
दिल्ली के मेरे पीजी का एक ऐसा किस्सा है जिसे सुनकर शायद आप कांप जाएंगी। ये किस्सा मेरी रूम मेट के साथ ही हुआ है और ये तब की बात है जब मुझे दिल्ली आए हुए ज्यादा समय नहीं हुआ था। मेरी रूम मेट बाथरूम में थी और हमारे बाथरूम के ऊपर रौशनदान की एक खिड़की थी। वहां से 14-15 साल का पीजी के मालिक का नौकर उसे देख रहा था। किसी तरह से मेरी रूम मेट की नजर उस पर पड़ गई और उसने हंगामा खड़ा कर दिया। पहले तो पीजी के मालिक ने इस किस्से को दबाने की कोशिश की, लेकिन क्योंकि पीजी में रह रही सभी लड़कियों ने पुलिस के पास जाने की शिकायत की और मैंने इस मामले को मीडिया में उछालने की बात की तो पीजी के मालिक ने उस नौकर को सज़ा दी (अपने तरीके से) और उसे निकाल दिया।
अगले ही दिन पुलिस को बुलवाया गया। पीजी को रजिस्टर करवाया गया। वहां सीसीटीवी की सुरक्षा (बाहरी हिस्से में) लगाई गई। बाद में वो पीजी ज्यादा सुरक्षित हो गया। सामने एक सिक्योरिटी गार्ड को भी रखवाया गया। ये तो था वो किस्सा जहां मकान मालिक थोड़ा संजीदा होकर सुरक्षा के बारे में सोच रहा था। पर दिल्ली जैसे शहर की बात करें तो यहां कई ऐसे पीजी हैं जहां न तो सुरक्षा के सही इंतज़ाम हैं और न ही लड़कियों को सही से रहने लायक सुविधाएं दी जाती हैं।

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- अगर पीजी से जुड़ा मामला है तो आपको सुरक्षा की जांच पहले करनी चाहिए
- पीजी के मालिक से ये जरूर पूछें कि पीजी रजिस्टर्ड है या नहीं
- अगर सुरक्षा में चूक पाई जाती है तो आपको सबसे पहले इसे लेकर हंगामा मचाना चाहिए और सभी लड़कियों को मिलकर ये करना चाहिए
- अगर पीजी का मालिक किसी हरकत के बाद कोई कदम नहीं उठा रहा है तो आपको खुद पुलिस के पास जाना चाहिए और ऐसे पीजी से तुरंत हट जाएं तो बेहतर है।
ये सब तो मेरी अपनी सोच है, लेकिन इस किस्से से एक बड़ा सवाल सामने आता है कि महिला सुरक्षा को लेकर क्या कायदे और नियम हैं हमारे कानून में किरायदारों के नजरिए से।
इस मामले में हमने एडवोकेट अंकुर बाली से बात की। अंकुर अक्सर दिल्ली और चंडीगढ़ कोर्ट में मौजूद रहते हैं और ऐसे मामलों में उनकी अच्छी पकड़ है। अंकुर जी ने हमें बताया कि जहां तक किरायदारों का सवाल है वहां पीजी और फ्लैट में रहने वाले लोगों के लिए अलग-अलग नियम होंगे। हमने उनसे सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं बल्कि सभी को लेकर सवाल किए। उन्होंने कुछ ऐसी बातें बताईं जो लोगों के बहुत काम आ सकती हैं।

मैंने उनसे एक गर्ल्स पीजी के बारे में सवाल किया और ये पूछा कि क्या महिलाओं के कमरे में बार-बार मकान मालिक आ सकता है तो उनका जवाब था कि, 'पीजी और हिंदुस्तान में किराएदारों के लिए बने कानून में अच्छा खासा अंतर है। अगर एक ही घर के किसी कमरे को पीजी के तौर पर दिया गया है तो उन्हें आने से नहीं रोका जा सकता। कई पीजी तो सिर्फ पैसा कमाने का जरिया होते हैं। जहां लड़कियां बहुत खराब हालात में भी रहती हैं। ऐसे मामलों में अधिकतर पीजी लाइसेंस नहीं होते। कानूनी तौर पर उन्हें नहीं रोका जा सकता कि वो अपने ही घर में आएं।'

इस नियम में थोड़ा बदलाव आ जाता है। हमने कई जगह पढ़ा है, कई साइट्स कहती हैं कि लैंडलॉर्ड बिना नोटिस के आपके घर में नहीं आ सकता है। इसको लेकर भी हमने अंकुर जी से सवाल किया कि क्या वाकई ऐसा कुछ है। तो उनका सीधा सा जवाब था, 'लैंडलॉर्ड अपनी प्रॉपर्टी का ऑथोराइज्ड एजेंट होता है और वो अपने घर को इंस्पेक्ट करने आ सकता है। लेकिन एकदम कमरे में नहीं आ सकता। वो घर में जरूर आ सकता है। अगर आप चाहते हैं कि वो पहले से बताए तो ये बात आप डीड में लिखवा सकती हैं। हां, ये जरूर है कि वो लैंडलॉर्ड सिर्फ दिन के वक्त ही आएगा। वो रात के वक्त नहीं आ सकता।'
इस सवाल के जवाब में अंकुर जी कहते हैं, 'अगर रेंट एग्रीमेंट में नहीं दी गई है सर्विस तो मकान मालिक उसे कभी भी बंद कर सकता है। प्रॉपर्टी टैक्स को छोड़कर अगर कोई सर्विस जैसे इलेक्ट्रिसिटी, मेंटेनेंस, पानी आदि मकान मालिक पहले फ्री देता था और बाद में नहीं दे रहा है तो वो ये कर सकता है।' इसीलिए बेहतर होगा कि आप रेंट एग्रीमेंट बनवा कर रखें।
इस मामले में किरायदार के हक में नियम हैं। ये गर्ल्स पीजी में रहने वाली लड़कियों के लिए भी है। 'अगर किराया 3500 रुपए से ज्यादा है तो बिना पूर्व नोटिस के मकान मालिक किसी को भी तुरंत नहीं निकाल सकता। भले ही निकालने का कोई भी कारण क्यों न हो, उसे पीजी में रहने वाली लड़की या फिर फ्लैट में रहने वाले किराएदार को नोटिस देना ही होगा।'
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1. महिला सुरक्षा के लिए पीजी को पहले जांच लें
2. मकानमालिक रात के वक्त कभी भी किसी भी हालत में बिना नोटिस के नहीं आ सकता है
3. मकानमालिक किसी को भी तुरंत घर से बाहर नहीं निकाल सकता है। उसे नोटिस देना ही होगा।
सुरक्षा और सुविधा के लिए बेहतर होगा कि आप पहले जानकारी लें और उसके बाद किसी पीजी या फ्लैट आदि में रहें।
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