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आज बुधवार, 11 मार्च 2026 का दिन बहुत ही पवित्र और खास है। आज के दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की पूजा के साथ-साथ, बीमारियों और संकटों से रक्षा करने वाली माता शीतला का बहुत बड़ा त्योहार शीतला अष्टमी है जिसे आम भाषा में बसौड़ा भी कहा जाता है हिंदू पंचांग के अनुसार, आज पवित्र चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि अगले दिन सुबह 04:22 बजे तक रहेगी। आज रात 10:00 बजे तक ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा और उसके बाद मूल नक्षत्र लग जाएगा। इसके साथ ही, आज सुबह 09:10 बजे तक वज्र योग रहेगा, जिसके बाद हर काम में सफलता देने वाला सिद्धि योग शुरू हो जाएगा। बसौड़ा का यह त्योहार हमें सिखाता है कि बदलते मौसम में अपने शरीर को बीमारियों से कैसे बचाना है। आइए, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज के इस खास पंचांग की पूरी जानकारी, शुभ-अशुभ समय और जीवन की हर परेशानी को दूर करने के बेहद आसान और घरेलू उपाय विस्तार से जानते हैं।
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| तिथि | नक्षत्र | दिन/वार | योग | करण |
| अष्टमी (अगले दिन सुबह 04:22 बजे तक) ज्येष्ठा | ज्येष्ठा | बुधवार | वज्र | बालव |
| प्रहर | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06 बजकर 23 मिनट पर होगा |
| सूर्यास्त | शाम 06 बजकर 17 मिनट पर होगा |
| चंद्रोदय | रात 01 बजकर 26 मिनट पर होगा |
| चंद्रास्त | सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर होगा |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | (सूर्य पूजन का शुभ समय) सुबह 04 बजकर 43 मिनट से 05 बजकर 31 मिनट तक |
| अभिजीत मुहूर्त | (सूर्य पूजन का शुभ समय) आज नहीं है |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 06 बजकर 34 मिनट से 06 बजकर 56 मिनट तक। |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| राहु काल | दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से 01 बजकर 58 मिनट तक |
| यमगंड | सुबह 07 बजकर 50 मिनट से 09 बजकर 22 मिनट तक |
| गुलिक काल | सुबह 10 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक |
बुधवार को राहु काल दोपहर के समय होता है। इस दौरान किसी भी तरह की नई खरीदारी, जरूरी यात्रा की शुरुआत, या बड़े पैसों के लेन-देन से पूरी तरह बचना चाहिए
शीतला अष्टमी जिसे कई स्थानों पर बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू परंपरा में एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से माता शीतला की पूजा को समर्पित होता है। मान्यता है कि माता शीतला स्वास्थ्य, स्वच्छता और रोगों से रक्षा की प्रतीक मानी जाती हैं। विशेष रूप से पुराने समय में जब चेचक और अन्य संक्रामक रोगों का भय अधिक होता था, तब माता शीतला की आराधना को रोगों से सुरक्षा और परिवार की कुशलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था। यह पर्व आमतौर पर होली के बाद आने वाली अष्टमी तिथि को मनाया जाता है और भारत के कई क्षेत्रों में इसे बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाने की परंपरा है। इस दिन पूजा की एक विशेष परंपरा यह है कि घर में एक दिन पहले ही भोजन बना लिया जाता है और अष्टमी के दिन चूल्हा या गैस नहीं जलाया जाता।
इसलिए इस पर्व को बसौड़ा भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है बासी या पहले से बना हुआ भोजन। इस परंपरा के पीछे यह मान्यता जुड़ी हुई है कि माता शीतला को ठंडा भोजन प्रिय माना जाता है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए उसी भोजन का भोग लगाया जाता है। लोग सुबह स्नान करके माता शीतला के मंदिर में जाते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
बुधवार के दिन ज्येष्ठा नक्षत्र और वज्र योग का संयोग ज्योतिषीय दृष्टि से एक मिश्रित प्रभाव देने वाला माना जाता है। बुधवार बुद्धि, वाणी, व्यापार और निर्णय क्षमता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन व्यक्ति की सोच, तर्क शक्ति और संवाद क्षमता अधिक सक्रिय रहती है। जब इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव होता है तो व्यक्ति के भीतर नेतृत्व की भावना, आत्मसम्मान और अपने कार्यों को लेकर गंभीरता बढ़ सकती है। ज्येष्ठा नक्षत्र को अनुभव, अधिकार और जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ माना जाता है, इसलिए इस समय कई लोगों के सामने ऐसे कार्य आ सकते हैं जिनमें धैर्य और समझदारी से निर्णय लेना आवश्यक हो सकता है।

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