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Why newspapers deliver early morning

सुबह 5 या 6 बजे ही क्यों आता है अखबार? जानें कैसे तय हुआ यह समय

हम सभी के घर में अखबार सुबह 5 बजे से 5:30 बजे के बीच आ जाता है। अब ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इसके लिए 5 या 6 बजे का समय क्यों फिक्स किया गया है? अगर नहीं, तो नीचे लेख में जानें इसके पीछे का कारण।
Editorial
Updated:- 2026-01-19, 13:59 IST

Why Newspapers Deliver Early Morning: अखबार हमारे जीवन का एक ऐसा हिस्सा है जिसकी शुरुआत सूरज की पहली किरण के साथ होती है। अक्सर जब हम सोकर उठते हैं, तो दरवाजे या बालकनी में अखबार पड़ा मिलता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पेपर सुबह 5 या 6 बजे ही क्यों आता है? दोपहर या शाम को क्यों नहीं? अब ऐसे में अगर कोई इसके पीछे का कारण पूछे, तो यकीनन बहुत कम लोगों को इसके बारे में पता होगा। आज के इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कि अखबार को घर पहुंचाने के लिए सुबह 5या 6 बजे का ही समय क्यों चुना गया है?

सुबह 5 या 6 बजे क्यों आता है अखबार?

Newspaper delivery Timing reason

हमारे जीवन में कई ऐसी चीजें रोजाना होती हैं, जो हमारे लिए सामान्य लगती हैं, लेकिन उसके पीछे मुख्य कारण होता है। कुछ ऐसा ही नियम सुबह आने वाले अखबार के साथ है।

अखबार की सबसे बड़ी ताकत उसकी ताजगी होती है। रात के 11-12 बजे तक की देश-दुनिया की तमाम बड़ी घटनाएं अखबार में दर्ज हो जाती हैं। यदि अखबार दोपहर में आएगा, तो वह खबरें पुरानी हो जाएंगी।

सुबह का समय वह होता है जब इंसान का दिमाग शांत होता है और वह एक साथ पूरी जानकारी पढ़ना चाहता है। इसीलिए, प्रिंटिंग प्रेस रात भर चलती है।

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सुबह अखबार आने को लेकर क्या है कोई लिखित नियम

अखबार सुबह 5-6 बजे आएगा या फिर इतने ही समय बांटा जाएगा। इसे लेकर कोई सरकारी नियम नहीं है बल्कि बाजार की मांग है। इसकी शुरुआत 18वीं और 19वीं शताब्दी में हुई जब लोग काम पर जाने से पहले खबरों से अपडेट होना चाहते थे।

धीरे-धीरे पाठकों की आदत बन गई कि उन्हें सुबह की चाय के साथ ही अखबार चाहिए। अगर कोई अखबार देरी से आता है, तो पाठक उसे छोड़कर दूसरे अखबार की ओर चले जाते हैं।

लॉजिस्टिक्स और ट्रैफिक भी है कारण

Why newspapers deliver early morning

सुबह 5 बजे अखबार पहुंचाने का एक व्यावहारिक कारण ट्रैफिक भी है। अखबार की गाड़ियां रात 2 से 3 बजे प्रेस से निकलती हैं। उस समय सड़कें खाली होती हैं, जिससे शहर के कोने-कोने तक अखबार तेजी से पहुंचाए जा सकते हैं।

अगर ये गाड़ियां दिन में चलें, तो ट्रैफिक की वजह से अखबार समय पर नहीं पहुंच पाएंगे। इसके बाद अखबार बांटने वाले का काम शुरू होता है, जो धूप निकलने से पहले अपना काम खत्म करना चाहते हैं।

एड्स और बिजनेस का गणित

अखबारों की कमाई का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है। एड देने वाली कंपनियां चाहती हैं कि उनका एड रीडर सुबह सबसे पहले देखे। चाहे वह सेल की जानकारी हो या सरकारी नोटिस, सुबह का समय बिजनेस के लिहाज से सबसे कीमती माना जाता है।

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