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केले के छिलके पर पैर पड़ते ही क्यों फिसल जाते हैं लोग? जानें इसके पीछे का दिलचस्प वैज्ञानिक कारण

केले के छिलके पर फिसलने का वैज्ञानिक कारण बताया गया है। छिलके की अंदरूनी सतह पर मौजूद फॉलिकुलर म्यूसिलेज नामक चिपचिपा पदार्थ दबाव पड़ने पर एक बेहद चिकने जेल में बदल जाता है। 
Editorial
Updated:- 2026-04-07, 16:00 IST

सड़क पर चलते हुए केले के छिलके पर पैर पड़ना और धड़ाम से गिर जाना, यह नजारा हमने फिल्मों और असल जिंदगी में कई बार देखा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सड़क जैसी खुरदरी जगह पर भी यह छिलका बर्फ की तरह क्यों फिसलता है? सेब या संतरे के छिलकों के साथ ऐसा क्यों नहीं होता? इसके पीछे एक गहरा साइंटिफिक राज छिपा है। जापान की किटासाटो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस पर एक शोध किया, जिसके लिए उन्हें इग-नोबेल पुरस्कार से भी नवाजा गया। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि साइंस की भाषा में यह छिलका इतना खतरनाक क्यों है? आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि केले के छिलके पर क्यों फिसल जाते हैं लोग? आगे पढ़ते हैं...

केले के छिलके के जेल के कारण

शोध  में पता चला कि केले के छिलके की अंदरूनी सतह पर फॉलिकुलर म्यूसिलेज नाम का एक खास चिपचिपा पदार्थ होता है। यह पदार्थ मुख्य रूप से पॉलीसैकेराइड्स और लिपिड से बना होता है।  

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जब तक छिलका जमीन पर पड़ा है, यह सेफ रहता है, लेकिन जैसे ही कोई इस पर पैर रखता है तो दबाव की वजह से इसकी सूक्ष्म कोशिकाएं फट जाती हैं और वह चिपचिपा पदार्थ एक बेहद चिकने जेल में बदल जाता है।

फ्रिक्शन के खत्म होने के कारण

यह जेल एक पावरफुल लुब्रिकेंट की तरह काम करता है। साइंस के अनुसार, केले के छिलके का घर्षण गुणांक मात्र 0.07 होता है। तुलना के लिए समझें तो यह लगभग उतना ही चिकना है जितना कि बर्फ पर स्कीइंग करना। जब आप इस पर पैर रखते हैं, तो यह जेल आपके जूते और जमीन के बीच एक ऐसी परत बना देता है जहां घर्षण यानी पकड़ खत्म हो जाती है। अचानक घर्षण खत्म होने से पैर तेजी से आगे की ओर भागता है और शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे व्यक्ति गिर जाता है।

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अन्य छिलके क्यों इतने चिकने नहीं होते?

सेब, संतरा या आम के छिलकों में वह विशेष पॉलीसैकेराइड्स जेल नहीं होता जो केले में पाया जाता है। संतरे के छिलके में तेल तो होता है, लेकिन वह इतना गाढ़ा नहीं होता कि घर्षण को पूरी तरह खत्म कर दे। 

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इसके अलावा, केले का छिलका अंदर से बहुत नरम और रेशेदार होता है जो दबाव पड़ते ही तुरंत कुचल जाता है और तरल पदार्थ छोड़ देता है, जबकि अन्य फलों के छिलके इसके मुकाबले सख्त होते हैं।

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Images: Freepik/shutterstock

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