
हनुमान जयंती 2026 के पावन अवसर पर बजरंगबली की भक्ति में डूबने का इससे अच्छा तरीका और क्या हो सकता है कि हम उनके प्रिय भजनों को गाएं। बता दें कि हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए किसी कठिन मंत्र की आवश्यकता नहीं है, बस सच्चे मन से गाए गए भजन ही उनके हृदय तक पहुंच जाते हैं। यहां आपको दो सबसे फेमस और मन को शांति देने वाले भजनों के लिरिक्स दिए जा रहे हैं, जिन्हें आप इस जन्मोत्सव पर गा सकते हैं। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि हनुमान जी के कौन-से जो भजन आपके काम आ सकते हैं। पढ़ते हैं आगे...
राम जी चले ना हनुमान के बिना, लंका जले ना हनुमान के बिना।
जग में चले ना काम श्री राम के बिना,राम जी चले ना हनुमान के बिना।
लक्ष्मण का जब प्राण बचाना था,पर्वत उठाना पड़ा हनुमान के बिना।

जड़ी-बूटी मिले ना हनुमान के बिना,राम जी चले ना हनुमान के बिना।
सीता मैया का पता लगाना था,सागर लांघा ना जाए हनुमान के बिना।
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मुंदरी मिले ना हनुमान के बिना,राम जी चले ना हनुमान के बिना।
बैठे सिंहासन पे राम और सीता,आरती सजे ना हनुमान के बिना।
कीर्तन जमे ना हनुमान के बिना,राम जी चले ना हनुमान के बिना।
हे दुख भंजन मारुति नंदन, सुन लो मेरी पुकार,पवन सुत विनती बारंबार।
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, दुखियों के तुम भाग्य विधाता,
शक्ति तुम्हारी सब जग जाने, महिमा अपरंपार
पवन सुत विनती बारंबार।
विकट रूप धरि लंका जलायो, सीता माँ का शोक मिटायो,
राम काज कीन्हा तुम सजधज, जय जय पवन कुमार।
पवन सुत विनती बारंबार।
जहाँ-जहाँ कीर्तन होय तुम्हारा, तहाँ-तहाँ प्रभु वास तुम्हारा,
चरण शरण में आए जो तेरी, उसका हो उद्धार।
पवन सुत विनती बारंबार।
हे दुख भंजन मारुति नंदन, सुन लो मेरी पुकार,पवन सुत विनती बारंबार।

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे,
देख लो मेरे दिल के नगीने में।।
दोहा
ना चलाओ बाण, व्यंग के ऐ विभिषण, ताना ना सह पाऊं,
क्यूँ तोड़ी है ये माला, तुझे ए लंकापति बतलाऊं,
मुझमें भी है तुझमें भी है, सब में है समझाऊँ,
ऐ लंकापति विभीषण, ले देख, मैं तुझको आज दिखाऊं।।
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में, देख लो मेरे दिल के नगीने में।।
मुझको कीर्ति ना वैभव ना यश चाहिए, राम के नाम का मुझ को रस चाहिए,
सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में, श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में।।
दोहा
अनमोल कोई भी चीज, मेरे काम की नहीं,,,
दिखती अगर उसमे छवि, सिया राम की नहीं।।
राम रसिया हूँ मैं, राम सुमिरण करूँ, सिया राम का सदा ही मै चिंतन करूँ,
सच्चा आनंद है ऐसे जीने में, श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में।।
फाड़ सीना हैं, सब को ये दिखला दिया, भक्ति में मस्ती है, सबको बतला दिया,
कोई मस्ती ना, सागर को मीने में, श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में।।
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे, देख लो मेरे दिल के नगीने में।।
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