
होली का पर्व पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। यह रंगों का त्योहार होने के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संकेत भी देता है। हिंदू पंचांग के अनुसार होली से पहले आने वाले आठ दिनों को होलाष्टक का समय माना जाता है और इस अवधि में कुछ विशेष कार्यों को करने की मनाही होती है। ऐसा माना जाता है कि धार्मिक दृष्टि से यह अवधि अत्यंत महत्वपूर्ण है। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक का समय विशेष रूप से पूजा-पाठ, साधना, संयम और भक्ति का प्रतीक होता है। इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है, जिससे घर में सकारात्मक प्रभाव बने रहते हैं। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें कि इस साल होलाष्टक की सही तिथि क्या है? इस दौरान आपको आपको कौन से नियमों का पालन करना चाहिए और इसका अवधि का महत्व क्या है?
यह भी पढ़ें- Vastu Tips: होलाष्टक शुरू होने से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना वास्तु दोष से बढ़ सकती हैं मुश्किलें

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार होलाष्टक का संबंध प्रहलाद और राजा हिरण्यकश्यप की कथा से है। ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन से ठीक आठ दिन पहले तक राजा हिरण्यकश्यप ने भगवान श्री विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को अत्यंत कठोर यातनाएं दी थीं और यही वो अवधि थी जब प्रहलाद को कष्ट में देखकर भगवान विष्णु भी अत्यंत दुःख में थे।
इसके बाद जब होलिका दहन के दिन होलिका प्रह्लाद को अग्नि में लेकर बैठीं उस समय होलिका अग्नि में जल गईं, लेकिन विष्णु भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकल आए। प्रह्लाद के कष्ट भरे दिनों को आज भी होलाष्टक के रूप में मनाया जाता है और ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं करने चाहिए। हालांकि इस दौरान पूजा-पाठ करने से दोगुना फल मिलते हैं। सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार आज भी होलाष्टक क आठ दिनों को नकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ माना जाता है और शुभ काम कारण से मना किया जाता है।
यह भी पढ़ें- Holashtak 2026: आखिर होलाष्टक लगने से पहले नवविवाहितों को क्यों भेज दिया जाता है मायके? जानें इसके पीछे की वजह
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ काम नहीं करने चाहिए, लेकिन यह भी मान्यता है कि इस दौरान जो भक्त पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ करते हैं वो स्वीकार्य माने जाते हैं। होलाष्टक के दौरान सभी प्रमुख ग्रह उग्र रूप में होते हैं, इसी वजह से कोई शुभ काम नहीं करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इस दौरान ग्रहों की पूजा करने से उनका पूरा फल मिलता है।

यदि आप भी होलाष्टक के नियमों का पालन करते हुए पूजा-पाठ करेंगी तो यह अत्यंत शुभ होगा और इसके पूर्ण फल मिल सकते हैं। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसे ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Images: Shutterstock .com
यह विडियो भी देखें
Herzindagi video
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।