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Holashtak Date 2026: कल से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक, जानें महत्व और इन 8 दिनों के जरूरी नियम

Holashtak Kab Hai 2026: होली से पहले आने वाले आठ दिन होलाष्टक के नाम से जाने जाते हैं, जिन्हें ज्योतिष की दृष्टि से विशेष माना जाता है। इस साल होलाष्टक की अवधि कब से शुरू होकर कब समाप्त होगी, इस अवधि का महत्व क्या है और इस दौरान आपको किन नियमों का पालन करना चाहिए इसके बारे में विस्तार से यहां जानकारी लें।
Editorial
Updated:- 2026-02-23, 18:54 IST

होली का पर्व पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। यह रंगों का त्योहार होने के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संकेत भी देता है। हिंदू पंचांग के अनुसार होली से पहले आने वाले आठ दिनों को होलाष्टक का समय माना जाता है और इस अवधि में कुछ विशेष कार्यों को करने की मनाही होती है। ऐसा माना जाता है कि धार्मिक दृष्टि से यह अवधि अत्यंत महत्वपूर्ण है। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक का समय विशेष रूप से पूजा-पाठ, साधना, संयम और भक्ति का प्रतीक होता है। इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है, जिससे घर में सकारात्मक प्रभाव बने रहते हैं। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें कि इस साल होलाष्टक की सही तिथि क्या है? इस दौरान आपको आपको कौन से नियमों का पालन करना चाहिए और इसका अवधि का महत्व क्या है?

कब है होलाष्टक? (Holashtak Kab Hai 2026)

  • हिंदू पंचांग के अनुसार होलाष्टक की शुरुआत हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को होती है।
  • इस साल होलाष्टक की शुरुआत- 24 फरवरी, मंगलवार प्रातः 7 बजकर 2 मिनट से।
  • होलाष्टक का समापन- 2 मार्च, मंगलवार होलिका दहन के दिन।
  • होलाष्टक की अवधि अष्टमी से पूर्णिमा तक की मानी जाती है।

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holashtak ki katha

होलाष्टक की कथा क्या है? (Holashtak Katha 2026)

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार होलाष्टक का संबंध प्रहलाद और राजा हिरण्यकश्यप की कथा से है। ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन से ठीक आठ दिन पहले तक राजा हिरण्यकश्यप ने भगवान श्री विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को अत्यंत कठोर यातनाएं दी थीं और यही वो अवधि थी जब प्रहलाद को कष्ट में देखकर भगवान विष्णु भी अत्यंत दुःख में थे।

इसके बाद जब होलिका दहन के दिन होलिका प्रह्लाद को अग्नि में लेकर बैठीं उस समय होलिका अग्नि में जल गईं, लेकिन विष्णु भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकल आए। प्रह्लाद के कष्ट भरे दिनों को आज भी होलाष्टक के रूप में मनाया जाता है और ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं करने चाहिए। हालांकि इस दौरान पूजा-पाठ करने से दोगुना फल मिलते हैं। सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार आज भी होलाष्टक क आठ दिनों को नकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ माना जाता है और शुभ काम कारण से मना किया जाता है।

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होलाष्टक का महत्व क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ काम नहीं करने चाहिए, लेकिन यह भी मान्यता है कि इस दौरान जो भक्त पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ करते हैं वो स्वीकार्य माने जाते हैं। होलाष्टक के दौरान सभी प्रमुख ग्रह उग्र रूप में होते हैं, इसी वजह से कोई शुभ काम नहीं करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इस दौरान ग्रहों की पूजा करने से उनका पूरा फल मिलता है।

holashtak ke niyam

होलाष्टक के नियम क्या हैं? (Holashtak Puja Niyam 2026)

  • होलाष्टक के आठ दिनों में आपको सात्विक जीवन बिताना चाहिए। इस दौरान आप भूलकर भी मांस और मदिरा का सेवन न करें।
  • होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ काम जैसे शादी-विवाह, बिजनेस की शुरुआत, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे काम भूलकर भी न करें।
  • होलाष्टक के दौरान यदि आप नियमित रूप से विष्णु जी की पूजा करें और विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • होलाष्टक की पूरी अवधि में आप किसी जरूरतमंद को दान करें और किसी भी व्यक्ति या पशु को सताएं नहीं।

यदि आप भी होलाष्टक के नियमों का पालन करते हुए पूजा-पाठ करेंगी तो यह अत्यंत शुभ होगा और इसके पूर्ण फल मिल सकते हैं। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसे ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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FAQ
होलाष्टक के दौरान किन चीजों से बचना चाहिए?
होलाष्टक के दौरान किसी नए काम की शुरुआत नहीं करनी चाहिए, शादी-विवाह जैसी रस्मों से बचना चाहिए और मुंडन, गृह प्रवेश भी नहीं करना चाहिए। 
इस साल होलाष्टक की शुरुआत कब से हो रही है?
साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी, मंगलवार से शुरू हो रहे हैं। 
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