
भारत, जहां सुबह उठते ही 'नारी तू नारायणी है' के नारे लगते हैं, बेटियों को देवी माना जाता है, नारी सम्मान की बातें डंके की चोट पर की जाती हैं, वहीं हर दूसरे दिन या यूं कहें लगभग रोज ही ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं, जो महिला सुरक्षा तो छोड़िए हमारे देश में महिलाओं के वजूद पर ही सवाल खड़े कर देती हैं। ऐसी घटनाएं जो हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि देवी तो छोड़िए क्या हमारे देश में महिलाओं को इंसान भी समझा जाता है। हाल ही में ग्वालियर से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। इस मामले ने एक बार फिर महिलाओं को लेकर हमारे समाज की सोच को कटघरे में ला दिया है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सड़क किनारे बनी महिलाओं की योग मुद्रा करती पेंटिंग्स पर कुछ लोगों ने अश्लील निशान बना दिए। इस वीडियो के वायरल होने के बाद ये पूछना तो बनता है कि क्या हमारे देश में महिलाएं पेंटिंग्स में भी सुरक्षित नही हैं?
ग्वालियर: यह कोई मामूली शरारत नहीं, बल्कि महिलाओं के प्रति घिनौनी मानसिकता का खुला सबूत है। शर्मनाक है कि एक महिला की पेंटिंग भी ऐसी सोच से सुरक्षित नहीं। प्रशासन ने पेंटिंग्स हटाकर दीवारें सफेद करव दीं, लेकिन दीवारें साफ हो गई, सोच का क्या? pic.twitter.com/crJKzscOU8
— VINI 💞 (@Vini__007) January 6, 2026
ग्वालियर का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को सबसे पहले एक छात्रा आशी कुशवाहा ने शेयर किया था और उसके बाद से कई इंफ्लुएंसर्स और पेज इस वीडियो को शेयर कर चुके हैं। आशी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा था, "मुझे ये बात उठानी पड़ रही है...मैं रोज इस सड़क से निकलती हूं और रोज इसे देखकर मुझे गुस्सा और घिन आती है, हमारे शहर ग्वालियर को स्मार्ट सिटी कहा जाता है, लेकिन ये स्मार्ट लोगों की नहीं, बल्कि गंदी और घिनौनी मानसिकता की निशानी है।" आशी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए इस बात का भी जिक्र किया था कि कैसे आज भी हमारे देश में महिलाओं को इंसान नहीं, बल्कि एक वस्तु के तौर पर देखा जाता है। दीवारों पर पेंट की गई महिलाओं की इन तस्वीरों में 'ब्लैक सिलुएट' यानी काली छायाकृतियां बनाई गई थीं, जो योगा करती हुई नजर आ रही थीं, लेकिन कुछ गिरी हुई सोच के लोगों ने इन तस्वीरों में महिलाओं के शरीर के कुछ खास हिस्सों पर अजीब निशान बना दिए।
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई इंफ्लुएंसर वहां पहुंचे और पेंटिंग के खराब हिस्सों को ठीक किया और इसके बाद ग्वालियर नगर निगम ने पूरी दीवार को सफेद रंग से पोत दिया, जिससे सभी निशान मिट गए।

ये घटना असल में हमारे समाज की उस सोच का परिचय देती है, जिसमें महिलाओं को देवी या इंसान तो छोड़िए, केवल एक वस्तु समझा जाता है। हमारे देश में आए दिन रेप, घरेलू हिंसा या छेड़छाड़ के मामले बताते हैं कि देश के किसी भी हिस्से में, किसी भी उम्र में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और ये मामला तो खैर सोच से भी परे हैं। अब तो शायद ये कहना भी गलत नहीं होगा कि महिलाएं क्या हमारे देश में तो महिलाओं की तस्वीरें या परछाई को भी गलत नजरों से देखा जाता है। अब भला आप ही बताइए ऐसे देश में नारी को नारायणी कहना कितना सही होगा?
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देवी पूजा के दावे कर लीजिए...महिलाओं को बराबरी का हक देने को लेकर गर्व महसूस कर लीजिए या औरतों के सम्मान पर बड़ी-बड़ी कविताएं लिख लीजिए, लेकिन वास्तव में आए दिन कुछ न कुछ ऐसा जरूर सामने आ जाता है, जो हमारे समाज में पनप रही गिरी हुई सोच को सामने लाकर रख देता है और ये सारी बातें खोखली लगने लगती हैं।
Image Courtesy: Shutterstock
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