रों के अनुसार, शनि देव भगवान शिव के परम भक्त और शिष्य हैं। उन्होंने काशी में घोर तपस्या करके ही भगवान शिव से ग्रहों में न्यायाधीश का पद प्राप्त किया था। जब शिवरात्रि शनिवार के दिन पड़ती है। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि जो व्यक्ति शनिवार के दिन पड़ने वाली शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करता है शनि देव उसे कभी भी कष्ट नहीं देते। जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैया या महादशा चल रही है, उनके लिए आज का दिन किसी वरदान से कम नहीं है।
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